Chhattisgarh

रायपुर: शहर के किसी भी मंदिर से नहीं लिया जाएगा संपत्तिकर, ब्राम्हणपारा मंदिर में नोटिस देने वाले कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

रायपुर नगर निगम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब शहर के किसी भी मंदिर से संपत्तिकर (प्रॉपर्टी टैक्स) नहीं लिया जाएगा। महापौर मीनल चौबे ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा कि निगम क्षेत्र के सभी जोन और वार्डों में स्थित मंदिरों पर प्रॉपर्टी टैक्स लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थान समाज की आस्था के केंद्र हैं और उन पर कर लगाना उचित नहीं है। इसके बावजूद जोन-4 के अंतर्गत ब्राम्हणपारा वार्ड क्रमांक 43 स्थित सोहागा मंदिर में निगम कर्मचारियों द्वारा संपत्तिकर का नोटिस देने का मामला सामने आया। इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और महापौर ने संबंधित कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। निगम ने इस मामले में मोहर्रिर सुशात और अमर नामक दो कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्होंने नियमों के विपरीत जाकर मंदिर को संपत्तिकर का नोटिस क्यों दिया। महापौर मीनल चौबे ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए नाराजगी जताई और कहा कि भविष्य में यदि ऐसी गलती दोहराई गई तो संबंधित कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जोन आयुक्तों और राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल — चाहे वह मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च हो — को टैक्स नोटिस जारी न किया जाए। महापौर ने यह भी कहा कि निगम प्रशासन जनता की आस्था का सम्मान करता है और धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती है, तो तुरंत नगर निगम को सूचित करें ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके।

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साय कैबिनेट की अहम बैठक: गाय को ‘राजमाता’ का दर्जा मिलने की संभावना, धान खरीदी और NHM कर्मचारियों की मांगों पर भी चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को महानदी भवन में चल रही कैबिनेट बैठक कई अहम फैसलों की दिशा तय कर सकती है। इस बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है। इनमें सबसे चर्चित प्रस्ताव गाय को ‘राजमाता’ का दर्जा देने का है। अगर इस पर सहमति बनती है, तो छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो गाय को राजमाता घोषित करेगा। गौरतलब है कि प्रदेश में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि गाय को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ‘राजमाता’ घोषित किया जाए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में दिए एक बयान में संकेत दिया था कि उनकी सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि आज की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। कैबिनेट की बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। इनमें धान खरीदी की तैयारियां, राज्योत्सव 2025 के आयोजन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों की मांगों से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। खासकर धान खरीदी को लेकर प्रशासनिक तैयारियों और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। वहीं राज्योत्सव के आयोजन को लेकर कार्यक्रमों की रूपरेखा और आयोजन स्थलों पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा NHM कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और सेवा शर्तों से जुड़ी मांगों पर भी सरकार निर्णय ले सकती है। त्योहारी सीजन को देखते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति और जनसुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल है। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनता की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। आज की यह बैठक न केवल सरकारी योजनाओं की दिशा तय करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े ‘गाय को राजमाता’ दर्जे जैसे ऐतिहासिक निर्णय की साक्षी भी बन सकती है।

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रायपुर: बिरगांव BJP अध्यक्ष के गुंडाराज का मामला – शराब मांगने पर ढाबा संचालक से मारपीट, फिर उसी पर हुई FIR!

राजधानी के बिरगांव इलाके से भारतीय जनता पार्टी के सुशासन के दावे पर सवाल खड़ा करने वाला चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, घटना 9 अक्टूबर की देर रात की है। मामला उरला थाना क्षेत्र के 6 लाइन इलाके में स्थित न्यू पंजाब ढाबा का है, जहां देर रात BJP मंडल अध्यक्ष भगिरथ यादव और उनके साथी गौतम साहू और दो साथी साथ थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों नेता ढाबे में पहुंचकर शराब की मांग करने लगे। जब ढाबा संचालक ने साफ तौर पर कहा कि वहां शराब उपलब्ध नहीं है, तो आरोपी नेता अपने पद और राजनीतिक रौब का हवाला देने लगे। बताया जा रहा है कि उन्होंने खुद को “BJP का अध्यक्ष” बताते हुए धमकी दी स्थिति तब बिगड़ी जब ढाबा संचालक ने विरोध किया। इसके बाद कथित रूप से दोनों ने मारपीट और गाली-गलौज की। उपस्थित लोगो ने किसी तरह बीच-बचाव किया। हैरानी की बात तो यह है कि झगड़े के बाद भी मामला यहीं नहीं रुका — बल्कि BJP नेताओं ने ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी, जिसके बाद ढाबा संचालक को ही थाने में हिरासत में रख लिया गया। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने इसे “सत्ता के नशे में चूर गुंडाराज” बताया है। लोगों का कहना है कि जब शासन और संगठन के पदाधिकारी ही कानून की मर्यादा तोड़ने लगें, तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा? वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पक्षों से पूछताछ की जाएगी। फिलहाल, उरला थाना में यह घटना चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। जनता पूछ रही है — क्या यही है BJP का सुशासन, जहां पीड़ित ही आरोपी बन जाता है?

