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रायपुर में नदी के पास मिली 2 महीने की बच्चीः मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों को झाड़ियों में दिखी, डायल-108 ने मेकाहारा में भर्ती कराया

रायपुर के अमलेश्वर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जब मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों ने खारुन नदी के पास झाड़ियों में एक 2 महीने की जीवित बच्ची को पाया। ग्रीन अर्थ सिटी अमलेश्वर के सामने डीह रोड पर टहलते समय एम.एम. जैन को झाड़ियों से रोने की आवाज सुनाई दी। जांच करने पर उन्होंने एक थैले में कपड़ों में लिपटी बच्ची को देखा। उन्होंने तुरंत अपने दोस्तों और पुलिस के इमरजेंसी नंबर पर सूचना दी , मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह मॉर्निंग वॉक करते समय ग्रीन अर्थ सिटी अमलेश्वर के सामने डीह रोड़ पर एम एम जैन को झाड़ियों के बीच से कुछ आवाज आई। वहां उन्होंने देखा तो एक थैले के भीतर कपड़े में बच्चे बंधी हुईं थी। वह रो रही थी। उन्होंने फौरन अपने दोस्तों और पुलिस के इमरजेंसी नंबर पर सूचना दी। इस बीच बच्ची को झाड़ियों से बाहर निकाला गया। स्वास्थ्य खराब होने से मेकाहारा में एडमिट बच्ची के रेसक्यू की सूचना मिलते ही 108 के पायलट रविंद कुमार और ईएमटी विनोद कुमार तुंरत मौके पर पहुँचें और बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट व प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद वह बच्ची को लेकर मेकाहारा अस्पताल आएं। फ़िलहाल मेकाहारा के डॉक्टर बच्ची का आगे का उपचार कर रहे है। बताया जा रहा है की बच्ची का स्वास्थ्य खराब है। पुलिस फिलहाल बच्ची के संबंध में जांच पड़ताल कर रही है

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उत्तराखंड में अवैध मदरसों पर प्रशासन का शिकंजा: 15 दिनों में 52 मदरसे सील

ख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर देहरादून के विकासनगर में 12 और खटीमा में 9 मदरसों पर कार्रवाई; धर्म की आड़ में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की साजिश का आरोप उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पिछले 15 दिनों में प्रदेशभर में 52 अवैध मदरसों को सील किया गया है। इसमें देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में मंगलवार को 12 मदरसों पर कार्रवाई की गई, जबकि खटीमा में 9 मदरसों को सील किया गया अवैध मदरसों की पहचान और कार्रवाई देहरादून के विकासनगर और सहसपुर क्षेत्रों में प्रशासन की संयुक्त टीम ने अवैध रूप से संचालित मदरसों की पहचान की। इनमें से कई मदरसे बिना पंजीकरण और आवश्यक स्वीकृतियों के चल रहे थे। जांच में पाया गया कि ये मदरसे गैर-आवासीय निजी भवनों में संचालित हो रहे थे, जिनके पास मान्यता नहीं थी। प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते इन मदरसों को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान विरोध और प्रशासन की प्रतिक्रिया मदरसों को सील करने की कार्रवाई के दौरान मुस्लिम सेवा संगठन और कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बावजूद, प्रशासन ने कानून के मुताबिक कार्रवाई पूरी की। विकासनगर के एसडीएम विनोद कुमार के नेतृत्व में तहसील प्रशासन, पुलिस प्रशासन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की संयुक्त टीम ने यह अभियान चलाया। एसडीएम ने बताया कि सरकारी आदेशों के तहत अवैध रूप से संचालित मदरसों को बंद करने की कार्रवाई की जा रही है। भविष्य की कार्रवाई और बच्चों की शिक्षा प्रशासन ने चेतावनी दी है कि उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। एसडीएम ने बताया कि जिन मदरसों को सील किया गया है, वहां अध्ययनरत बच्चों का नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा, ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री का सख्त रुख मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अवैध मदरसों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेशभर में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उनके अनुसार, धर्म की आड़ में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है, जिसे सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। समुदाय की प्रतिक्रिया प्रशासन की इस कार्रवाई से समुदाय विशेष में नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि रमज़ान के दौरान मदरसों को सील करना कई लोगों को अनुचित लग रहा है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में और सरकारी आदेशों के अनुसार की जा रही है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य सरकार की ओर से बिना आवश्यक स्वीकृति के संचालित अवैध मदरसों को बंद करने के कदम का स्वागत किया है। आयोग ने शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इन अवैध मदरसों में वर्तमान में पढ़ाई कर रहे सभी बच्चों को तुरंत मान्यता प्राप्त और उपयुक्त स्कूलों में शिक्षा प्रदान की जाए। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से मदरसा संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। भविष्य में भी अवैध रूप से संचालित मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, जिससे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके और बच्चों को सुरक्षित एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिक्षा मिल सके।

