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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल की रिहाई पर सियासत तेज, BJP ने उठाए सवाल, सिंहदेव बोले– बिना दोष सिद्ध किए दी जा रही सजा

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को जमानत मिल जाती है, उसी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल ने लखमा की कभी पैरवी नहीं की और कांग्रेस शासनकाल में आदिवासी नेताओं को साजिश के तहत निशाना बनाया गया। ठाकुर ने कहा कि कवासी लखमा के अनपढ़ होने का फायदा उठाकर उनके खिलाफ मामला गढ़ा गया। अगर जांच निष्पक्ष है, तो फिर एक को राहत और दूसरे को जेल क्यों? उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय शराब घोटाले को सत्ता का संरक्षण मिला। सिंहदेव का पलटवार— जांच एजेंसियों का दुरुपयोग वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर बिना अपराध सिद्ध हुए ही लोगों को सजा दे रही है, जो कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सिंहदेव ने कहा कि चैतन्य बघेल ही नहीं, बल्कि कवासी लखमा, देवेंद्र यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के कई नेताओं के साथ भी यही रवैया अपनाया गया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। भूपेश बघेल बोले— राजनीतिक बदले की कार्रवाई चैतन्य बघेल की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बेटे की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ED, IT और EOW जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल बदले की भावना से किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि चैतन्य को हाईकोर्ट से जमानत मिलना इस बात का सबूत है कि कार्रवाई गलत थी। उन्होंने बताया कि चैतन्य की रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन के दिन हुई, जबकि ED ने जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तारी कर खुशी में खलल डालने की कोशिश की थी। ED के आरोप क्या हैं? ED के मुताबिक शराब घोटाले की जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनमें चैतन्य बघेल पर करीब 1000 करोड़ रुपए की लेयरिंग और मनी ट्रांजैक्शन का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले की रकम विभिन्न चैनलों से होते हुए चैतन्य बघेल तक पहुंचाई गई। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के शराब घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारियों के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में कई राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज है।

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नववर्ष पर दर्दनाक हादसा: कोरबा में जर्जर पुल बना जानलेवा, युवक की मौत, दो दोस्त घायल

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नववर्ष के पहले ही दिन एक हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया। बांगो थाना क्षेत्र के पोड़ी-उपरोड़ा इलाके में तान नदी पर बने जर्जर गुरसिया पुल पर स्कूटी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में पुरानी बस्ती, कोरबा निवासी 21 वर्षीय प्रकाश श्रीवास की जान चली गई। वहीं, उसके दोस्त अनमोल गोस्वामी और हरि गोस्वामी घायल हो गए हैं। कैसे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, तीनों युवक एक ही स्कूटी पर सवार होकर परला की ओर जा रहे थे। गुरुवार देर रात जब वे गुरसिया पुल से गुजर रहे थे, तब पुल पर बने गड्ढों से बचने के दौरान स्कूटी अनियंत्रित हो गई और सीधे पुल की रेलिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गया। मोबाइल से खुला पूरा मामला हादसे के बाद घायल युवकों ने न तो तत्काल पुलिस को सूचना दी और न ही परिजनों को। रात में बांगो पुलिस को सूचना मिली कि सड़क पर एक युवक घायल अवस्था में पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रकाश को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान नहीं हो पाने के कारण पुलिस प्रयास कर रही थी। इसी दौरान सुबह मृतक के मोबाइल पर आए कॉल से पुलिस को उसकी पहचान और घटना की पूरी जानकारी मिल सकी। इसके बाद परिजनों को सूचित किया गया, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं बनी चिंता यह हादसा जिले में खराब सड़कों और जर्जर पुलों की समस्या को उजागर करता है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मरम्मत को लेकर गंभीर कदम उठाने की जरूरत बताई जा रही है। फिलहाल पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोड़ी-उपरोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मर्च्युरी में रखवा दिया है और मामले की जांच जारी है।

