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खमतराई ब्रिज के पास पानी चोरी पर निगम की सख्त कार्रवाई, अवैध कनेक्शन काटे

रायपुर में खमतराई ब्रिज के पास पानी की चोरी के मामले में नगर निगम ने कड़ी कार्रवाई की है। महापौर मीनल चौबे, जल कार्य विभाग अध्यक्ष संतोष सीमा साहू और आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जल कार्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध नल कनेक्शनों को हटाया। यह कार्रवाई रावणभाठा फिल्टर प्लांट की टीम और नगर निगम जोन क्रमांक 2 के अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से की गई। जांच के दौरान पाया गया कि राइजिंग मेन पाइप लाइन से गैरकानूनी तरीके से पानी लिया जा रहा था, जिसे तत्काल प्रभाव से बंद किया गया। कार्रवाई के दौरान जोन 2 के जोन कमिश्नर संतोष पाण्डेय, कार्यपालन अभियंता नर सिंह फरेन्द्र, पी.डी. धृतलहरे, सहायक अभियंता योगेन्द्र कुमार देवांगन सहित जल विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। निगम ने साफ किया है कि पानी चोरी के मामलों में आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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रायपुर में अवैध कॉलोनियों पर निगम की सख्ती, हीरापुर–जरवाय व सोनडोंगरी में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध कॉलोनियों के फैलाव और बिना अनुमति हो रहे निर्माण पर लगाम लगाने के लिए नगर पालिक निगम ने कड़ा कदम उठाया है। निगम ने हीरापुर–जरवाय और सोनडोंगरी क्षेत्र की कई जमीनों को अवैध कॉलोनी घोषित करते हुए वहां किसी भी तरह की गतिविधि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, इन जमीनों को अधिग्रहण की प्रक्रिया में लिया गया है। अधिग्रहण पूरा होने तक संबंधित क्षेत्रों में निर्माण कार्य, जमीन की खरीद-बिक्री और नया कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इन क्षेत्रों में पाई गई अवैध प्लॉटिंग नगर निगम की ओर से जारी सूचना के अनुसार, हीरापुर–जरवाय क्षेत्र में कई खसरा नंबरों की जमीनों पर बिना वैध अनुमति के प्लॉटिंग की जा रही थी। इसी तरह सोनडोंगरी इलाके में भी कई भूखंडों को अवैध कॉलोनी की श्रेणी में चिन्हित किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कार्रवाई नगर निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान यदि कोई व्यक्ति इन जमीनों पर निर्माण करता है, कब्जा करता है या खरीद-फरोख्त करता है, तो उससे होने वाले सभी आर्थिक और कानूनी नुकसान की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होगी। ऐसे मामलों में नगर निगम किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होगा। क्यों जरूरी हुआ यह कदम नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों को रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। कई मामलों में लोग बिना जांच-पड़ताल के जमीन खरीद लेते हैं और बाद में कानूनी परेशानियों में फंस जाते हैं। नागरिकों से निगम की अपील नगर निगम ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे हीरापुर–जरवाय और सोनडोंगरी क्षेत्रों में जमीन या मकान खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पूरी जांच जरूर करें। यह सुनिश्चित करें कि जमीन नगर निगम से स्वीकृत है या नहीं। निगम ने यह भी संकेत दिया है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और भविष्य में नियम तोड़ने वालों पर और अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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शासकीय जमीन पर बने अवैध मकान-दुकानों पर निगम का बुलडोजर, दो जोनों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर ने अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी कार्रवाई की है। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर शासकीय भूमि पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और व्यावसायिक दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जोन-9 और जोन-5 क्षेत्र में की गई। जोन-9 में 3000 वर्गफीट सरकारी जमीन कराई गई मुक्त नगर निगम के नगर निवेश विभाग की टीम ने जोन-9 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 में अभियान चलाकर करीब 3000 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जांच में सामने आया था कि यहां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकान और मकान का निर्माण किया गया था। जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा सीनियर के निर्देश पर कार्यपालन अभियंता शरद ध्रुव, सहायक अभियंता सैय्यद जोहेब और उप अभियंता अतुल बंसल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से अवैध निर्माण को तोड़ा गया। जोन-5 में नियमों के विपरीत निर्माण पर चला हथौड़ा इसी तरह जोन-5 क्षेत्र में भी नगर निगम ने अनुमति के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर कार्रवाई की। कुशालपुर रिंग रोड नंबर-1 इलाके में निर्माणाधीन भवन को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तोड़कर हटाया गया। यह कार्रवाई जोन कमिश्नर खीरसागर नायक के निर्देश पर की गई, जिसमें कार्यपालन अभियंता लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता नागेश रामटेके और उप अभियंता टिकेन्द्र चंद्राकर मौजूद रहे। अवैध निर्माण पर आगे भी जारी रहेगा अभियान नगर निगम प्रशासन ने साफ कहा है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या नियमों के खिलाफ निर्माण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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बिरगांव नगर निगम पर पक्षपात का आरोप: छोटे ठेले वालों पर सख्ती, बड़े व्यापारियों को खुला संरक्षण