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छत्तीसगढ़ महिला आयोग में विवाद: सदस्य आरोप लगाती हैं, अध्यक्ष पर मनमानी और पक्षपात का आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में बड़े विवाद ने जन्म लिया है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में नियुक्त तीन सदस्य—लक्ष्मी वर्मा, सरला कोसरिया और दीपिका सोरी—ने आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक और सचिव अभय सोनवानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सदस्यों का कहना है कि आयोग में नियमों का पालन नहीं हो रहा और अध्यक्ष पूरी प्रक्रिया को अकेले चला रही हैं। तीनों सदस्यों ने प्रेस वार्ता में बताया कि सुनवाई और निर्णयों में उन्हें शामिल नहीं किया जाता। नियमों के अनुसार किसी भी निर्णय में कम से कम दो सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है, लेकिन अध्यक्ष अकेले ही अंतिम फैसला लेती हैं। सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान अनधिकृत लोग शामिल होते हैं, जिनमें अध्यक्ष के पति और निजी वकील भी शामिल हैं, जो प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। कोर्ट, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को देंगे जानकारीतीनों सदस्यों ने कहा कि वे इस विवाद को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी और पूरी जानकारी विधि विभाग, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी देंगी। उनका दावा है कि महिला आयोग की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत चल रही है। सचिव पर तटस्थता खोने का आरोपसदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव अभय सोनवानी आयोग के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। जब आय-व्यय और कार्यों से संबंधित जानकारी मांगी जाती है, तो सचिव जवाब देने से बचते हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि वे अध्यक्ष के प्रति ही जवाबदेह हैं। भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपसदस्यों का कहना है कि अध्यक्ष भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और आयोग को अपने निजी अधिकार क्षेत्र की तरह चला रही हैं। लक्ष्मी वर्मा ने बताया कि उन्हें किसी भी संभागीय सुनवाई की जानकारी तक नहीं दी जाती। इसी कारण तीनों सदस्यों ने 8 अक्टूबर को सुनवाई का बहिष्कार किया। चेंबर में नेताओं की तस्वीरों को लेकर विवादसदस्यों ने आयोग अध्यक्ष के चेंबर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और भूपेश बघेल की तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि संवैधानिक संस्था में राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें नहीं होनी चाहिए; वहां केवल राज्यपाल और मुख्यमंत्री की फोटो ही उचित हैं। अध्यक्ष का जवाबअध्यक्ष किरणमयी नायक ने इस विवाद पर कहा कि इस मामले में वह कुछ नहीं कहेंगी और सचिव ही जानकारी देंगे। इस विवाद ने न केवल प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल उठाया है, बल्कि महिला आयोग की विश्वसनीयता को भी प्रभावित किया है। आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक रंग भी ले सकता है।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने ED-EOW को 3 महीने में पूरी जांच का अल्टीमेटम, बड़े अधिकारियों और भूपेश के बेटे गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला मामले सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को चेतावनी दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे दिसंबर के अंत तक पूरी जांच पूरी करें और फाइनल रिपोर्ट पेश करें। सितंबर के आखिरी सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ED और EOW ने मामले की जांच तेजी से शुरू कर दी है। आबकारी विभाग के लगभग 30 अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है, जिनमें 7 रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हैं। ED के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि जांच को करीब दो साल हो चुके हैं और अब इसे मुकाम तक पहुंचाना जरूरी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी 13 याचिकाओं की सुनवाई हुई थी, जिनमें अलग-अलग FIR, जमानत याचिकाएं और प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट शामिल थी। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और जांच पूरी करने का निर्देश दिया। EOW के अनुसार, इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और अन्य बड़े अधिकारियों और कारोबारी शामिल हैं। विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में पता चला कि करीब 3,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर सिंडिकेट बनाया और घोटाले को अंजाम दिया। अनवर ढेबर ने पैसे को रिश्तेदारों और कंपनियों के नाम निवेश किया। घोटाले की रणनीति: फरवरी 2019 में अनवर ढेबर ने होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और अधिकारियों की मीटिंग कर कमीशन और शराब सप्लाई की रणनीति तय की थी। ED और EOW की जांच जारी है और कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि तीन महीने के अंदर पूरी जांच और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाए।