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रायपुर: युवक ने तलाकशुदा होने का झूठ बोलकर युवती से किया दुष्कर्म, गिरफ्तार

माना थाना क्षेत्र में घटना, आरोपी ने फेसबुक पर बढ़ाई थी नजदीकियां रायपुर के माना थाना क्षेत्र में एक युवक ने खुद को तलाकशुदा बताकर एक युवती से संबंध स्थापित किए और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने फेसबुक के माध्यम से युवती से संपर्क बढ़ाया और झूठी भावनात्मक कहानी सुनाकर उसे अपने जाल में फंसाया। फेसबुक पर हुई पहचान, झूठे प्रेम जाल में फंसाया पुलिस के अनुसार, पीड़िता की पहचान पखांजूर निवासी सतीश दास से एक वर्ष पूर्व फेसबुक पर हुई थी। सतीश ने मोबाइल नंबर लेकर पीड़िता से बातचीत शुरू की और खुद को तलाकशुदा बताते हुए उससे प्रेम और विवाह का प्रस्ताव रखा। 22 सितंबर को सतीश पीड़िता के घर आया, जहां परिवार के अन्य सदस्य मौजूद नहीं थे, तब उसने जबरन शारीरिक संबंध बनाए। झूठी कहानी सुनाकर घर में रुका, फिर किया दुष्कर्म सतीश ने पीड़िता को बताया कि उसके ससुराल वाले उसे मारना चाहते हैं, इसलिए वह कुछ दिन उसके घर में रहना चाहता है। इसके बाद वह पीड़िता के दूसरे घर में लगभग एक सप्ताह तक रुका और शादी का वादा कर जबरन दुष्कर्म किया। कुछ दिनों बाद पीड़िता अपने ऑफिस के साथियों के साथ पिकनिक पर गई, जहां सतीश भी शामिल हुआ। पत्नी के फोन से खुला राज, आरोपी गिरफ्तार पिकनिक के दौरान सतीश की पत्नी का फोन आया। पहले तो उसने फोन नहीं उठाया, लेकिन बार-बार कॉल आने पर वह साइड में जाकर बात करने लगा। इस पर पीड़िता को शक हुआ और उसने सतीश के मोबाइल से नंबर देखकर उस पर कॉल किया, जिससे पता चला कि वह उसकी पत्नी का नंबर है। सतीश से पूछताछ करने पर उसने पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने माना थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने सतीश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मौदहापारा थाना क्षेत्र में भी दुष्कर्म की शिकायत रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में भी दुष्कर्म की एक और शिकायत दर्ज हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी आरिफ खान ने 32 वर्षीय एक युवती से शादी का वादा किया और उसे होटल व किराए के कमरे में ले जाकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। जब युवती ने शादी की बात की, तो आरिफ मुकर गया। फिलहाल, पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।

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बलूच लिबरेशन आर्मी ने जाफर एक्सप्रेस का अपहरण किया, 100 से अधिक यात्री बंधक

