छत्तीसगढ़ में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के प्रवचन और भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया पर नया रूप

छतरपुर जिले के बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में अपने प्रवचन के दौरान कहा कि उनका दरबार लगाना कुछ लोगों को अंधविश्वास लग सकता है, लेकिन चादर चढ़ाना और मोमबत्ती जलाना विश्वास माना जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आस्था के पैमाने अलग-अलग क्यों बनाए जाते हैं। भिलाई के जयंती स्टेडियम में धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा का सोमवार को आखिरी दिन था। इस दौरान उन्होंने सरकारी विमान से यात्रा करने को लेकर कहा कि “सनातन जगाने वाला व्यक्ति हवाई जहाज पर क्यों नहीं बैठ सकता?” उन्होंने अपने तंज में कहा कि यह सोच समझ से परे है। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि जब वे प्लेन से भिलाई पहुंचे, तो उनके साथ मंत्री खुशवंत साहेब भी थे। उन्होंने कहा कि बहुत लोग उनके आने पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन असली दोषी वे नहीं हैं, जो लाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “बाबा भी देश का आदमी है, विदेशी नहीं। देश को लूटने वाले घूम सकते हैं, लेकिन सनातन जगाने वाला, कैंसर अस्पताल बनाने वाला, बेटियों की शादी करवाने वाला और नशा छुड़वाने वाला व्यक्ति हवाई जहाज पर नहीं बैठ सकता, यह कैसी बुद्धि है।” कथा के दौरान उन्होंने कुछ घटनाओं का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि एक भक्त उनकी गाड़ी के सामने आ गया और उसकी शादी नहीं हो रही थी। साथ ही उन्होंने बताया कि किसी लड़की ने उनसे मिलने के लिए अपनी नस काट ली थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बहनजी से प्रार्थना करेंगे कि ऐसा न करें। धर्मांतरण के मुद्दे पर शास्त्री ने कहा कि कुछ लोग भोले-भाले हिंदुओं को लालच देकर और ढोंग करके उनका धर्म बदलवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को दूसरे धर्म के लोग अच्छे लगते हैं तो वे वहां जाएं, अपने देश में परेशान न करें। पुलिसकर्मियों द्वारा प्रणाम करने पर उन्होंने कहा कि वर्दी के अंदर भी इंसान होता है, उसकी भी आस्था होती है। कोई अपने माता-पिता या गुरु को प्रणाम करे तो इसमें गलत क्या है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 29 दिसंबर को बिलासपुर में मीडिया से बातचीत में कहा कि कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा दोनों चंदा लेना बंद कर दें और प्रवचन करते रहें। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चाहे उन्हें सम्मान दे, झूला झुलाए या कंधों पर बिठाए, लेकिन सरकार के पैसों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। भूपेश ने कहा कि शास्त्री को समझ नहीं है और उन्होंने कई विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ के साधु-संत उनसे शास्त्रार्थ करें और दोनों कथावाचक चंदा लेना बंद करें।

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