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बिरनपुर हिंसा का ट्रायल शुरू: CBI चार्जशीट में पुलिस पर पत्थरबाजी और भुनेश्वर साहू पर हमला का खुलासा

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर हिंसा मामले में करीब दो साल बाद आज से ट्रायल की शुरुआत हो रही है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 8, 9 और 10 अक्टूबर को गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस केस में मृतक भुनेश्वर साहू के पिता और भाजपा विधायक ईश्वर साहू समेत कुल 23 गवाहों को पेश किया जाएगा। CBI ने नवंबर 2024 में चार्जशीट पेश की थी और इसमें किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है। भुनेश्वर साहू पर हमला और पुलिस पर पथरावCBI की जांच में सामने आया कि भीड़ ने भुनेश्वर साहू पर जानलेवा हमला किया और पुलिस अफसरों पर भी पत्थरबाजी की। चार्जशीट के अनुसार, थाना साजा के सब-इंस्पेक्टर बिनुराम ठाकुर मौके पर पहुंचे और भुनेश्वर को छुड़ाने की कोशिश की। तभी भीड़ में से आवाज आई, “मुख्तार, अकबर, जनाब, जलील-पुलिस को पत्थर मारो।” इस दौरान अफसरों पर भी पत्थर फेंका गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अब्दास मोहम्मद सहित अन्य लोगों ने पत्थर, ईंट और चाकू से हमला किया। भीड़ ने भुनेश्वर को पकड़कर मस्जिद के पास की गली में ले जाकर बेरहमी से पीटा और पत्थर-ईंट से वार किया। गंभीर स्थिति में उसके माता-पिता ने उसे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर साजा पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया। घटना की शुरुआतCBI के अनुसार, 8 अप्रैल 2023 को बच्चों के बीच साइकिल टकराने के विवाद ने बड़ी घटना को जन्म दिया। स्कूल से लौटते समय चंचल साहू और सलीम खान के बीच झगड़ा हुआ। इसके बाद मारपीट और बोतल फेंकने के दौरान कुलेश्वर साहू घायल हो गया। दोपहर में पंचायत बुलाई गई, जिसमें मुस्लिम समुदाय की भीड़ ने ईंट-पत्थर और हथियारों से हमला किया। अफरा-तफरी में कई लोग घायल हुए और भुनेश्वर को मस्जिद की ओर घसीटा गया। आरोपी और गिरफ्तारीप्रारंभिक जांच में पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। बाद में CBI ने 6 और नाम जोड़े। अब कुल 18 आरोपी हैं। नए आरोपी पुलिस पर पथराव करने के दोषी हैं। हिंसा के बाद धारा 144 लागू कर दी गई थी। दो दिन बाद बिरनपुर गांव में रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की लाश मिली, जिसके बाद दोबारा तनाव बढ़ा। 8 लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। राजनीतिक पक्ष से निष्कर्षबचाव पक्ष के वकील एस के फरहान ने बताया कि CBI और पुलिस की जांच में पाया गया कि बच्चों के झगड़े के बाद हिंसा भड़क गई थी। चार्जशीट में किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम शामिल नहीं किया गया।

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बीजापुर की 11 साल की शांभवी का दिल ठीक हुआ, पूरे गांव, पुलिस और मंत्री ने मिलकर कराया मुफ्त इलाज