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का अपहरण कर लिया है, जिसमें 400 से अधिक यात्री सवार थे। आतंकवादी समूह ने दावा किया है कि उन्होंने छह सैन्य कर्मियों को मार डाला है और 100 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के बोलन जिले में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का अपहरण कर लिया है, जिसमें 400 से अधिक यात्री सवार थे। आतंकियों ने धमकी दी है कि यदि पाकिस्तानी सेना ने कोई कार्रवाई की तो वे सभी यात्रियों को मार देंगे। घटना का विवरण: जाफर एक्सप्रेस, जिसमें नौ डिब्बों में 400 से अधिक यात्री सवार थे, बलूचिस्तान के क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही थी। बोलन जिले के मश्काफ क्षेत्र में आतंकियों ने रेलवे ट्रैक को विस्फोट से उड़ा दिया, जिससे ट्रेन रुक गई। इसके बाद, BLA के लड़ाकों ने ट्रेन पर कब्जा कर लिया और यात्रियों को बंधक बना लिया। आतंकियों की चेतावनी: BLA के प्रवक्ता जियंद बलूच ने एक बयान में कहा कि यदि पाकिस्तानी सेना ने कोई सैन्य कार्रवाई की तो सभी बंधकों को मार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक छह पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं और सैकड़ों यात्री BLA की हिरासत में हैं। सरकारी प्रतिक्रिया: घटना के बाद, सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए हैं। बलूचिस्तान सरकार ने आपातकालीन उपाय लागू किए हैं और सभी संस्थानों को स्थिति से निपटने के लिए सक्रिय कर दिया है। पृष्ठभूमि: बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी सरकार, सेना और क्षेत्र में चीनी हितों पर हमले करते रहे हैं। ये समूह बलूचिस्तान के खनिज संपन्न संसाधनों में हिस्सेदारी की मांग करते हैं। BLA इनमें सबसे बड़ा समूह है, जो बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत है। यह घटना पाकिस्तान में हाल के वर्षों में ट्रेन अपहरण की सबसे बड़ी घटना मानी जा रही है। पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं

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महाराष्ट्र में ‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ की शुरुआत: झटका और हलाल मांस पर नई बहस

यह पहल राज्य में हलाल और झटका मांस के बीच चल रही बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां ‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ को हलाल सर्टिफिकेशन के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने झटका मटन विक्रेताओं के लिए ‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ की घोषणा की, जिससे राज्य में मांस विक्रय पर नई चर्चा शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने राज्य में झटका मटन बेचने वाले विक्रेताओं के लिए ‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ नामक नई पहल की शुरुआत की है। इस सर्टिफिकेशन के तहत, केवल हिंदू विक्रेता ही झटका मटन बेच सकेंगे, जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध और मिलावट रहित मांस उपलब्ध हो इस पहल के लिए ‘मल्हार सर्टिफिकेशन डॉट कॉम’ नामक एक पोर्टल लॉन्च किया गया है, जहां विक्रेता पंजीकरण कर प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। राणे ने हिंदू समुदाय से अपील की है कि वे केवल मल्हार सर्टिफिकेट प्राप्त दुकानों से ही मटन खरीदें, ताकि मांस में मिलावट से बचा जा सके और हिंदू युवाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिल सके इस पहल पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह समाज में विभाजन पैदा कर सकता है, जबकि शिंदे सेना और बीजेपी ने इसका समर्थन किया है। समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख ने भी इस पहल का स्वागत किया

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छत्तीसगढ़ में ED टीम पर हमला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास के बाहर समर्थकों का उग्र प्रदर्शन

डी की टीम पर हमला: भूपेश बघेल के घर के बाहर समर्थकों का हंगामा छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पर उस समय हमला हुआ जब वे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास से छापेमारी के बाद लौट रहे थे। यह घटना तब घटी जब ईडी अधिकारी शराब घोटाले से संबंधित मामले में बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के ठिकानों पर छापेमारी कर रहे थे। छापेमारी के दौरान, बड़ी संख्या में भूपेश बघेल के समर्थक उनके निवास के बाहर एकत्रित हो गए थे और ईडी की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। जब ईडी की टीम बाहर निकली, तो समर्थकों ने उनकी कारों पर ईंट-पत्थरों से हमला किया। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन एक व्यक्ति को सुरक्षाबलों ने मौके पर ही पकड़ लिया। ईडी सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा सकती है। छापेमारी के दौरान, ईडी ने भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके लिए नोट गिनने की मशीनें मंगाई गई थ यह घटना राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाती है, विशेषकर जब सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों पर इस प्रकार के हमले हो रहे हैं ईडी सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा सकती है। छापेमारी के दौरान, ईडी ने भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके लिए नोट गिनने की मशीनें मंगाई गई थीं। यह घटना राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाती है, विशेषकर जब सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों पर इस प्रकार के हमले हो रहे ह

