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छात्र संघ चुनाव की मांग पर NSUI का प्रदर्शन: देवेंद्र यादव बोले- जेल जाओगे तो सांसद-विधायक बनोगे

छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर गुरुवार को NSUI कार्यकर्ताओं ने रायपुर में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने महिला थाना चौक के पास एकत्र होकर प्रदर्शन किया और फिर सीएम हाउस की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने मुख्यमंत्री निवास के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इलाके में चार स्तर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस पर डंडे फेंकने का भी आरोप लगाया गया। कांग्रेस और NSUI नेताओं ने राज्य सरकार पर छात्र संघ चुनाव कराने से बचने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार को डर है कि छात्र संगठन चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार बड़ी जीत दर्ज करेंगे। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष Vinod Jakhar ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सामान्य परिवारों से आने वाले युवाओं को भी राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता मजदूरी करते हैं, लेकिन संगठन ने उन्हें लगातार जिम्मेदारियां दीं और आज राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। उन्होंने युवाओं से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने और सत्ता को चुनौती देने का आह्वान किया। वहीं कांग्रेस विधायक Devendra Yadav ने कार्यकर्ताओं को संघर्ष के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आंदोलन और जेल यात्रा राजनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग संघर्ष करेंगे, भविष्य में वही विधायक और सांसद बनेंगे।

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छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर NSUI का CM हाउस घेराव आज, बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने जताया समर्थन

रायपुर में छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर आज 7 मई को NSUI शाम 4 बजे मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगी। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और युवा नेताओं ने अपनी राय रखी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही छात्र संघ चुनाव के समर्थन में नजर आए, हालांकि चुनाव नहीं होने को लेकर दोनों दलों ने एक-दूसरे पर सवाल भी उठाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि छात्र संघ चुनाव नेतृत्व तैयार करने की पहली पाठशाला होते हैं। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय और कॉलेजों में होने वाले चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संगठन क्षमता और प्रशासनिक समझ विकसित करने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के कई बड़े नेता छात्र राजनीति से निकलकर आगे आए हैं। कांग्रेस शासनकाल में चुनाव नहीं होने के सवाल पर प्रमोद दुबे ने कहा कि सरकार तैयार थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता मृत्युंजय दुबे ने भी छात्र संघ चुनाव को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में छात्रों की समस्याओं को निर्वाचित प्रतिनिधि बेहतर तरीके से प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। उनके अनुसार 18 साल का युवा जब देश के जनप्रतिनिधि चुन सकता है, तो उसे अपने कॉलेज में भी प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि मृत्युंजय दुबे ने कांग्रेस और NSUI पर सवाल उठाते हुए कहा कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी चुनाव बंद रहे, तब संगठन ने इस मुद्दे पर ज्यादा आवाज नहीं उठाई। भाजयुमो के पूर्व प्रदेश मंत्री और PTRSU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रखर मिश्रा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव गरीब और मध्यमवर्गीय युवाओं को राजनीति में आगे आने का मौका देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र राजनीति में ABVP के प्रभाव के कारण अब NSUI चुनाव की मांग को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। इस पर पलटवार करते हुए NSUI जिलाध्यक्ष शांतनु झा ने कहा कि 2019 से 2022 तक कोरोना महामारी के चलते छात्र संगठन चुनाव नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया कि यदि कांग्रेस सरकार दोबारा बनती, तो चुनाव जरूर कराए जाते। उन्होंने कहा कि NSUI लगातार छात्र हित में आंदोलन कर रही है और अब भी चुनाव कराने की मांग पर अड़ी हुई है।

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