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भूपेश बघेल का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- नेताओं को ताश के पत्तों की तरह बदलते हैं पीएम मोदी

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री भाजपा नेताओं को ताश के पत्तों की तरह बदलते रहते हैं और अन्य दलों को राजनीतिक नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि देश के सामने महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों, किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आ रही अनियमितताओं पर जवाब देना चाहिए। बघेल ने आरोप लगाया कि NEET और CBSE जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इस बीच, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों के लिए भूपेश बघेल और अजय शर्मा को झारखंड का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की मंजूरी के बाद यह निर्णय लिया गया। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों में विभिन्न राज्यों की 24 सीटों के लिए मतदान होगा। कांग्रेस ने कई राज्यों से अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और झारखंड सहित कई राज्यों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं।

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भिलाई में भूपेश बघेल का BJP पर हमला, बोले- पुराने नेताओं को दूध की मक्खी की तरह बाहर कर दिया

Bhupesh Baghel ने भिलाई में भाजपा सरकार और संगठन को लेकर तीखा बयान दिया है। एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने पुराने और वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से किनारे कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर Ramvichar Netam और Brijmohan Agrawal का नाम लेते हुए कहा कि दोनों नेताओं को “दूध की मक्खी की तरह बाहर कर दिया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब अपने पुराने नेताओं को महत्व नहीं दे रही है। गौरतलब है कि हाल ही में भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के दौरान रामविचार नेताम और बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढ़ भाजपा के कोर ग्रुप से बाहर कर दिया गया था। Bhilai में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकार वास्तव में चला कौन रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह समझ नहीं आ रहा कि फैसले मंत्रिमंडल ले रहा है या अधिकारी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब यह ही साफ नहीं है कि “परीक्षार्थी कौन है”, तब सरकार को नंबर कैसे दिए जाएं। बघेल ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह भ्रम की स्थिति में नजर आ रही है। कानून व्यवस्था को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में भाजपा नेताओं की संलिप्तता सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने अवैध शराब, सट्टा और अफीम खेती जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हुई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। बघेल ने कहा कि देशभर में ईंधन संकट जैसी स्थिति दिखाई दे रही है और कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर आम जनता पर पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने Narendra Modi की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की उपलब्धियों के बारे में देश को जानकारी मिलनी चाहिए।

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छत्तीसगढ़ BJP कोर कमेटी में बड़ा बदलाव: ओपी चौधरी, विजय शर्मा और अमर अग्रवाल शामिल, कई वरिष्ठ नेता बैठक से दूर

छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। पार्टी की कोर कमेटी का पुनर्गठन करते हुए कई नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि कुछ पुराने सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नई सूची में मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और पूर्व मंत्री व विधायक अमर अग्रवाल को कोर कमेटी में जगह दी गई है। इसके साथ ही संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल माना जा रहा है। हालांकि कोर कमेटी की हालिया बैठक में पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कोर ग्रुप के पुनर्गठन की पुष्टि की है। वहीं पार्टी के अंदर इसे संगठन को नई दिशा देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन को बूथ और ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने, आगामी रणनीति और विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई थी। बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। अब प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पर भी सभी की नजरें टिकी हैं, जहां आगामी रणनीति और संगठनात्मक दिशा को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा में यह बदलाव सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े पुनर्गठन की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं। कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की भी चर्चाएं हैं। इसके साथ ही मंत्रिमंडल और संगठन में भविष्य में और बदलाव की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं, जिससे छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीतिक रणनीति नए मोड़ पर जाती दिख रही है।

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पश्चिम बंगाल जीत में छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की बड़ी भूमिका, 56 सीटों पर माइक्रो प्लानिंग से बदला समीकरण

