इंदौर हनीट्रैप-2 में छत्तीसगढ़ के DIG का नाम आने से हड़कंप, 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो बरामद
मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए हनीट्रैप-2 केस ने एक बार फिर देशभर में सनसनी फैला दी है। इस मामले की जांच अब मध्य प्रदेश से निकलकर छत्तीसगढ़, गुजरात और दिल्ली तक पहुंच चुकी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों के पास से नेताओं, अफसरों और कारोबारियों से जुड़े 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच का दावा है कि इन वीडियो में कई प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे, बड़े कारोबारी और छत्तीसगढ़ पुलिस के DIG स्तर के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। मामले में गिरफ्तार श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित से लगातार पूछताछ की जा रही है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, रेशू चौधरी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से बड़ी संख्या में संवेदनशील वीडियो और डेटा मिले हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन वीडियो का इस्तेमाल कर रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल किया जाता था और उनसे करोड़ों रुपए की वसूली की जाती थी। कुछ वीडियो को बेचने की तैयारी किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था। भोपाल से श्वेता विजय जैन पूरे नेटवर्क को संचालित करती थी, जबकि रेशू चौधरी कथित तौर पर लोगों को संपर्क में लाकर जाल में फंसाने का काम करती थी। जांच के दायरे में मध्य प्रदेश के कुछ नेता, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, एक पूर्व अधिकारी, छत्तीसगढ़ पुलिस के DIG रैंक के अफसर, दिल्ली के वरिष्ठ नेता और गुजरात के एक उद्योगपति के नाम सामने आने की चर्चा है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि दिल्ली के एक बड़े नेता से करीब 4 करोड़ रुपए की उगाही की साजिश रची गई थी। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब इंदौर के कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि 28 अप्रैल को सुपर कॉरिडोर इलाके में अलका दीक्षित और उसके साथियों ने उनके साथ मारपीट की और कथित वीडियो वायरल करने की धमकी दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जयदीप, लाखन चौधरी, पत्रकार जितेंद्र पुरोहित और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। अब जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस पूरे नेटवर्क को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का समर्थन प्राप्त था। इधर, इंदौर हनीट्रैप कांड में छत्तीसगढ़ पुलिस के DIG स्तर के अधिकारी का नाम सामने आने की चर्चाओं के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। विभाग के भीतर इस अधिकारी की पहचान को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।




