Chhattisgarh Farmers

प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया-डीएपी देने के फैसले पर भड़का किसान संगठन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

खरीफ सीजन 2026-27 से पहले छत्तीसगढ़ में खाद वितरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार की नई व्यवस्था का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाएगी और उन्हें निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ेगा। यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों में खाद और नगद वितरण का अनुपात बदल दिया है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत उर्वरक और 60 प्रतिशत नगद राशि दी जाती थी, जबकि अब इसे 30 प्रतिशत उर्वरक और 70 प्रतिशत नगद कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस बदलाव से समितियों में खाद की उपलब्धता कम हो जाएगी। किसान संगठन का आरोप है कि खाद की कमी होने पर किसानों को निजी दुकानों से ज्यादा कीमत पर यूरिया और डीएपी खरीदनी पड़ेगी। साथ ही निजी विक्रेता किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। तेजराम विद्रोही ने सरकार के प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल समय पर खाद नहीं मिलने की वजह से धान उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक गिरावट आई थी और इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसान यूनियन ने सरकार की नीति को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सीमित खाद वितरण से उत्पादन घटेगा, जिससे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का दबाव भी कम हो जाएगा। संगठन ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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धान खरीदी से पहले सहकारी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा — 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में इस साल 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और धान खरीदी ऑपरेटर संघ ने सरकार के खिलाफ तीन नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उनकी चार सूत्रीय मांगों को पूरा करने का पिछले साल आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि अगर इस बार भी उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो वे धान खरीदी सीजन का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। 24 अक्टूबर से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन:कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन की रूपरेखा जारी करते हुए बताया — कर्मचारी बोले — भविष्य से जुड़ी हैं हमारी मांगें:संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ वेतन या भत्तों के लिए नहीं, बल्कि लगभग 15,000 सहकारी समिति कर्मचारियों और 39 उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की निष्क्रियता के कारण कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। अगर हड़ताल शुरू होती है, तो इसका सीधा असर धान उपार्जन प्रक्रिया पर पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। पिछले वर्ष भी मिला था आश्वासन:संघ नेताओं ने बताया कि बीते वर्ष भी धान खरीदी से पहले आंदोलन किया गया था। उस समय शासन ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी और ऑपरेटरों ने किया खरीदी का बहिष्कार करने का ऐलान:संघ के नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धान खरीदी में भाग नहीं लेंगे। इस स्थिति में धान खरीदी केंद्रों पर असर दिखना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह हड़ताल लंबी चली, तो इससे प्रदेश के लाखों किसानों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि धान खरीदी छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

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