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दुर्ग: नशा मुक्ति केंद्र से ही नशे की दवाएं बाहर ले जाने का आरोप, BJP महिला मोर्चा ने पकड़ा मामला

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के नशा मुक्ति (OST) केंद्र से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नशा छुड़ाने के लिए संचालित इस केंद्र में दी जाने वाली दवाओं के दुरुपयोग का आरोप लगा है। भाजपा जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वीटी कौशिक ने शनिवार को अस्पताल परिसर में एक मरीज को नशे की दवाएं बाहर ले जाते हुए पकड़ने का दावा किया है। स्वीटी कौशिक का कहना है कि OST सेंटर में तय नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। नियमानुसार मरीजों को नशा मुक्ति की दवाएं अस्पताल परिसर में ही खिलाई जानी चाहिए, लेकिन यहां दवाएं मरीजों को बाहर ले जाने के लिए दी जा रही थीं। नशे की दवाएं बरामद बताया गया कि चार मरीजों के पास से इव्लिन (Evelyn) की शीशियां, इंजेक्शन में उपयोग होने वाली दवा और OST पाउडर की बड़ी मात्रा बरामद की गई। आरोप है कि इन दवाओं का इस्तेमाल मरीज इंजेक्शन के जरिए नशा करने के लिए कर रहे थे। लंबे समय से स्थानीय लोगों में नाराजगी भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि सुपेला क्षेत्र में यह OST सेंटर लंबे समय से विवादों में है। स्थानीय लोग लगातार इसे हटाने या अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र के आसपास नशाखोरी, हंगामा और असामाजिक गतिविधियों के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों, विशेषकर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान पकड़ा गया मामला जानकारी के अनुसार, रायपुर से डॉक्टर सोनवानी OST सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान स्वीटी कौशिक भी अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचीं और एक मरीज को बड़ी मात्रा में दवा बाहर ले जाते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। यह दवाएं तत्काल सेवन के लिए थीं, जिन्हें बाहर ले जाना नियमों के खिलाफ बताया गया है। शिकायत दर्ज, जांच शुरू OST सेंटर के डॉक्टर और स्टाफ संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। स्वीटी कौशिक ने पूरे मामले को एक संगठित लापरवाही बताते हुए सुपेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। भाजपा महिला मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि OST सेंटर को या तो स्थानांतरित किया जाए या सख्त निगरानी में संचालित किया जाए, ताकि नशा मुक्ति अभियान अपने उद्देश्य से भटके नहीं।

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बिलासपुर सड़क हादसा: पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, 2 श्रद्धालुओं की मौत, 3 गंभीर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कोटा थाना अंतर्गत बेलगहना चौकी क्षेत्र में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क से उतर गई और जंगल क्षेत्र में एक पेड़ से टकरा गई। इस हादसे में रायपुर के दो श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। कार सवार सभी लोग रायपुर से अमरकंटक पूर्णिमा स्नान के लिए जा रहे थे। मृतकों की पहचान रामकुमार धीवर (45) और राजकुमार साहू के रूप में हुई है। घायलों को प्राथमिक इलाज के बाद सिम्स अस्पताल, बिलासपुर रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। जंगल में हुआ हादसा हादसा सुबह करीब 9 बजे ग्राम भसको के पास हुआ, जब कार तेज रफ्तार में जंगल के रास्ते से गुजर रही थी। अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और कार सीधे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। 2 घंटे तक कार में फंसा रहा शव हादसे के बाद कार के आगे बैठे राजकुमार साहू और एक अन्य यात्री वाहन में बुरी तरह फंस गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया, लेकिन राजकुमार का शव करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद कार से बाहर निकाला जा सका। घायलों की हालत गंभीर हादसे में कार चला रहे निलेश्वर धीवर, पीछे बैठे सुखसागर मानिकपुरी और अमित चंद्रवंशी गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों को दी गई सूचना पुलिस ने मृतकों और घायलों के परिजनों को सूचना दी। परिजन रायपुर से रतनपुर पहुंचे, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए रायपुर रवाना किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन नियंत्रण खोने को हादसे की वजह माना जा रहा है।

