Protest News

स्मार्ट मीटर और बिजली कटौती के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में कांग्रेस, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और लगातार बिजली आपूर्ति में बाधा को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के संकेत दिए हैं। पार्टी का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij ने आरोप लगाया कि कई उपभोक्ताओं को इस महीने सामान्य से दो से तीन गुना तक ज्यादा बिजली बिल मिला है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दिखा रहे हैं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी स्मार्ट मीटर को हटाने पर विचार किया जाए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह गांव-गांव और शहरों में जाकर लोगों को जागरूक करेगी और सरकार के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करेगी। इसके साथ ही प्रदेश में हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का आरोप है कि गर्मी के मौसम में शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घंटों बिजली गुल रहती है, जिससे आमजन परेशान हैं। दीपक बैज ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ को बिजली सरप्लस राज्य माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बिगड़ चुकी है। रात के समय बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। कांग्रेस का कहना है कि जनता पहले से ही बढ़े हुए बिजली बिलों और महंगी दरों से परेशान है, और ऊपर से लगातार बिजली कटौती ने हालात और खराब कर दिए हैं।

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छत्तीसगढ़ में 18 अप्रैल को निजी स्कूल बंद: RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध तेज

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन अब और तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 17 और 18 अप्रैल को लेकर अहम फैसले लिए हैं, जिससे स्कूल संचालन प्रभावित होगा। एसोसिएशन के अनुसार, 1 मार्च से शुरू हुए आंदोलन के तहत पहले ही यह तय किया गया था कि शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत लॉटरी से चयनित वंचित वर्ग के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हाल ही में 14 अप्रैल को हुई कार्यकारिणी बैठक में दो नए निर्णय लिए गए। इसके तहत 17 अप्रैल को स्कूल संचालक और शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे, जबकि 18 अप्रैल को पूरे प्रदेश के निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। एसोसिएशन ने इन फैसलों की जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री को दे दी है। साथ ही मांग की है कि सरकार शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च को सार्वजनिक करे, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके। पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जिससे निजी स्कूलों को लगातार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।

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बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर रायपुर में आक्रोश, पंडरी मंडी गेट पर यूनुस का पुतला दहन

रायपुर।बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित निर्मम हत्या को लेकर देशभर में रोष देखा जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 📍पंडरी मंडी गेट पर आज रायपुर युवा मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद पर बैठे मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन किया। पुलिस हिरासत में था दीपू, फिर भी नहीं बचाई गई जान इस मामले में बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, दीपू चंद्र दास की हत्या से पहले वह पुलिस की हिरासत में था, लेकिन इसके बावजूद उसे कट्टरपंथी भीड़ से नहीं बचाया गया। तस्लीमा नसरीन ने दावा किया कि दीपू पर दो बार हमला हुआ—पहली बार भीड़ द्वारा और दूसरी बार उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें घटना से पहले के हालात दिखाई देने का दावा किया गया है। झूठे ईशनिंदा आरोप का दावा तस्लीमा नसरीन ने कहा कि दीपू के साथ काम करने वाले एक मुस्लिम सहकर्मी ने निजी रंजिश के चलते उस पर पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था। दीपू ने इस पूरे मामले की शिकायत पहले ही पुलिस से की थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ बताया जा रहा है कि दीपू चंद्र दास अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी आमदनी से उसके दिव्यांग पिता, मां, पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण होता था। तस्लीमा नसरीन ने सवाल उठाते हुए कहा कि अब इस परिवार का भविष्य क्या होगा और उन्हें न्याय कौन दिलाएगा। फैक्ट्री का वीडियो भी आया सामने घटना से पहले का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें कपड़ा फैक्ट्री के अंदर दीपू को भीड़ द्वारा घेरते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर अव्रो नील हिंदू द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि दीपू अपने बकाया पैसे मांग रहा था, इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और बाद में हिंसा भड़क गई। रायपुर में कड़ा विरोध, न्याय की मांग रायपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस की मौजूदगी में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बना हुआ है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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रायपुर में आधी रात धरना: अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर शिक्षाकर्मियों के परिजन बैठे कलेक्ट्रेट के बाहर

रायपुर। राजधानी रायपुर में शनिवार देर रात अनुकंपा नियुक्ति संघ की महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरने पर बैठ गईं। यह प्रदर्शन रात करीब 11 बजे से शुरू हुआ और देर रात तक चलता रहा। धरने में शामिल महिलाएं उन दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिवार से हैं, जिनकी मृत्यु के बाद भी उनके परिजनों को अब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई है। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद सभी पात्र परिजनों को जल्द अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। लेकिन सरकार बने महीनों बीत जाने के बावजूद अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में लगभग 1200 दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिजन इस नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से हुई थी मुलाकात अक्टूबर में अनुकंपा नियुक्ति संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिला था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने जल्द प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। धरने पर बैठी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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