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के परिणामों को लेकर हो रही है। भाजपा की जीत के साथ अब चुनावी रणनीति पर भी फोकस बढ़ गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के नेताओं को चुनाव के दौरान बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उन्हें 56 विधानसभा सीटों पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर माइक्रो लेवल प्लानिंग तक का काम दिया गया था। कई सीटों पर उन्हें पूरी चुनावी कमान भी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने और वोटिंग पैटर्न को साधने में काम किया। छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय को इन 56 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका कार्य सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत बनाना था। चुनाव के दौरान उनकी रणनीति को अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, क्लस्टर स्तर पर भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। दुर्गापुर जिले के बर्धमान और दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्रों की कमान पूर्व मंत्री राजेश मूणत और वरिष्ठ नेता शिवरतन शर्मा को सौंपी गई थी। उनके साथ समन्वय की जिम्मेदारी भूपेंद्र सवन्नी को दी गई थी। अन्य नेताओं में नीलू शर्मा, अनुराग सिंहदेव, हरपाल सिंह भाम्भरा और विश्व विजय सिंह तोमर को भी अलग-अलग सीटों पर तैनात किया गया था। इन सभी को चुनावी प्लानिंग, कैंपेनिंग और बूथ मैनेजमेंट के लिए माइक्रो स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए थे। कोलकाता क्लस्टर में पार्टी ने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए विशेष टीम बनाई थी। इस टीम में भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को शामिल किया गया और उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया। इस टीम का नेतृत्व प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव और सौरभ सिंह कर रहे थे। रणनीति के तहत व्यापारी, डॉक्टर, सीए, प्रोफेसर, कलाकार, मजदूर, रिक्शा चालक और मछली विक्रेताओं सहित विभिन्न वर्गों तक अलग-अलग तरीके से संपर्क किया गया। इसके साथ ही उन स्थानीय नेताओं को भी सक्रिय करने की कोशिश की गई, जो पहले चुनाव हार चुके थे, लेकिन जिनका जनाधार अभी भी मौजूद था। चुनावी प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और सभाओं के समन्वय की जिम्मेदारी भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई थी। इसमें डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और टंकराम वर्मा शामिल थे, जिन्होंने रैली प्रबंधन और स्थानीय समन्वय का काम संभाला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई यह जिम्मेदारी संगठन में उनकी बढ़ती पकड़ और भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से उन्हें बूथ से लेकर क्लस्टर और माइक्रो लेवल तक जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें चुनावी प्रबंधन के लिए सक्षम माना गया।

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महिला आरक्षण को लेकर भाजपा-कांग्रेस में सियासी जंग तेज, भाजपा चलाएगी अभियान और निंदा प्रस्ताव, कांग्रेस ने लगाया भ्रम फैलाने का आरोप

महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश और प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी इस विषय को लेकर देशभर में अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक भ्रम फैला रही है और असल में परिसीमन से जुड़े संशोधन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है। रायपुर में कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व महापौर और महिला कांग्रेस नेता हेमा देशमुख सहित अन्य नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित 106वां संविधान संशोधन, जिसे महिला आरक्षण बिल कहा जाता है, पहले ही संसद से पास होकर कानून बन चुका है और इसे लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाया गया 131वां संविधान संशोधन बिल महिला आरक्षण से सीधे जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में बदलाव का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने इसे “महिला आरक्षण का मुखौटा” बताया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि कानून बन चुका है तो बिना परिसीमन का इंतजार किए वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर देरी कर रही है। कांग्रेस ने अपने पुराने प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि राजीव गांधी के समय पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण की शुरुआत हुई थी, जिसे बाद में 1993 में कानून का रूप मिला। साथ ही मनमोहन सिंह सरकार में भी संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का प्रयास किया गया था। उधर भाजपा इस मुद्दे को लेकर सक्रिय है और 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इसके साथ ही राज्य के नगर निगमों और निकायों में भी सामान्य सभाएं आयोजित कर महिला आरक्षण पर चर्चा और विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की योजना है।

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जनगणना और काले हिरण मुद्दे पर सियासी घमासान, भूपेश बघेल ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, बोले- “नियत पर शक है”

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में काले हिरण और जनगणना को लेकर दिए गए बयानों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि काले हिरण के शिकार के आरोपियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी का मेलजोल रहता है, लेकिन वहीं संरक्षण की बात भी की जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ऐसे लोगों के साथ समय बिताते हैं और फिर वन्यजीव संरक्षण पर चर्चा करते हैं। भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही काले हिरण और अन्य वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है, और यहां उनकी संख्या मौजूद है। उन्होंने प्रधानमंत्री की यात्राओं और फोटो सेशन पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले भी राज्य में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां चलती रही हैं। जनगणना 2027 को लेकर प्रधानमंत्री की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि यह प्रक्रिया पहले से ही लंबित है और इसके समय पर पूरा न होने पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि SIR जैसी प्रक्रियाएं तो हो सकती हैं, लेकिन सरकार की मंशा पर संदेह बना रहता है। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में काले हिरण के संरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा था कि मध्य भारत में वन्यजीवों की स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र में काले हिरणों की संख्या फिर से बढ़ रही है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि बारनवापारा और बिलासपुर क्षेत्र में काले हिरणों के पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। 2017 में स्थानीय रूप से विलुप्त माने जाने के बाद इन्हें दिल्ली और बिलासपुर से लाकर पुनर्स्थापित किया गया। लगातार निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण इनकी संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने देशवासियों से जनगणना 2027 में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें नागरिक स्वयं भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

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