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रायपुर में यूजर चार्ज बढ़ने पर बवाल, जनता बोली- सफाई नहीं तो अतिरिक्त शुल्क क्यों?

रायपुर। रायपुर नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के लिए यूजर चार्ज में वृद्धि किए जाने के बाद शहर में विरोध शुरू हो गया है। बढ़े हुए शुल्क को लेकर आम नागरिकों, व्यापारियों और कांग्रेस ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि जब शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है, तो अतिरिक्त शुल्क वसूलना उचित नहीं है। नई दरों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं पर सालाना 120 रुपये और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर करीब 600 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। बढ़ती महंगाई के बीच इस फैसले को लेकर लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। विपक्ष के नेता Aakash Tiwari ने कहा कि नगर निगम पहले नियमित कचरा संग्रहण और बेहतर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करे, उसके बाद ही यूजर चार्ज बढ़ाने पर विचार किया जाए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर तेलीबांधा क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया है और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। वहीं महापौर Meenal Choubey ने कहा कि यूजर चार्ज में बढ़ोतरी का निर्णय नया नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसकी प्रक्रिया वर्ष 2022 में तत्कालीन कांग्रेस परिषद के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उनके अनुसार, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली एजेंसी के साथ हुए अनुबंध के तहत यूजर चार्ज से भुगतान का प्रावधान किया गया था। महापौर ने यह भी स्वीकार किया कि शहर में अभी शत-प्रतिशत कचरा संग्रहण नहीं हो पा रहा है, लेकिन नगर निगम सफाई व्यवस्था में सुधार और एजेंसी की निगरानी को प्राथमिकता दे रहा है। व्यापारी संगठनों और नागरिकों का कहना है कि कई इलाकों में कचरा समय पर नहीं उठाया जाता और नियमित सफाई भी नहीं होती। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। यूजर चार्ज के विरोध में कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया है। पार्टी का कहना है कि जब तक यह फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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रायपुर में सफाई ठेकेदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, 70 वार्डों की सफाई व्यवस्था पर पड़ा असर

रायपुर नगर निगम की सफाई व्यवस्था बुधवार से गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है। भुगतान में देरी से नाराज सफाई ठेकेदारों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है। इसका सीधा असर शहर के सभी 70 वार्डों में दिखाई देने लगा है, जहां कई क्षेत्रों में नियमित कचरा संग्रहण और सफाई कार्य बाधित हो गए हैं। सफाई ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें पिछले चार महीनों से उनके कार्यों का भुगतान नहीं मिला है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने दो दिन पहले नगर निगम आयुक्त और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी को ज्ञापन सौंपकर जल्द भुगतान की मांग की थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वे कार्य बंद करने के लिए मजबूर होंगे। हड़ताल शुरू होते ही शहर की सफाई व्यवस्था पर असर दिखने लगा है। कई वार्डों में सुबह कचरा उठाव नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस बीच, नगर निगम द्वारा हाल ही में बढ़ाए गए यूजर चार्ज के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने भी प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर झाड़ू लगाकर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। उन्होंने बढ़ते यूजर चार्ज और खराब होती सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। गौरतलब है कि नगर निगम ने हाल ही में आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी के यूजर चार्ज में वृद्धि की है, जिसका विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। ऐसे समय में सफाई ठेकेदारों की हड़ताल ने निगम की वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि शहर में पहले से ही सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। ऐसे में भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदारों का हड़ताल पर जाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने निगम से तत्काल बकाया भुगतान कर सफाई व्यवस्था को जल्द सामान्य करने की मांग की। यदि यह हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है, तो शहर में कचरे के ढेर लगने की आशंका बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और बारिश के मौसम में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से संक्रमण और विभिन्न बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। फिलहाल नगर निगम प्रशासन ठेकेदारों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने और सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहा है।

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मरीन ड्राइव की गंदगी पर प्रशासन सख्त, 15 दिन में जलकुंभी हटाने के निर्देश

रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में बढ़ती गंदगी और अव्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा ने मरीन ड्राइव पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण किया और तालाब किनारे फैली गंदगी पर नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान विधायक ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि देवार डेरा क्षेत्र का तकनीकी सर्वे जल्द कराया जाए और वहां रह रहे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने क्षेत्र को व्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाए रखने पर जोर दिया। वहीं नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने तेलीबांधा तालाब की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने सफाई कार्य में लापरवाही पर ठेकेदार को फटकार लगाते हुए अगले 15 दिनों के भीतर तालाब से जलकुंभी हटाने के निर्देश दिए। आयुक्त ने कहा कि तालाब की नियमित सफाई और निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि मरीन ड्राइव क्षेत्र में स्वच्छता बनी रहे और लोगों को बेहतर वातावरण मिल सके। नगर निगम ने मरीन ड्राइव क्षेत्र के दुकानदारों को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। सभी दुकानों में डस्टबिन रखना अनिवार्य किया गया है और गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई दुकानदार तालाब में कचरा फेंकता हुआ पाया गया या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ जुर्माने सहित कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान नगर निवेशक आभाष मिश्रा, जोन-3 कमिश्नर प्रीति सिंह, कार्यपालन अभियंता आशुतोष सिंह समेत नगर निगम के कई अधिकारी मौजूद रहे।

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कैनाल रोड 2.0 से बढ़ी चिंता: सड़क चौड़ीकरण के सर्वे के बाद 1500 परिवारों को घर टूटने का डर

Raipur में प्रस्तावित कैनाल रोड 2.0 परियोजना को लेकर चार वार्डों के हजारों परिवारों में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। वार्ड नंबर 58, 59, 60 और 61 के करीब 1300 से 1500 परिवारों को आशंका है कि सड़क चौड़ीकरण की योजना के चलते उनके घर प्रभावित हो सकते हैं। इसी चिंता को लेकर बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात कर अपनी परेशानियां साझा कीं। लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से नगर निगम की टीम इलाके में घर-घर जाकर सर्वे कर रही है। इस दौरान मकानों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई की माप ली जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई जगह कर्मचारियों ने घरों के भीतर जाकर भी नाप-जोख की और मकान से जुड़े दस्तावेज लेकर दफ्तर आने के लिए कहा। रहवासियों का दावा है कि कर्मचारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया “कैनाल रोड 2.0” योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए की जा रही है। सर्वे के बाद इलाके में डर का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके मकान सुरक्षित रहेंगे या तोड़ दिए जाएंगे। कई परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनका पूरा जीवन इसी इलाके में बीता है। ऐसे में अचानक शुरू हुए सर्वे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि वे इस मामले को लेकर महापौर से भी मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। डर और अनिश्चितता की वजह से कई लोग मानसिक तनाव में हैं और नियमित कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। रहवासियों का कहना है कि कभी घर के सामने हिस्से की माप ली जा रही है तो कभी कर्मचारियों द्वारा घर के अंदर जाकर सर्वे किया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में दहशत जैसी स्थिति बन गई है। मामले पर नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि किसी भी परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो लोगों के घर बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।

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विवाद के बाद रायपुर में फिर शुरू हुआ डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, कर्मचारियों और कंपनी में बनी सहमति

रायपुर में पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन मंगलवार से दोबारा शुरू हो गया। रामकी ग्रुप के सफाई कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर काम पर वापसी की। हालांकि सुबह काम शुरू होने से पहले कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। सुबह करीब 5 बजे सफाई कर्मचारी काम पर पहुंचे, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने उन्हें तुरंत काम पर लेने से इनकार कर दिया। इससे मौके पर विवाद बढ़ गया। काफी देर तक बातचीत और चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद शहर में कचरा उठाने का काम फिर शुरू कराया गया। इस बीच, लगातार चार दिनों तक कचरा नहीं उठने से नाराज नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी खुद कचरा वाहन चलाकर वार्डों में पहुंचे। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले आठ वर्षों से उनके वेतन में अनियमितता की जा रही है। कर्मचारियों के मुताबिक कंपनी को प्रति सफाईकर्मी लगभग 9,750 रुपए का भुगतान मिलता है, लेकिन कर्मचारियों को केवल 7 से 8 हजार रुपए तक ही वेतन दिया जा रहा है। सफाई कर्मचारियों ने वेतन भुगतान में गड़बड़ी की जांच के लिए एक समिति गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रह सकता है। मंगलवार को कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बैठक भी हुई, जिसके बाद काम पर लौटने पर सहमति बनी। वहीं DSW रामकी कंपनी ने नगर निगम पर भुगतान लंबित रखने का आरोप लगाया है। कंपनी का कहना है कि मार्च 2025 से अब तक करीब 78 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। कंपनी के अनुसार निगम की ओर से केवल आंशिक राशि दी जा रही है, जबकि डीजल, वाहन रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। कचरा वाहन चालकों ने भी वेतन बढ़ाने और समय पर भुगतान की मांग को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें रखी जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। तीन दिनों तक कचरा संग्रहण बंद रहने से शहर के कई इलाकों में गंदगी और कचरे के ढेर जमा हो गए थे। लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जल्द व्यवस्था बहाल करने की मांग की थी। गौरतलब है कि इसी बीच केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण टीम का रायपुर दौरा भी प्रस्तावित है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी।