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रायगढ़ हिंसा: महिला आरक्षक से अमानवीय व्यवहार, 5 आरोपी गिरफ्तार, राजनीतिक बयानबाजी तेज

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध के दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि एक महिला आरक्षक के साथ मारपीट और बदसलूकी की गंभीर घटना भी सामने आई है। आरोप है कि महिला आरक्षक को दौड़ाकर पीटा गया और उसकी वर्दी फाड़ दी गई, साथ ही इस अमानवीय कृत्य का वीडियो भी बनाया गया। इस मामले में पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास और वनमाली राठिया शामिल हैं। कैसे बिगड़े हालात दरअसल, 8 दिसंबर को धौराभाठा में JPL के गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक को लेकर हुई जनसुनवाई के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर को लिबरा चौक पर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए गए। उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों, एम्बुलेंस और अन्य सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट पहुंचे, जहां कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और अन्य मशीनों को नुकसान पहुंचाया गया। अधिकारियों की मौजूदगी में भी हिंसा स्थिति संभालने के लिए लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद पथराव और आगजनी जारी रही। JPL प्रबंधन का फैसला लगातार विरोध और बिगड़ते हालात को देखते हुए JPL प्रबंधन ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द करने का निर्णय लिया है। राजनीतिक प्रतिक्रिया इस घटना पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने महिला आरक्षक के साथ हुई घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध” बताया और कहा कि सरकार को जनता में बढ़ते गुस्से पर आत्ममंथन करना चाहिए। वहीं बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि सरकार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने मामले की गहराई से जांच की बात भी कही।

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छत्तीसगढ़ RI प्रमोशन परीक्षा रद्द: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 216 पटवारियों की पदोन्नति होगी निरस्त

छत्तीसगढ़ में पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एन.के. व्यास ने अपने अहम फैसले में RI प्रमोशन परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा में भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। पटवारी से RI पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें 2600 से अधिक पटवारियों ने भाग लिया था। 29 फरवरी 2024 को जारी परिणाम में 216 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया, हालांकि अंतिम रूप से केवल 13 अभ्यर्थियों को चयनित किया जाना था। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद गहराता चला गया। हाईकोर्ट में पहुंचा मामला प्रमोशन से वंचित पटवारियों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी पदोन्नति के लिए चुन लिया गया, जबकि अधिक अंक लाने वाले योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया। पेपर लीक और भाई-भतीजावाद के आरोप जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा में प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था। आरोप है कि कुछ केंद्रों पर पति-पत्नी, भाई-भाई और रिश्तेदारों को जानबूझकर साथ बैठाया गया। एक मामले में फेल हुए पटवारी को बाद में पास दिखाया गया। कई उम्मीदवारों को समान अंक मिलने पर भी संदेह गहराया। EOW-ACB की कार्रवाई RI प्रमोशन घोटाले को लेकर पटवारी संघ और शासन के पत्र के आधार पर EOW-ACB ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से दो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है। 216 पदोन्नतियां होंगी रद्द हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि चयन प्रक्रिया दूषित, अपारदर्शी और पक्षपात से ग्रस्त थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः निरस्त हो जाएगी। नई परीक्षा कराने की अनुमति हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पटवारी से RI पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित करने की छूट दी है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कराई जाए, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को मिला नया पुलिस अधीक्षक, IPS मनोज खिलारी को सौंपी कमान