बस्तर के बीजापुर जिले के छोटे गांव वरदल्ली की 11 साल की बच्ची शांभवी के दिल में गंभीर समस्या पाई गई – उसके दिल में छेद था और वॉल्व पूरी तरह से खराब हो चुका था। पिता विक्कू की छोटी-सी खेती से घर चलाना मुश्किल था और महीने का आय मात्र 2,500 रुपए था। मां विजयलक्ष्मी गृहिणी हैं। पिछले साल शांभवी को अचानक सीने में दर्द शुरू हुआ और खेल-कूद भी नहीं कर पा रही थी। परिवार ने उसे निजी अस्पताल में दिखाया, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसके दिल में छेद है और इलाज रायपुर में ही संभव है। रायपुर लाने का खर्च 20-25 लाख रुपए बताया गया। गांववालों ने दिखाई इंसानियतछोटी-छोटी रकम जुटाकर गांव वालों ने पिता विक्कू को 10 हजार रुपए दिए और रायपुर रवाना होने में मदद की। रायपुर पहुंचने के बाद एम्स और सत्यसाई अस्पताल में मदद नहीं मिली। कई निजी अस्पतालों ने भी इलाज का खर्च बताया, जो विक्कू जैसे गरीब परिवार के बस में नहीं था। लॉज संचालक और पुलिस की मददथक-हारकर परिवार जयस्तंभ चौके के पास एक लॉज में रुका। लॉज संचालक ने बच्ची की कहानी सुनी और उन्हें कमरे की सुविधा मुफ्त दी। वहीं कुछ पुलिस अधिकारी वहां आए और बच्ची की स्थिति देखी। अगले दिन उन्हीं अधिकारियों ने शांभवी को स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से मिलवाया। मंत्री और पुलिस ने मिलकर कराया निजी अस्पताल में इलाजमंत्री के निर्देश पर बच्ची का इलाज पहले सरकारी अस्पताल में जांच के लिए हुआ। लेकिन बेहतर इलाज के लिए उसे निजी अस्पताल में एडमिट करवाया गया। इस दौरान पुलिस अफसर लगातार रिपोर्ट लेते रहे, बच्ची की जरूरत पर अपना ब्लड भी डोनेट किया। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थलगभग 20 दिन के इलाज के बाद शांभवी अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और कुछ ही दिनों में डिस्चार्ज हो जाएंगी। गांववालों, पुलिस और मंत्री की मदद के चलते यह गरीब परिवार के लिए राहत और खुशी का पल बन गया।

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एम्स रायपुर में मरीजों से वसूला जा रहा पार्किंग शुल्क, ठेकेदार के गुर्गों से बढ़ा विवाद का खतरा

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया गया एम्स रायपुर अब मरीजों के लिए परेशानी का केंद्र बन गया है। अस्पताल में प्रवेश करने से पहले अब हर मरीज को वाहन पार्किंग शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया है। बाइक वालों से ₹10 और ऑटो या कार से आने वालों से ₹30 वसूले जा रहे हैं। 12 घंटे से अधिक रुकने पर यह शुल्क दोगुना हो जाता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि पिछले 11 सालों में कभी भी पार्किंग शुल्क नहीं लिया गया था। अब अचानक से शुल्क लागू होने से आर्थिक तंगी झेल रहे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। मरीजों और पार्किंग कर्मचारियों के बीच लगातार बहस की स्थिति बन रही है। चीना पांडे के गिरोह के हाथों में पार्किंग ठेकासबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पार्किंग ठेका कोरबा के बदमाश चीना पांडे और उसके साथियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। उस पर हत्या, डकैती, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यहां तक कि उस पर जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है। अब ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में एम्स जैसे संवेदनशील स्थान की पार्किंग व्यवस्था आने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पहली बार पार्किंग शुल्क का ठेकाएम्स रायपुर में यह पहली बार है जब पार्किंग शुल्क वसूली का ठेका दिया गया है। रोजाना करीब 3,000 मरीज ओपीडी में आते हैं और लगभग इतनी ही गाड़ियां परिसर में प्रवेश करती हैं। प्रवेश द्वार पर बिना शुल्क दिए किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। ठेका कंपनी एसएस मल्टीसर्विसेज एम्स रायपुर के नाम से पूरे परिसर में किराया सूची के बैनर लगाए गए हैं। अन्य अस्पतालों में भी वसूली का चलनडॉ. अंबेडकर अस्पताल में भी लंबे समय से एक ही कंपनी पार्किंग ठेका संभाले हुए है, जहां साइकिल से ₹10 और कार से ₹50 तक वसूले जाते हैं। वहीं डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कोई आधिकारिक पार्किंग ठेका नहीं है, लेकिन सिक्योरिटी गार्ड ही अनौपचारिक रूप से शुल्क वसूलते हैं। मरीजों की बढ़ी मुश्किलेंएम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीज अब पहले पार्किंग ठेकेदारों से उलझ रहे हैं, फिर अस्पताल की कतारों में लगते हैं। वहीं ऑटो चालकों ने भी पार्किंग शुल्क के चलते किराया बढ़ा दिया है। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बीमार बाघिन ‘बिजली’ का बेहतर इलाज अब गुजरात में, बिना टिकट पहुंचे वन अफसरों का स्टेशन पर चालान