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ईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया तेज, जल्द आमंत्रित होंगी वित्तीय बोलियां

सरकार और LIC की 61% हिस्सेदारी बिक्री के लिए तैयार, डेटा रूम से जुड़ी समस्याएं हुईं दूर, सौदा अंतिम चरण में आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया तेज, जल्द आमंत्रित होंगी वित्तीय बोलियां आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अब तेज़ी पकड़ रही है। सरकार ने इसके डेटा रूम से जुड़ी तमाम अड़चनों को दूर कर लिया है, जिससे बैंक के निजीकरण का अगला चरण शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। बिजनेस टुडे टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच-पड़ताल का काम लगभग पूरा हो चुका है और सरकार जल्द ही फाइनेंशियल बिड्स (वित्तीय बोलियां) आमंत्रित करने की योजना बना रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है और डेटा रूम से संबंधित सभी मुद्दों को हल कर लिया गया है। डेटा रूम वह स्थान होता है जहां किसी कंपनी की संपूर्ण वित्तीय जानकारी संग्रहीत होती है। संभावित निवेशक इस डेटा का विश्लेषण करके कंपनी का मूल्यांकन करते हैं और अपनी बोली प्रस्तुत करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि डेटा रूम से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने का अर्थ है कि यह सौदा अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सरकार और LIC की हिस्सेदारी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा रूम को लेकर संभावित निवेशकों द्वारा पूछे गए कुछ सवालों का समाधान किया गया था और अब कोई बड़ी समस्या शेष नहीं है। आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया जनवरी 2023 में शुरू हुई थी, जब सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया था। इस प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी कुल 61% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। इसमें केंद्र सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। एयर इंडिया की बिक्री के बाद यह सरकार का सबसे बड़ा निजीकरण अभियान होगा। हालांकि, इस सौदे से सरकार को कितनी धनराशि प्राप्त होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पिछले आम चुनावों के बाद केंद्र सरकार ने विनिवेश के लिए कोई निश्चित लक्ष्य तय करने की बजाय गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) संग्रहण बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। वित्त वर्ष 2025 में सरकार को DIPAM (विनिवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग) से कुल 68,263 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है, जिसमें 8,625 करोड़ रुपये विनिवेश से मिले हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetization) के जरिए 47,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य पर ईडी का शिकंजा, 2000 करोड़ के गबन का आरोप

पूर्व आबकारी मंत्री की गिरफ्तारी के बाद अब बघेल परिवार पर आंच छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में अब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का नाम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को चैतन्य बघेल से जुड़े 14 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी का आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच राज्य के खजाने से करीब 2161 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई, जिसमें चैतन्य बघेल की भी संलिप्तता सामने आई है।ईडी के अनुसार, इस घोटाले के तहत शराब की अवैध बिक्री के लिए डुप्लिकेट होलोग्राम और बोतलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। मामले में रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) के प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी का भी नाम शामिल है।ईडी ने अब तक घोटाले से जुड़े 205.49 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। इसके अलावा, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन पर 72 करोड़ रुपए के अवैध लाभ का आरोप है।हालांकि, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। लेकिन ईडी की जांच के बाद अब चैतन्य बघेल भी कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं।

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औरंगजेब की कब्र पर गरमाई सियासत: महाराष्ट्र सरकार के रुख के बाद कब्र हटाने की मांग तेज