राज्य सरकार ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी IPS मनोज कुमार खिलारी को सौंप दी है। गृह विभाग के अवसर सचिव द्वारा देर रात जारी आदेश के अनुसार, मनोज खिलारी को जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। IPS मनोज खिलारी वर्ष 2014 बैच के अधिकारी हैं। नियुक्ति से पहले वे दूसरी वाहिनी, बिलासपुर में कमांडेंट के पद पर कार्यरत थे। जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक एस. आर. भगत के 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था, जिसे अब भर दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मनोज खिलारी ने अपने सेवाकाल में कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं और कानून-व्यवस्था को लेकर उनका अनुभव मजबूत माना जाता है। उनके कार्यभार संभालने से जिले में सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग सिस्टम को और बेहतर बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। नए एसपी के रूप में मनोज खिलारी का फोकस जनता की सुरक्षा, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और पुलिस विभाग की कार्यक्षमता को मजबूत करना रहेगा।

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CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का डिप्टी CM हाउस घेराव, 7 साल से भर्ती का इंतज़ार

13 दिनों से तूता में धरना, गृहमंत्री बोले – CM से चर्चा के बाद होगा फैसला छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) भर्ती 2018 के वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का सब्र अब जवाब दे चुका है। नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव कर दिया। ये सभी उम्मीदवार पिछले 13 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपने परिवार के साथ आंदोलन कर रहे हैं। दरअसल, साल 2018 में CAF के 1786 पदों पर भर्ती निकली थी, जिसमें मेरिट लिस्ट के बाद 417 अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। सात साल बीतने के बावजूद इन उम्मीदवारों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है, जबकि CAF में तीन हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। धरने के दौरान बिगड़ी बच्चे की तबीयत प्रदर्शन के दौरान एक अभ्यर्थी के छह महीने के बच्चे की तबीयत खराब हो गई, जिससे आंदोलनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच नाराज उम्मीदवारों ने डिप्टी सीएम के बंगले का घेराव कर अपनी मांगें रखीं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कैंडिडेट्स को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली से लौटने के बाद पूरे मामले पर उनसे चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन समाप्त करने की अपील भी की। गृहमंत्री अमित शाह को भी लिखा पत्र CAF कैंडिडेट्स अपनी समस्या को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी पत्र लिख चुके हैं। कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में अभ्यर्थियों ने यहां तक कहा था कि “अगर नक्सली होते तो शायद घर वापसी पर नौकरी और करियर दोनों मिल जाता।” इसके बाद राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गुरुवार को अलग-अलग जिलों से आए कैंडिडेट्स अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ गृहमंत्री के बंगले पहुंचे थे। गृहमंत्री ने उनसे पुलिस मुख्यालय से नोटशीट लाने को कहा और हस्ताक्षर करने का भरोसा दिया, लेकिन उसके बाद वे दौरे पर निकल गए। मजदूरी कर चला रहे परिवार अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी न मिलने के कारण उन्हें मजदूरी कर परिवार का पेट पालना पड़ रहा है। एक कैंडिडेट के पिता गृहमंत्री आवास के बाहर हाथ जोड़कर मीडिया से मदद की गुहार लगाते नजर आए। आधे से ज्यादा कैंडिडेट हो चुके ओवरएज भर्ती के समय सभी अभ्यर्थियों की उम्र 28 से 32 वर्ष थी, लेकिन सात साल बीत जाने के कारण अब 50 प्रतिशत से ज्यादा कैंडिडेट 36 से 40 साल की उम्र पार कर चुके हैं। वे अब किसी नई भर्ती के लिए भी योग्य नहीं रह गए हैं। मेरिट लिस्ट में चयनित कई उम्मीदवार मेडिकल में अनफिट हुए या नौकरी छोड़ दी, जिससे सीटें खाली हुईं। बावजूद इसके, वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स को मौका नहीं मिला। सरकार बदलने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। CAF और पुलिस बल में हजारों पद खाली छत्तीसगढ़ पुलिस बल में लंबे समय से भारी कमी बनी हुई है। प्रदेश में कुल 83,259 स्वीकृत पदों में से केवल 65,439 जवान कार्यरत हैं। यानी करीब 17,820 पद खाली पड़े हैं। प्रदेश में 13 IPS और 129 DSP अधिकारियों की कमी है। वहीं सूबेदार, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल के हजारों पद भी रिक्त हैं, जिससे अपराध जांच और कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। भर्ती प्रक्रिया भी अधर में अक्टूबर 2024 में पुलिस विभाग में 341 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन उसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। कॉन्स्टेबल भर्ती भी लंबे समय से अटकी हुई है। CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो अभी भी खाली पदों पर उनकी नियुक्ति की जा सकती है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री से होने वाली बैठक और सरकार के फैसले पर टिकी हैं।

