6 माह की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा— पीड़िता को अपने भविष्य का निर्णय लेने का अधिकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग किशोरी को गर्भपात कराने की अनुमति प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीतकालीन अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई कर यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल और पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि 23 दिसंबर को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में पीड़िता का सुरक्षित गर्भपात कराया जाए। साथ ही अदालत ने भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। शादी का झांसा देकर किया गया दुष्कर्म मामला रायपुर जिले का है, जहां 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को आरोपी युवक ने प्रेम जाल में फंसाकर शादी का वादा किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों को तब शक हुआ जब किशोरी के पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगा। पूछताछ करने पर पीड़िता ने आपबीती बताई। इसके बाद परिजन उसे चिकित्सक के पास ले गए, जहां जांच में सामने आया कि किशोरी करीब 25 सप्ताह (6 महीने) की गर्भवती है। मेडिकल रिपोर्ट के बाद कोर्ट पहुंचा मामला पीड़िता की ओर से परिजनों के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने 19 दिसंबर को बीआर अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भपात की प्रक्रिया से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय खतरा नहीं है। अवकाश में भी हुई सुनवाई, कोर्ट ने दी राहत रिपोर्ट आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष बेंच गठित कर सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान कर दी। हाईकोर्ट की टिप्पणी— पीड़िता को मिले निर्णय की स्वतंत्रता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह स्वयं तय करे कि गर्भावस्था को जारी रखना है या समाप्त करना है। अदालत ने इसे पीड़िता के जीवन और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बताया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा गर्भपात कोर्ट ने निर्देश दिया है कि गर्भपात की प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 के तहत की जाए। यह प्रक्रिया दो पंजीकृत चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में संपन्न होगी। इसके साथ ही, भविष्य की जांच और ट्रायल को ध्यान में रखते हुए भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़िता को निर्धारित तिथि पर अस्पताल में उपस्थित होकर सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है।