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रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन बंद, भुगतान विवाद के बीच रामकी कंपनी ने रोका काम

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। शहर के कई इलाकों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन बंद होने से लोग परेशान नजर आए। सुबह से कई मोहल्लों में लोग घरों के बाहर कचरे के डस्टबिन लेकर गाड़ियों का इंतजार करते रहे, लेकिन कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचीं। जानकारी के मुताबिक, शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रही DSW Ramky ने काम अस्थायी रूप से रोक दिया है। कंपनी का आरोप है कि Raipur Municipal Corporation की ओर से मार्च 2025 से अब तक करीब 78 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया गया है। कंपनी का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च और अधूरे भुगतान के कारण संचालन करना मुश्किल हो गया है। इधर, कंपनी के ड्राइवर भी वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग की जा रही थी, लेकिन इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। इसी वजह से काम बंद करने का निर्णय लिया गया। रायपुर और नवा रायपुर क्षेत्र से हर दिन लगभग 750 टन कचरा निकलता है, जिसे संकरी स्थित प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी व्यवस्था में सैकड़ों वाहन और बड़ी संख्या में कर्मचारी लगे हुए हैं। कंपनी के अनुसार फिलहाल 269 वाहन और करीब 800 कर्मचारी इस काम में जुड़े हैं। सफाई व्यवस्था बाधित होने से नगर निगम के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो शहर में कचरे का ढेर लगने का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही पुराने डंपिंग यार्ड के लगभग भर जाने से कचरा निपटान की समस्या और गंभीर हो सकती है। बताया जा रहा है कि रामकी कंपनी वर्ष 2018 से PPP मॉडल के तहत शहर की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था संभाल रही है। नगर निगम और कंपनी के बीच 15 वर्षों का अनुबंध है। हालांकि फिलहाल भुगतान और संचालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। इस मामले में Meenal Choubey ने कहा है कि कंपनी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है और जल्द ही समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सेवा जल्द दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

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रायपुर नगर निगम में 2.23 करोड़ के टैंकर टेंडर पर विवाद: नेता प्रतिपक्ष ने लगाया घोटाले और मिलीभगत का आरोप

राजधानी रायपुर में गर्मी के दौरान पानी सप्लाई के लिए जारी किए गए टैंकर टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से कुछ चुनिंदा फर्मों को ही लगातार काम दिया जा रहा है। आकाश तिवारी ने कहा कि नगर निगम हर साल वार्डों में पानी सप्लाई के लिए टैंकर टेंडर जारी करता है, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उनका आरोप है कि पिछले वर्ष जिन छह फर्मों को टेंडर मिला था, इस बार भी उन्हीं कंपनियों को काम सौंपा गया है। नेता प्रतिपक्ष ने जिन फर्मों का नाम लिया उनमें मेसर्स केशव प्रसाद पांडे, प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन, परिमल कश्यप, अरविंद सिंह ठाकुर, प्रवीण दीक्षित और रफीक अहमद शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल यही फर्में कैसे चयनित हो जाती हैं। तिवारी ने आरोप लगाया कि निविदा की शर्तें भी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के हिसाब से तय की जाती हैं। उन्होंने कहा कि सभी निविदा दाताओं के रेट और तारीखों का एक जैसा होना संदेह पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल लगभग 1 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन बाद में टैंकर संचालन के नाम पर करीब 2.06 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। उनका कहना है कि टेंडर राशि कम रखी जाती है और बाद में भुगतान बढ़ा दिया जाता है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े होते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने टैंकरों में GPS सिस्टम नहीं लगाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिना GPS मॉनिटरिंग के यह पता लगाना मुश्किल है कि टैंकरों ने वास्तव में कहां और कितनी पानी सप्लाई की। आकाश तिवारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

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रायपुर में मानसून से पहले जलभराव: नाले का गंदा पानी घरों में घुसा, फाफाडीह अंडरब्रिज में फिसल रहीं गाड़ियां

