Chhattisgarh

CGMSC घोटाला: डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा गिरफ्तार, 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड

सरकार को तीन गुना महंगे रिएजेंट सप्लाई कराने का आरोप, साजिश की परतें खुलीं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। नवी मुंबई स्थित डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को 21 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी को 22 जनवरी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब तक 9 से ज्यादा आरोपी गिरफ्त में CGMSC घोटाले में इससे पहले 18 जनवरी 2026 को ACB/EOW ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं, इससे पूर्व मोक्षित कॉर्पोरेशन, दुर्ग के संचालक शशांक चोपड़ा समेत पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक जिन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें इन सभी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें भी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। ACB/EOW का कहना है कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना’ में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जारी है। कंपनी पॉलिसी दरकिनार कर बढ़ाई गई कीमतें जांच में यह सामने आया है कि डायसिस इंडिया ने अपने रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए पहले से निश्चित एमआरपी तय कर रखी थी। इसके बावजूद कुंजल शर्मा ने जानबूझकर कंपनी की नीति को नजरअंदाज किया और मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अधिक कीमतें प्रस्तावित कीं। शशांक चोपड़ा के साथ साजिश का आरोप ACB की जांच के अनुसार कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा। तय एमआरपी से कहीं अधिक दरों और शर्तों को अनधिकृत रूप से CGMSC को भेजा गया, जिससे टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और मोक्षित कॉर्पोरेशन की ऊंची दरों को मंजूरी मिल गई। तीन गुना तक महंगे दामों पर सप्लाई जांच में यह भी सामने आया है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक महंगे दामों पर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की। इससे राज्य सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को करोड़ों का अनुचित लाभ मिला। हमर लैब योजना की गहन जांच जारी ACB/EOW ने स्पष्ट किया है कि हमर लैब योजना के अंतर्गत हुई खरीद प्रक्रिया, भुगतान और आपूर्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। क्या है पूरा CGMSC घोटाला? CGMSC घोटाले में अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत से सरकार को करीब 411 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि IAS और IFS अधिकारियों की सांठगांठ से महज 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये की खरीदी कर ली गई। इस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा फिलहाल 23 जनवरी तक ED की कस्टोडियल रिमांड पर है। 8 रुपये की चीज 2352 में, 5 लाख की मशीन 17 लाख में खरीदी जांच में सामने आया है कि इसके अलावा CGMSC ने 300 करोड़ रुपये के रिएजेंट्स की खरीद की। शिकायत से खुला घोटाले का राज दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने CGMSC में अनियमितताओं की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, CBI और ED से की थी। इसके बाद केंद्र से निर्देश मिलने पर EOW ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज बंद EOW की जांच के घेरे में आने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने अपना कारोबार बंद कर दिया। कंपनी की वेबसाइट पर फर्म की स्थिति अस्थायी रूप से बंद दर्शाई जा रही है। यह कंपनी ग्राम तर्रा, तहसील धरसींवा, रायपुर में स्थित थी। कैसे मिलता था टेंडर? EOW की रिपोर्ट के अनुसार CGMSC अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये का काम दिया। जरूरत न होने के बावजूद मेडिकल किट और मशीनों की खरीदी की गई।मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर टेंडर कोडिंग की, जबकि CGMSC अधिकारियों ने शर्तें इस तरह तय कीं कि दूसरी कंपनियां टेंडर से बाहर हो जाएं। 27 जनवरी 2025 को हुई थी बड़ी रेड 27 जनवरी 2025 को EOW की टीम ने रायपुर, दुर्ग और हरियाणा के पंचकुला में एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान मोक्षित कॉर्पोरेशन और उससे जुड़े 16 ठिकानों से अहम दस्तावेज जब्त किए गए। जरूरत न होते हुए भी 300 करोड़ की खरीदी जांच में सामने आया कि कांग्रेस शासनकाल में जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच जरूरत से ज्यादा रिएजेंट खरीदे गए। 200 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट भेजे गए, जहां न मशीन थी, न तकनीशियन।रीएजेंट की एक्सपायरी केवल 2–3 महीने शेष थी, जिससे बचाव के लिए CGMSC 600 फ्रिज खरीदने की तैयारी में था।

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डेंटल कॉलेज के पीजी-इंटर्न छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्टाइपेंड समानता और गर्ल्स हॉस्टल की मांग

