International News

भारत-रूस रिश्तों पर पुतिन का बड़ा बयान, बोले- कोई देश हम पर शर्तें नहीं थोप सकता

सेंट पीटर्सबर्ग। रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत और रूस के संबंधों को मजबूत, भरोसेमंद और दीर्घकालिक बताते हुए कहा है कि किसी भी बाहरी दबाव का इन रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी देश रूस पर शर्तें नहीं थोप सकता और न ही ऐसा करने की कोशिश सफल होगी। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत की तकनीकी क्षमता, मानव संसाधन और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस और भारत के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश अनुसंधान, तकनीकी विकास और रक्षा सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित हैं। पुतिन ने यह भी कहा कि रूस अपने सहयोगी देशों के साथ किए गए वादों का सम्मान करता है और भारत के साथ साझेदारी भविष्य में भी मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम है। रूसी राष्ट्रपति ने रक्षा सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में रूसी मूल के रक्षा उपकरण उपयोग में हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत साझेदारी बनी हुई है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत को अपने हितों और आवश्यकताओं के अनुसार उत्पादों तथा तकनीकों के चयन का पूरा अधिकार है और किसी भी देश को उसके निर्णयों पर दबाव बनाने का अधिकार नहीं है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार” मिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान “रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार (डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस)” प्रदान किया गया है। यह सम्मान रविवार को स्वीडन के गोथेनबर्ग में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया। यह सम्मान स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा। यह स्वीडन के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है, जिसकी शुरुआत 18वीं सदी में हुई थी। यह सम्मान आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने देश और स्वीडन के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत और स्वीडन के बीच संबंधों को मजबूत करने, और व्यापार, तकनीक, निवेश, पर्यावरण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। इस सम्मान को भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान और कूटनीतिक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

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बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर रायपुर में आक्रोश, पंडरी मंडी गेट पर यूनुस का पुतला दहन

रायपुर।बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित निर्मम हत्या को लेकर देशभर में रोष देखा जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 📍पंडरी मंडी गेट पर आज रायपुर युवा मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद पर बैठे मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन किया। पुलिस हिरासत में था दीपू, फिर भी नहीं बचाई गई जान इस मामले में बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, दीपू चंद्र दास की हत्या से पहले वह पुलिस की हिरासत में था, लेकिन इसके बावजूद उसे कट्टरपंथी भीड़ से नहीं बचाया गया। तस्लीमा नसरीन ने दावा किया कि दीपू पर दो बार हमला हुआ—पहली बार भीड़ द्वारा और दूसरी बार उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें घटना से पहले के हालात दिखाई देने का दावा किया गया है। झूठे ईशनिंदा आरोप का दावा तस्लीमा नसरीन ने कहा कि दीपू के साथ काम करने वाले एक मुस्लिम सहकर्मी ने निजी रंजिश के चलते उस पर पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था। दीपू ने इस पूरे मामले की शिकायत पहले ही पुलिस से की थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ बताया जा रहा है कि दीपू चंद्र दास अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी आमदनी से उसके दिव्यांग पिता, मां, पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण होता था। तस्लीमा नसरीन ने सवाल उठाते हुए कहा कि अब इस परिवार का भविष्य क्या होगा और उन्हें न्याय कौन दिलाएगा। फैक्ट्री का वीडियो भी आया सामने घटना से पहले का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें कपड़ा फैक्ट्री के अंदर दीपू को भीड़ द्वारा घेरते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर अव्रो नील हिंदू द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि दीपू अपने बकाया पैसे मांग रहा था, इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और बाद में हिंसा भड़क गई। रायपुर में कड़ा विरोध, न्याय की मांग रायपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस की मौजूदगी में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बना हुआ है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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Chhattisgarh, Raipur
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