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रायपुर में आज कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन, बीजेपी की आक्रोश रैली के चलते असर

राजधानी रायपुर में आज भारतीय जनता पार्टी की आक्रोश रैली के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। रैली को देखते हुए शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष व्यवस्था की गई है। यह रैली महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) बिल लोकसभा में पारित नहीं होने के विरोध में निकाली जा रही है। रैली की शुरुआत इंडोर स्टेडियम से होगी और यह गणेश मंदिर तिराहा, बुढ़ापारा बिजली ऑफिस चौक, महिला थाना चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंचेगी, जहां आमसभा का आयोजन किया जाएगा। अनुमान है कि इस रैली में प्रदेशभर से 15 से 20 हजार कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, बूढ़ेश्वर चौक से गणेश मंदिर तिराहा होते हुए बुढ़ापारा बिजली ऑफिस चौक, श्याम टॉकीज से गणेश मंदिर तिराहा, सदानी चौक और सदर बाजार, महिला थाना चौक से सुभाष स्टेडियम, कोतवाली चौक से सुभाष स्टेडियम, बंजारी चौक से सुभाष स्टेडियम, कालीबाड़ी चौक से कोतवाली चौक और आकाशवाणी चौक से नलघर चौक तक के मार्गों पर यातायात का दबाव रहेगा और आंशिक रूप से रास्ते बंद रह सकते हैं। लोगों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कुछ वैकल्पिक मार्ग भी सुझाए हैं। बूढ़ेश्वर चौक से कैलाशपुरी ढाल, पुलिस लाइन गेट होते हुए नेहरू नगर की ओर जाने का मार्ग खुला रहेगा। इसी तरह कालीबाड़ी से महिला थाना चौक, काली माता तिराहा और अंबेडकर चौक मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रैली के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में जवान तैनात रहेंगे, लेकिन अनावश्यक रूप से इन मार्गों पर आने से बचना बेहतर होगा। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन प्रस्ताव के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी के तहत रायपुर में यह आक्रोश रैली आयोजित की जा रही है। इस आयोजन को देखते हुए शहरवासियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

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दुर्ग में 5 साल की बच्ची के साथ दर्दनाक घटना: चॉकलेट लेने गई बच्ची का अपहरण, रेप के बाद बोरे में फेंका, आरोपी गिरफ्तार

Durg जिले के उतई इलाके में एक बहुत ही शर्मनाक घटना हुई है। यहां एक 5 साल की मासूम बच्ची का अपहरण कर उसके साथ गलत काम किया गया। बच्ची स्कूल से घर आने के बाद पास की दुकान पर चॉकलेट लेने गई थी। उसी समय आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। आरोपी उसी मोहल्ले का रहने वाला है और बच्ची उसे पहले से जानती थी। आरोपी ने बच्ची के साथ गलत काम किया और फिर उसे मारने की कोशिश की। उसने बच्ची के मुंह को कपड़े से बांधा और उसे बोरे में डालकर घर के पीछे कुएं के पास फेंक दिया। कुछ घंटों बाद गांव के लोगों को एक बोरा हिलता हुआ दिखा। जब उन्होंने बोरा खोला तो उसमें बच्ची मिली। बच्ची बहुत डरी हुई थी और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत अब ठीक बताई जा रही है। इस घटना की खबर फैलते ही गांव के लोग गुस्से में आ गए और थाने पहुंच गए। लोगों ने आरोपी को सख्त सजा देने की मांग की। पुलिस ने आरोपी धनेश्वर साहू को पकड़ लिया है। जांच में पता चला है कि बच्ची के साथ गलत काम हुआ है। पुलिस ने उसके घर से कुछ सबूत भी बरामद किए हैं। पुलिस ने मामला POCSO Act के तहत दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाएगा ताकि जल्दी सजा मिल सके।

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दुर्ग में 40 साल पुराना मुआवजा विवाद: जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन, मुआवजा या जमीन वापसी की मांग

Durg जिले के धमधा ब्लॉक के परसकोल और खैरझीटी गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीण अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर एकत्रित हुए थे और किसान बंधु संगठन के नेतृत्व में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का मुख्य कारण वर्ष 1983-84 में गोरपा नहर निर्माण के लिए की गई जमीन अधिग्रहण की लंबित मुआवजा राशि है। किसानों का कहना है कि करीब 17 किसानों की जमीन अधिग्रहित किए 40 से 45 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं और जनदर्शन सहित विभिन्न मंचों पर आवेदन दे चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। जनवरी 2026 में कलेक्टर से मुलाकात के दौरान भी मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। किसानों ने प्रशासन से साफ मांग की है कि या तो उन्हें उनकी जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाए या फिर उनकी जमीन वापस की जाए। इसके साथ ही वर्षों तक जमीन के उपयोग का किराया और क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मुआवजा न मिलने के कारण वे अपनी जमीन का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और खाता बंटवारे की प्रक्रिया भी अटकी हुई है, जिससे परिवारों में विवाद की स्थिति बन रही है। ग्रामीण कमल नारायण सुपंथक ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के बाद से न तो खेती हो पा रही है और न ही कोई लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चार दशक बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा ग्रामीणों ने खैरझीटी गांव के जर्जर प्राथमिक स्कूल भवन की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से बच्चे पंचायत भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने जल्द नया स्कूल भवन बनाने की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बाद में तहसीलदार ने ग्रामीणों से चर्चा कर कलेक्टर से मुलाकात का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। प्रशासन ने मामले के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है।

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