बिरगांव (रायपुर)। बिरगांव नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निगम जहां छोटे और गरीब ठेले–रेहड़ी लगाने वालों पर सख्ती दिखाते हुए उन्हें नोटिस थमा रहा है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं बड़े व्यापारियों को खुलेआम सड़क और फुटपाथ घेरने की छूट दी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई छोटे ठेले वाले सिर्फ अपने परिवार का पेट पालने के लिए सड़क किनारे या फुटपाथ पर अस्थायी ठेला लगाते हैं, लेकिन नगर निगम की टीम उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती है। बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उनका ठेला हटा दिया जाता है, जिससे उनके सामने रोज़ी–रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, बिरगांव के सबसे बड़े सुपरमार्ट Ashoka Mart पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अशोका मार्ट द्वारा पुराने कपड़ों का स्टॉक फुटपाथ पर लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं, दुकान के सामने आधी सड़क पर बाइक पार्किंग कर दी जाती है, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस अव्यवस्था के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ पूरी तरह बंद हो चुका है और सड़क पर भीड़ व जाम आम बात हो गई है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या नियम सिर्फ गरीब ठेले वालों के लिए हैं? अगर सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण गलत है, तो फिर बड़े व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? इस कथित दोहरे रवैये को लेकर अब बिरगांव नगर निगम की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नियम सभी के लिए समान रूप से लागू किए जाएं, चाहे वह छोटा ठेले वाला हो या बड़ा व्यापारी, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू रहे और आम जनता को राहत मिल सके।

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बिलासपुर में बिना अनुमति 3 मंजिला भवन में चल रहा था OYO होटल, निगम ने किया सील

बिलासपुर के बहतराई रोड, गीतांजलि सिटी फेस-1 में एक तीन मंजिला भवन बिना नगर निगम की अनुमति के बनाकर वहां OYO होटल चलाया जा रहा था। शिकायत और जांच के बाद नगर निगम ने इस अवैध भवन को सील कर दिया है। पार्षद रेखा पांडेय की शिकायत पर निगम ने शुक्रवार को कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि होटल संचालन से क्षेत्र का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा था। पहले भवन पर OYO का बोर्ड लगा था, जिसे विरोध के बाद हटा दिया गया, लेकिन होटल का संचालन लगातार जारी था। नगर निगम की जांच में पता चला कि यह भवन गायत्री केडिया की है, लेकिन इसका नक्शा निगम से पास नहीं कराया गया। बावजूद इसके, भवन में 17 कमरों वाला होटल तैयार कर लिया गया था और लंबे समय से होटल संचालित हो रहा था। निगम कमिश्नर के निर्देश पर भवन शाखा की टीम मौके पर पहुंची और होटल को सील कर दिया। मौके पर स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया गया। नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति निर्माण और अवैध व्यवसाय पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी भवन मालिक को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।

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