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रायपुर: 500 रुपये मेंटेनेंस विवाद में बवाल, ‘मुफ्तखोर’ कहने पर लाठी-डंडों से मारपीट, VIDEO

रायपुर: राजधानी रायपुर में एक हाउसिंग सोसाइटी के वॉट्सऐप ग्रुप पर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। डूंडा इलाके की कृष्णा हाइट्स कॉलोनी में 500 रुपये के मेंटेनेंस चार्ज को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ी कि लाठी-डंडों से मारपीट हो गई। घटना में सोसाइटी के कई सदस्य घायल हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, कॉलोनी में साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं के लिए सभी सदस्यों से 500 रुपये मासिक मेंटेनेंस देने का नियम तय किया गया था। कुछ लोगों द्वारा भुगतान नहीं करने पर सोसाइटी के सदस्य अनिल सिरिया ने वॉट्सऐप ग्रुप में टिप्पणी करते हुए “मुफ्तखोर” शब्द का इस्तेमाल किया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि टिप्पणी से नाराज एक सदस्य ने अपने परिचितों को कॉलोनी में बुला लिया, जिसके बाद लाठी-डंडों से हमला किया गया। इस दौरान कई लोगों को चोटें आईं और परिसर में तोड़फोड़ भी की गई। मारपीट का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। घटना के दौरान रजनीश द्विवेदी का सोने का चेन-लॉकेट गिरने की भी जानकारी सामने आई है। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। पीड़ित पक्ष ने मुजगहन थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से राहुल जैन ने भी पुलिस में शिकायत दी है। उनका आरोप है कि उनके माता-पिता के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई, साथ ही उन्हें धक्का देकर कॉलोनी से बाहर निकाल दिया गया। फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत, DGP को कड़ी फटकार

रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB/EOW द्वारा दर्ज मामलों में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने जमानत आदेश जारी करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने खास तौर पर सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने को लेकर नाराजगी जताई और इसे कानून का ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ बताया। सह-आरोपी पर कार्रवाई नहीं, जांच की पारदर्शिता पर सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा कर रहा है, लेकिन उसके खिलाफ स्थायी वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, आरोपी को खुला छोड़ना जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने इस लापरवाही को “Grave Violation of Law” करार देते हुए राज्य के DGP को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है। जुलाई से जेल में थे चैतन्य बघेल चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। ED ने उन्हें पिछले साल मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था, जबकि ACB/EOW ने भ्रष्टाचार मामले में सितंबर में तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से जेल में थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED और ACB के आरोप ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1000 करोड़ रुपए के लेनदेन को संभाला।वहीं ACB का दावा है कि उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए की अवैध राशि मिली और पूरे घोटाले की रकम 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। भूपेश बघेल का बयान बेटे को जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। आज सत्य की जीत हुई है।” जमानत की खबर के बाद समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। बचाव पक्ष की दलील चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने कहा कि गिरफ्तारी केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर की गई, जो खुद नॉन-बेलेबल वारंट का आरोपी है और खुलेआम घूम रहा था।उन्होंने दावा किया कि चैतन्य बघेल ने जांच में पूरा सहयोग किया, बावजूद इसके उन्हें कभी समन नहीं भेजा गया और सीधे गिरफ्तार कर लिया गया। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच के अनुसार, भूपेश सरकार के कार्यकाल में शराब सिंडिकेट के जरिए— इस कथित सिंडिकेट में तत्कालीन IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारी शामिल बताए गए हैं।

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