सीएम फडणवीस बोले: कांग्रेस के कार्यकाल में मिला संरक्षण, हम भी कब्र हटाना चाहते हैं महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर सियासत तेज हो गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में औरंगजेब की कब्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से संरक्षण मिला था, जबकि मौजूदा सरकार इसे हटाने के पक्ष में है। फडणवीस के इस बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने पलटवार करते हुए कहा कि देवेंद्र फडणवीस हर बार कांग्रेस को ही टारगेट करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए, न कि बार-बार कांग्रेस पर आरोप लगाना। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अफजल खान की कब्र से अतिक्रमण हटाने के बाद अब औरंगजेब की कब्र को हटाने का समय आ गया है। उन्होंने औरंगजेब को रावण के बाद दूसरा सबसे बड़ा दुष्ट बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह कदम सही होगा। शिवसेना नेता शंभूराजे देसाई ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मामले को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को बनाए रखने की कोई जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता बाला नांदगांवकर ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शिवाजी महाराज को तकलीफ देने वाले और संभाजी महाराज की हत्या करने वाले औरंगजेब की कब्र का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि इसे जल्द से जल्द हटा देना चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। देखना होगा कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।

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महवश अमु: रेडियो जॉकी से लेकर लेखिका तक, महिलाओं के सशक्तिकरण की आवाज़

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में युजवेंद्र चहल के साथ वायरल तस्वीरों से लेकर, सोशल मीडिया और किताबों तक, महवश ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। महवश अमु: रेडियो जॉकी, कंटेंट क्रिएटर और लेखिका की सफलता की कहानी महवश अमु, जिनका नाम आजकल हर जगह सुर्खियों में है, एक प्रसिद्ध रेडियो जॉकी, कंटेंट क्रिएटर, होस्ट और लेखिका हैं। दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाली महवश का सफर बेहद प्रेरणादायक है। उनकी शिक्षा से लेकर करियर तक, हर मोड़ पर उन्होंने खुद को साबित किया है। इस विश्वविद्यालय से शाहरुख खान, बरखा दत्त और कबीर खान जैसे मशहूर व्यक्तित्व भी पढ़ चुके हैं। 9 मार्च को, महवश को क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल मैच में देखा गया, जिसके बाद उनकी और चहल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई है, और फैंस का उत्साह चरम पर है। महवश ने 2019 से 2021 तक रेडियो मिर्ची 98.3 एफएम के साथ रेडियो जॉकी के रूप में काम किया, जहां उनकी प्रैंक कॉल्स और रेडियो शो श्रोताओं के बीच बेहद पॉपुलर रहे। सोशल मीडिया पर भी उनकी एक मजबूत पहचान बन चुकी है, खासकर इंस्टाग्राम पर, जहां उनके 1.6 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। महवश ने अपनी लेखनी से भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने दो किताबें लिखी हैं – “Wandering Souls” और “The Bleeding Hearts”, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर आधारित हैं। इसके अलावा, उन्हें बिग बॉस 14, बॉलीवुड फिल्मों और नेटफ्लिक्स सीरीज़ से भी ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने हमेशा महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक बदलाव के प्रति अपने समर्पण को प्राथमिकता दी और इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया। महवश सोशल मीडिया का उपयोग समाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए भी करती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर और अस्पताल के बिस्तरों की उपलब्धता के बारे में जानकारी साझा की, जिससे उन्हें समाज में एक मजबूत आवाज़ के रूप में पहचाना गया। वित्तीय दृष्टिकोण से भी महवश का करियर शानदार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 35 लाख रुपये है, और उनकी मासिक आय 70,000 से 80,000 रुपये के बीच है। उनकी वार्षिक आय लगभग 8 से 9 लाख रुपये बताई जाती है। महवश अमु न केवल एक स्टार रेडियो जॉकी और लेखिका हैं, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा भी हैं, जिन्होंने हमेशा समाज को बेहतर बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। उनके जीवन और कार्यों से हमें सिखने को मिलता है कि सफलता सिर्फ करियर तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी होती है।

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