student success story

छत्तीसगढ़ बोर्ड टॉपर्स की प्रेरक कहानियां: मोबाइल से दूरी, डिजिटल स्टडी और संघर्ष से हासिल की सफलता

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इस बार चर्चा सिर्फ पास प्रतिशत या मेरिट लिस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि टॉपर्स की संघर्ष भरी कहानियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। 12वीं में 83.04 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए, जबकि टॉप-10 मेरिट सूची में 43 छात्रों ने जगह बनाई। 10वीं में भी 42 छात्र मेरिट में शामिल रहे। खास बात यह रही कि इस बार लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इन परिणामों के पीछे अलग-अलग परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले छात्रों की मेहनत छिपी है। किसी ने पिछली असफलता को अपनी ताकत बनाया, तो किसी ने बिना कोचिंग डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई कर सफलता हासिल की। कुछ छात्रों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। दो नंबर से छूटा सपना, बना टॉप करने की वजहबलौदाबाजार जिले के पलारी निवासी जिज्ञासु वर्मा ने 12वीं बोर्ड में 98.60 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। खास बात यह है कि 10वीं में वे सिर्फ दो अंकों से मेरिट सूची से बाहर हो गए थे। यही कमी उनके लिए प्रेरणा बन गई। जिज्ञासु एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता किराना दुकान चलाते हैं और मां सरकारी स्कूल में प्रधानपाठिका हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन और फोकस के साथ पढ़ाई की। परीक्षा से 21 दिन पहले उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली और केवल किताबों पर ध्यान दिया। डिजिटल प्लेटफॉर्म से पढ़ाई कर हासिल किया मुकामरायपुर की हिमशिखा गुप्ता ने बिना कोचिंग 96.80 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए यूट्यूब और ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। हिमशिखा रोजाना 3 से 4 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन पूरी एकाग्रता के साथ। किसी भी विषय में समस्या आने पर वे तुरंत ऑनलाइन माध्यमों से समाधान ढूंढती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि सही दिशा में मेहनत करने से सफलता संभव है। मैकेनिक की बेटी बनी मेरिट में शामिलरायपुर की आफिया खातून ने 12वीं बोर्ड में 9वां स्थान हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। उनके पिता मोटर मैकेनिक हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी। बिना कोचिंग के आफिया ने स्कूल और ऑनलाइन माध्यमों के सहारे अपनी तैयारी की। अब उनका लक्ष्य UPSC परीक्षा पास कर देश सेवा करना है। करघे के घर से मेरिट तक का सफरबलौदाबाजार के कटगी गांव के नितेश देवांगन ने 12वीं में प्रदेश में 9वां स्थान हासिल किया। वे एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां पारंपरिक रूप से कपड़ा बुनने का काम होता है। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के बावजूद नितेश ने मेहनत और धैर्य के दम पर यह सफलता हासिल की। उनकी उपलब्धि अब गांव के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है। निष्कर्षइन सभी टॉपर्स की कहानियां यह दिखाती हैं कि सफलता सिर्फ संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही सोच, मेहनत और निरंतरता से हासिल होती है। किसी ने मोबाइल से दूरी बनाकर फोकस बढ़ाया, तो किसी ने उसी तकनीक को अपनी ताकत बनाया। हर कहानी अलग है, लेकिन संदेश एक ही है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।

छत्तीसगढ़ बोर्ड टॉपर्स की प्रेरक कहानियां: मोबाइल से दूरी, डिजिटल स्टडी और संघर्ष से हासिल की सफलता Read Post »

Chhattisgarh, Education, Raipur, State, Top News

गंभीर बीमारी से जंग जीतकर छात्रा ने CBSE में 90.4% हासिल किए, व्हीलचेयर पर दी परीक्षा

छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर की एक छात्रा ने असाधारण हिम्मत और संघर्ष का परिचय देते हुए गंभीर बीमारी को मात देकर सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में 90.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। महज 15 साल की इस छात्रा को गुइलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी दुर्लभ बीमारी हो गई थी, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नसों को प्रभावित करता है। बीमारी के दौरान उसकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा और बाद में ट्रैकियोस्टोमी भी करनी पड़ी। कई महीनों तक वह बोल नहीं पा रही थी और इशारों या हाथ पर अक्षर लिखकर ही अपनी बात समझाती थी। इस दौरान उसने अपने भाई से आखिरी बार परिवार से बात कराने की इच्छा भी जताई थी। करीब डेढ़ महीने तक रायपुर में इलाज के बाद उसे नागपुर ले जाया गया, जहां लंबे समय तक उपचार चला। जब वह वापस लौटी तो उसके हाथों में इतनी कमजोरी थी कि पेन पकड़ना भी मुश्किल था। इसके बावजूद उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी जारी रखी। धीरे-धीरे फिजियोथेरेपी और अभ्यास के जरिए उसने फिर से लिखना सीखा। प्री-बोर्ड परीक्षा उसने व्हीलचेयर पर बैठकर दी और अच्छे अंक हासिल किए। बोर्ड परीक्षा में उसे अतिरिक्त समय दिया गया, लेकिन उसने निर्धारित समय से पहले ही पेपर पूरा कर लिया और शानदार 90.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। परिवार के अनुसार, इलाज के दौरान उसने कई मरीजों को संघर्ष करते और जान गंवाते देखा, लेकिन उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। अब उसका सपना सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करने का है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला काफी जटिल था और उसे आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया था। विशेषज्ञों की टीम के समन्वित प्रयास और छात्रा की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही यह संभव हो सका।

गंभीर बीमारी से जंग जीतकर छात्रा ने CBSE में 90.4% हासिल किए, व्हीलचेयर पर दी परीक्षा Read Post »

Chhattisgarh, Education, Top News
Scroll to Top