Chhattisgarh Forest News

रायगढ़ में हाथी का हमला: सूंड से उठाकर बुजुर्ग को पटका, अस्पताल में भर्ती

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथी के हमले में एक बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना धरमजयगढ़ वन मंडल के बाकारूमा रेंज में बुधवार सुबह करीब 6 बजे हुई। घायल बुजुर्ग को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सारसमार के रहने वाले ललकूराम उरांव (75) सुबह किसी काम से जंगल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान वे रिजर्व फॉरेस्ट के कक्ष क्रमांक 149 के पास पहुंच गए। तभी अचानक उनका सामना एक हाथी से हो गया। सूंड से उठाकर जमीन पर पटका बताया जा रहा है कि हाथी ने बुजुर्ग को देखते ही उन पर हमला कर दिया। हाथी ने पहले उन्हें दौड़ाया और फिर सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया। इस हमले में बुजुर्ग को गंभीर चोटें आईं। हमले के दौरान ललकूराम की जोर-जोर से चीख-पुकार सुनकर हाथी कुछ देर बाद जंगल की ओर लौट गया, जिससे उनकी जान बच सकी। ग्रामीणों ने पहुंचकर की मदद घटना की जानकारी मिलने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने घायल बुजुर्ग को इलाज के लिए पत्थलगांव के अस्पताल में भर्ती कराया। वन विभाग की ओर से पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता राशि भी दी गई है। इलाके में 15 हाथियों के दो झुंड सक्रिय वन विभाग के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से बाकारूमा रेंज के जंगलों में हाथियों की गतिविधि बढ़ गई है। पहले यहां 7 हाथियों का झुंड घूम रहा था, लेकिन मंगलवार रात पत्थलगांव क्षेत्र की ओर से 8 और हाथी इस इलाके में पहुंच गए। इस तरह फिलहाल इलाके में करीब 15 हाथियों के दो अलग-अलग झुंड मौजूद हैं। आशंका जताई जा रही है कि झुंड से अलग हुआ कोई हाथी ही बुजुर्ग पर हमले के लिए जिम्मेदार है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह बाकारूमा रेंजर विष्णु मरावी ने बताया कि हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के गांवों में मुनादी कराई जा रही है। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सुबह और शाम के समय जंगल की ओर जाने से बचें और सावधानी बरतें।

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राज्य में पहली बार व्यवस्थित गणना: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब तक 6 बाघों की पुष्टि

बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इस बार बाघों की गणना नियमानुसार और व्यापक स्तर पर की जा रही है। वन विभाग के अनुसार अब तक यहां 6 बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। गणना का यह अभियान अप्रैल तक जारी रहेगा और अधिकारियों को उम्मीद है कि अंतिम रिपोर्ट में संख्या और बढ़ सकती है। करीब 2799 वर्ग किलोमीटर में फैला यह रिजर्व वर्ष 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। घने साल व मिश्रित वन, इंद्रावती नदी का विस्तृत क्षेत्र और समृद्ध जैव विविधता इसे देश के महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में शामिल करते हैं। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, जंगली कुत्ता (ढोल), गौर, भालू, सांभर, चीतल और वन भैंसा जैसी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। नक्सली प्रभाव के बाद बदले हालात पिछले वर्षों में क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के कारण कई कोर एरिया वनकर्मियों के लिए जोखिमभरे रहे। ट्रैप कैमरे लगाने और नियमित मॉनिटरिंग में कठिनाई आती थी, जिससे सटीक गणना संभव नहीं हो पाती थी। अब सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद पहली बार नेशनल पार्क क्षेत्र में निर्भय होकर बड़े पैमाने पर सर्वे किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक से हो रही पहचान वन विभाग ने कोर और बफर जोन में बड़ी संख्या में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। पगमार्क विश्लेषण, कैमरा ट्रैप तस्वीरों और डीएनए सैंपलिंग के आधार पर बाघों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक पहले यहां पांच बाघों की पुष्टि थी, जबकि इस बार अब तक छह बाघ चिन्हित किए जा चुके हैं। यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। देशव्यापी आकलन में इंद्रावती की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यह मध्य भारत के टाइगर लैंडस्केप का अहम हिस्सा है। संरक्षण पर बढ़ा फोकस वन विभाग ने गश्त बढ़ाने, अवैध शिकार पर सख्ती और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास तेज किए हैं। ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी मिल सके। वाइल्डलाइफ सीसीएफ स्टाइलो मंडावी ने कहा कि अप्रैल में अंतिम आंकड़े जारी किए जाएंगे, लेकिन शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं। यदि सुरक्षा और संरक्षण के प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में इंद्रावती टाइगर रिजर्व फिर से मजबूत बाघ आबादी वाला क्षेत्र बन सकता है।

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