तीन महीने से बीमार बाघिन ‘बिजली’ को आखिरकार बेहतर इलाज के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा भेजा गया है। रायपुर की जंगल सफारी में जन्मी ‘बिजली’ करीब ढाई महीने से यूट्रस और ओरल इंफेक्शन से जूझ रही थी। हाल के दिनों में उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया था, जिससे उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। मंगलवार को उसे हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से रवाना किया गया। बिजली के साथ वन विभाग और वनतारा के पशु चिकित्सकों की टीम भी मौजूद रही। रेलवे स्टेशन पर अफसरों का चालानजब बिजली को ट्रेन में शिफ्ट किया जा रहा था, उस समय रायपुर रेलवे स्टेशन पर वन विभाग के अफसर बिना प्लेटफार्म टिकट पहुंचे। इसको लेकर रेलवे अधिकारियों से उनकी बहस हो गई। मामला बढ़ने पर रेलवे मजिस्ट्रेट ने चालान काटने के आदेश दिए और वन अमले को जुर्माना भरना पड़ा। अनुमति मिलने में हुई देरीसीटी स्कैन रिपोर्ट में बाघिन के गर्भाशय में संक्रमण (पायोमीट्रा) की पुष्टि के बाद वन विभाग ने उसे वनतारा भेजने का फैसला किया था। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से अनुमति मांगी गई, जो मिलने में 10 दिन लग गए। अनुमति के बाद बिजली को विशेष टीम की निगरानी में रवाना किया गया। जांच में सामने आया संक्रमणशुरुआती जांच में ‘बिजली’ की बीमारी को गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल समस्या माना गया था। बाद में जब अल्ट्रासाउंड और हेमेटोलॉजिकल जांच हुई, तो किडनी और यूट्रस में संक्रमण का पता चला। 26 सितंबर को वनतारा की विशेषज्ञ टीम रायपुर पहुंची और पिछले 10 दिनों से वह लगातार बिजली का इलाज कर रही थी। अब उसके आगे के उपचार के लिए गुजरात भेजा गया है।

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा – लोगों को मिले जीएसटी राहत का पूरा फायदा, पुरानी कीमतों पर सामान बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जीएसटी विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कोई भी वस्तु या उत्पाद पुरानी कीमत पर नहीं बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि टैक्स दरों में कमी का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचना चाहिए। सभी अधिकारी सुनिश्चित करें कि नई दरों के अनुसार ही वस्तुओं की कीमत तय की जाए। मंगलवार को आयोजित ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की समीक्षा बैठक में मंत्री चौधरी ने राजस्व संग्रह, कर चोरी पर नियंत्रण और विभागीय सुधारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चौधरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बिना टैक्स चुकाए राज्य के बाहर से माल मंगाकर बेचने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही फर्जी या गैर-पंजीकृत फर्मों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं। उन्होंने कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी निगरानी लागू करने के आदेश भी दिए ताकि अनुशासन और पारदर्शिता बनी रहे। मंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की सफल कर प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कर उसे छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। बैठक में वित्त सचिव मुकेश बंसल, राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। चौधरी ने बताया कि 99% से अधिक वस्तुएं अब 5% जीएसटी स्लैब में आ गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। कृषि उपकरण, बीमा पॉलिसी और दवाइयों पर कर घटने से लोगों के खर्च में भारी कमी आई है। उन्होंने निर्देश दिया कि हर उत्पाद पर नई संशोधित कीमत का उल्लेख अनिवार्य हो और ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की दैनिक रिपोर्टिंग की जाए। मंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राज्य के हर नागरिक तक जीएसटी 2.0 सुधारों का लाभ पहुँचे।

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