दुर्ग में 40 साल पुराना मुआवजा विवाद: जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन, मुआवजा या जमीन वापसी की मांग
Durg जिले के धमधा ब्लॉक के परसकोल और खैरझीटी गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीण अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर एकत्रित हुए थे और किसान बंधु संगठन के नेतृत्व में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का मुख्य कारण वर्ष 1983-84 में गोरपा नहर निर्माण के लिए की गई जमीन अधिग्रहण की लंबित मुआवजा राशि है। किसानों का कहना है कि करीब 17 किसानों की जमीन अधिग्रहित किए 40 से 45 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं और जनदर्शन सहित विभिन्न मंचों पर आवेदन दे चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। जनवरी 2026 में कलेक्टर से मुलाकात के दौरान भी मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। किसानों ने प्रशासन से साफ मांग की है कि या तो उन्हें उनकी जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाए या फिर उनकी जमीन वापस की जाए। इसके साथ ही वर्षों तक जमीन के उपयोग का किराया और क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मुआवजा न मिलने के कारण वे अपनी जमीन का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और खाता बंटवारे की प्रक्रिया भी अटकी हुई है, जिससे परिवारों में विवाद की स्थिति बन रही है। ग्रामीण कमल नारायण सुपंथक ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के बाद से न तो खेती हो पा रही है और न ही कोई लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चार दशक बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा ग्रामीणों ने खैरझीटी गांव के जर्जर प्राथमिक स्कूल भवन की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से बच्चे पंचायत भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने जल्द नया स्कूल भवन बनाने की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बाद में तहसीलदार ने ग्रामीणों से चर्चा कर कलेक्टर से मुलाकात का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। प्रशासन ने मामले के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है।

