Supreme Court bail

शराब घोटाला मामला: अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, कई शर्तें लागू

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। अदालत ने यह फैसला सोमवार को सुनवाई के दौरान सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिल टुटेजा 21 अप्रैल 2024 से जेल में बंद थे और उनके मामले में अभी कई गवाहों से पूछताछ बाकी है, जिससे ट्रायल में समय लग सकता है। अदालत ने यह भी माना कि इसी मामले के कई अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आदेश के अनुसार, अनिल टुटेजा को जमानत मिलने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे किसी भी सरकारी अधिकारी से संपर्क नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करने का निर्देश दिया गया है। ईडी के अनुसार, यह मामला 2019 से 2022 के बीच का है, जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान एक संगठित नेटवर्क के जरिए शराब नीति में गड़बड़ी कर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई। ईडी का अनुमान है कि इस कथित घोटाले से लगभग 2800 से 3000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। जांच में कई अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों के शामिल होने का दावा किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की सच्चाई का फैसला ट्रायल के दौरान ही होगा।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से 4 दिन की अंतरिम जमानत

छत्तीसगढ़ के बड़े शराब घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिन की अंतरिम जमानत दी है। जमानत मां के खराब स्वास्थ्य के कारण दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल पारिवारिक परिस्थिति के लिए है और 4 दिन बाद उन्हें फिर से जेल लौटना होगा। ढेबर के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे समय में परिवार के पास रहने का अवसर मिलना चाहिए। 🔹 छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मामला ED की जांच में सामने आया कि 3,000 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला हुआ। तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर सिंडिकेट बनाया। अनवर ढेबर ने रिश्तेदारों और CA के नाम कंपनियों में निवेश कर कमीशन का पैसा छिपाया। EOW के अनुसार, शराब डिस्टलर्स से कमीशन और बी पार्ट की बिक्री से 15% रकम अनवर ढेबर को जाती थी। इसे ढेबर के करीबी विकास अग्रवाल और सुब्बू इकट्ठा करते थे। 🔹 फरवरी 2019 में बना सिंडिकेट अनवर ढेबर ने फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और आबकारी अधिकारियों की बैठक कर सिंडिकेट बनाया। इसमें नवीन केडिया, भूपेंदर पाल सिंह भाटिया, प्रिंस भाटिया, राजेंद्र जायसवाल और AP त्रिपाठी समेत अन्य शामिल थे। सिंडिकेट ने शराब बिक्री के लेन-देन को ए, बी और सी पार्ट में बांटा: A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन B: नकली होलोग्राम वाली शराब C: डिस्टलरी सप्लाई एरिया बदलकर अवैध वसूली 🔹 गिरफ्तारी EOW ने इस मामले में कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा, सुनील दत्त समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया।पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बाद पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को भी शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस जमानत का लाभ ढेबर केवल परिवार के साथ समय बिताने के लिए ले सकेंगे, और चार दिन बाद उन्हें जेल लौटना अनिवार्य है।

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