बातचीत बेनतीजा, अस्पताल सेवाएं प्रभावित राजधानी रायपुर स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज के पीजी और इंटर्न छात्र अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्र पिछले 6 दिनों से आंदोलन कर रहे थे, जिसे अब और तेज करते हुए उन्होंने पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हड़ताल के दौरान छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल परिसर में डॉक्टरों, मरीजों और स्टाफ की आवाजाही रोक दी, जिससे दंत चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। हालात को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा आंदोलनकारी छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। छात्रों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की कमी को दूर करना शामिल है। प्रशासन से बातचीत, नहीं निकला हल हड़ताल की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से लंबी चर्चा की। अधिकारियों ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को बसों में भरकर तूता धरना स्थल छोड़ दिया। हालांकि इसके बावजूद हड़ताल जारी रही। मरीजों को हो रही परेशानी हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना परामर्श लौटना पड़ा।पीड़ित शिव कुमार महानंद ने बताया कि उनके पिता का एक्सीडेंट हुआ है, जिसमें उनका बायां जबड़ा टूट गया, लेकिन छात्रों की हड़ताल के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन के दो प्रमुख मुद्दे 1. स्टाइपेंड में समानता की मांगपीजी और इंटर्न छात्रों का कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्रों को जिस दर से स्टाइपेंड मिलता है, डेंटल कॉलेज के छात्रों को उससे कम भुगतान किया जा रहा है।छात्रों का तर्क है कि ड्यूटी टाइम, ओपीडी, सर्जरी और मरीजों की जिम्मेदारियां समान होने के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। वे मेडिकल कॉलेज के अनुरूप स्टाइपेंड और उसे बैकडेट से लागू करने की मांग कर रहे हैं। 2. गर्ल्स हॉस्टल की कमीछात्रों ने महिला पीजी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने का मुद्दा भी उठाया है। कई छात्राओं को बाहर किराए के मकान या पीजी में रहना पड़ता है, जिससे सुरक्षा और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। छात्र कॉलेज परिसर में अतिरिक्त गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका हड़ताल के चलते गुरुवार को अधिकांश ओपीडी और उपचार सेवाएं प्रभावित रहीं। कई विभागों में कुर्सियां खाली नजर आईं।छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर दंत चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

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रायपुर में आंशिक कमिश्नरेट सिस्टम लागू, पुलिस दो हिस्सों में बंटी

21 थाने कमिश्नर के अधीन, 12 थाने SP के नियंत्रण में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 23 जनवरी 2026 से रायपुर जिले के एक हिस्से में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस संबंध में गृह विभाग ने बुधवार शाम आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। नए सिस्टम के तहत रायपुर की पुलिस व्यवस्था को दो भागों में बांटा गया है। जिले के 21 थाने पुलिस कमिश्नर के अंतर्गत आएंगे, जबकि 12 थाने एसपी (SP) के अधीन काम करेंगे। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर मॉडल पर आधारित बताई जा रही है, जहां शहरी और ग्रामीण इलाकों की पुलिसिंग अलग-अलग ढांचे में संचालित होती है। पूरे जिले में लागू नहीं हुआ सिस्टम कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इसे पूरे रायपुर जिले में लागू किया जाएगा। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था और इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष रखा गया था। हालांकि 21 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में IAS लॉबी के विरोध के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। बाद में भोपाल-इंदौर मॉडल के अनुसार आंशिक रूप से सिस्टम लागू करने पर सहमति बनी। IPS लॉबी ने जताई नाराजगी वहीं IPS अधिकारियों का मानना है कि अधूरे कमिश्नरेट सिस्टम से जिले में भ्रम की स्थिति बनेगी। अधिकारियों के अनुसार अब पुलिस के लिए दो अलग-अलग प्रशासनिक स्ट्रक्चर तैयार करने होंगे, जबकि विभाग के पास न तो पर्याप्त मैनपावर है और न ही संसाधन। दो अधिकारियों के नियंत्रण में जिले की पुलिस रहने से यह व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। IPS लॉबी का कहना है कि इससे कानून-व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने की बजाय व्यवस्थागत समस्याएं बढ़ेंगी। सीमाओं के बंटवारे पर सवाल अधिकारियों के मुताबिक कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिसिंग की सीमाएं मनमाने तरीके से तय की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के बावजूद उरला थाना क्षेत्र को कमिश्नरेट में शामिल किया गया, ताकि पंचायत क्षेत्रों पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं मुजगहन सहित करीब 10 थानों को ग्रामीण पुलिस के अधीन कर दिया गया, जहां पंचायतों से प्रशासनिक रुचि कम बताई जा रही है। कमेटी की रिपोर्ट भी नजरअंदाज एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और अपराध दर को देखते हुए पूरे जिले में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी। कमेटी ने भुवनेश्वर मॉडल को अधिक प्रभावी बताते हुए अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी थी, लेकिन अब तक इस पर न चर्चा हुई और न ही कमेटी से कोई फीडबैक लिया गया। पुलिस बल की भारी कमी राजधानी के अनुरूप रायपुर के एक थाने में कम से कम 75 पुलिसकर्मियों की जरूरत है, जबकि फिलहाल औसतन 30 से 35 जवान ही तैनात हैं। अब कमिश्नरेट सिस्टम के चलते मौजूदा बल का भी बंटवारा होगा, जिससे फील्ड ड्यूटी में कमी आने की आशंका है। जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में प्रभावी पुलिसिंग के लिए 7500 से अधिक पुलिस बल की आवश्यकता है। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से थानों की बजाय दफ्तरों में स्टाफ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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धान खरीदी में भारी कटौती से नाराज़ किसान सड़क पर उतरे, रायगढ़–पुसौर मार्ग रहा जाम