रायपुर में मानसून शुरू होने से पहले ही जलभराव की समस्या ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फाफाडीह इलाके के रमन मंदिर छहमुंहा नाले में कचरा जमा होने के कारण आसपास की बस्तियों में पानी भरने लगा है। स्थिति ऐसी हो गई कि गर्मी के मौसम में ही नाले का गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नालों की सफाई नहीं की गई है। थोड़ी बारिश और पानी के बहाव से ही चूनाभट्टी बस्ती, फाफाडीह अंडरब्रिज और पाठक नर्सिंग होम गली में जलभराव की स्थिति बन गई। कई घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। फाफाडीह अंडरब्रिज में तेज बहाव के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने की घटनाएं भी सामने आईं। लोगों के मुताबिक कई वाहन चालक सड़क पर गिरकर घायल हो गए। वहीं पाठक नर्सिंग होम गली में जलभराव के चलते अस्पताल परिसर और आसपास के मकानों में भी पानी भर गया। मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इलाके में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में Shrikumar Shankar Menon और Kuldeep Juneja भी शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद, महापौर और विधायक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। धरने के दौरान निगम अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। शिकायतों के बाद जोन कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, जिसके बाद पोकलेन मशीन की मदद से नाले की सफाई शुरू कराई गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर गर्मी में ही यह स्थिति है तो मानसून के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर स्थायी जल निकासी व्यवस्था नहीं की गई, तो पहले जोन कार्यालय और बाद में नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।

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रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठप, वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने किया काम बंद

रायपुर में रविवार को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। कचरा उठाने वाली गाड़ियों के कर्मचारियों ने वेतन भुगतान नहीं होने के विरोध में काम बंद कर दिया, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठ सका। कचरा कलेक्शन का जिम्मा संभाल रही रामकी ग्रुप के कर्मचारियों ने सुबह से ही गाड़ियां खड़ी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दलदल सिवनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कचरा गाड़ियां खड़ी नजर आईं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हर महीने 7 तारीख तक वेतन मिल जाता था, लेकिन इस बार अब तक भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन में देरी की समस्या लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार भुगतान समय पर नहीं मिला, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इसी वजह से मजबूर होकर काम बंद करना पड़ा। यह पहला मौका नहीं है जब सफाई व्यवस्था को लेकर रामकी ग्रुप और नगर निगम के बीच विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उस समय नगर निगम ने कंपनी पर करीब 18 लाख रुपए की कटौती और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। पूर्व समीक्षा बैठक में महापौर मीनल चौबे ने कंपनी अधिकारियों को बुलाकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शहर की सफाई व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में इस तरह की स्थिति बनने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम पहले ही यह साफ कर चुका है कि कंपनी को भुगतान कार्य की गुणवत्ता और संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाएगा। अधिकारियों को सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में अनुबंध की समीक्षा के निर्देश भी दिए गए थे।

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IAS संबित मिश्रा होंगे रायपुर नगर निगम के नए आयुक्त, सोमवार से संभालेंगे जिम्मेदारी

राजधानी रायपुर नगर निगम को नया आयुक्त मिल गया है। 2018 बैच के आईएएस अधिकारी Sambit Mishra अब नगर निगम आयुक्त की जिम्मेदारी संभालेंगे। वे सोमवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे। प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि सक्रिय और तकनीक आधारित कार्यशैली अपनाने वाले अधिकारी की रही है। ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी संबित मिश्रा ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 51वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने Indian Institute of Technology Kanpur से इंजीनियरिंग और Jawaharlal Nehru University से पब्लिक मैनेजमेंट में मास्टर्स किया है। अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने नगरीय प्रशासन, पंचायत और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे Raigarh नगर निगम आयुक्त, Jashpur जिला पंचायत CEO और Korba जिला पंचायत CEO जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। Bijapur कलेक्टर रहते हुए उनकी कार्यशैली काफी चर्चा में रही। नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद करना और मौके पर समस्याओं का समाधान निकालना उनकी पहचान बना। दूरस्थ गांवों तक पैदल पहुंचकर निरीक्षण करने की उनकी तस्वीरें भी काफी वायरल हुई थीं। अब रायपुर नगर निगम में उनके सामने सफाई व्यवस्था, जलभराव, ट्रैफिक प्रबंधन, अवैध निर्माण, अतिक्रमण और टैक्स वसूली जैसी चुनौतियां रहेंगी। साथ ही स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की निगरानी और जमीनी स्तर पर काम की गति बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है।

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