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर धान मंडी में धान खरीदी के दौरान की जा रही भारी कटौती को लेकर किसानों का गुस्सा बुधवार को सड़कों पर फूट पड़ा। धान खरीदी में कटौती बंद कराने की मांग को लेकर किसानों ने रायगढ़–पुसौर मुख्य मार्ग पर धरना-प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया। 30 से 50 प्रतिशत तक धान काटे जाने का आरोप बुधवार सुबह किसान जब पुसौर ब्लॉक के धान उपार्जन केंद्र पहुंचे, तो वहां धान की गुणवत्ता के नाम पर 30 से 50 प्रतिशत तक कटौती किए जाने का आरोप लगाया गया। किसानों का कहना था कि वे जितना धान लेकर मंडी पहुंचे थे, उतनी मात्रा में खरीदी नहीं की जा रही थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा था। कई गांवों के किसान आंदोलन में हुए शामिल धान कटौती से नाराज़ किसानों ने किसान नेता लल्लू सिंह के नेतृत्व में सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। इस आंदोलन में पुसौर, सारसमाल, कर्राजोर, घींच, सलोनी और तड़ोला समेत आसपास के 5 से 6 गांवों के किसान शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। चक्काजाम से वाहनों की लगी लंबी कतार किसानों के सड़क पर बैठने से रायगढ़–पुसौर मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आम यात्रियों और मालवाहक वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने बातचीत कर दिया भरोसा घटना की जानकारी मिलते ही नायब तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उन्हें आश्वासन दिया कि धान खरीदी में अनावश्यक कटौती नहीं की जाएगी और उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त प्रशासन की ओर से भरोसा मिलने के बाद किसानों ने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया। किसान नेता लल्लू सिंह ने बताया कि यदि कटौती जारी रहती तो किसान तय समय में धान नहीं बेच पाते, इसलिए मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा।

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रायगढ़ में अवैध कबाड़ कारोबार पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जिलेभर में एक साथ छापेमारी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध कबाड़ कारोबार के खिलाफ पुलिस ने व्यापक अभियान शुरू किया है। जिले के सभी थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बड़े और छोटे कबाड़ कारोबारियों के दुकानों और गोदामों पर छापेमारी की। इस दौरान लाखों रुपये मूल्य के अवैध कबाड़ के जब्त किए जाने की सूचना है। बुधवार सुबह से चल रही कार्रवाई प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह सभी थाना क्षेत्रों की पुलिस टीमों ने अपने-अपने इलाके में कबाड़ कारोबार से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी। पुलिस की यह कार्रवाई जिलेभर में एक साथ की जा रही है, जिससे अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि शहर का सबसे बड़ा कबाड़ गोदाम गढ़उमरिया रोड क्षेत्र में स्थित है, जहां पुलिस की टीम सुबह पहुंची और विस्तृत जांच शुरू की। वाहनों के पार्ट्स और लोहे का सामान बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने कबाड़ स्थलों से पुराने मोटरसाइकिल और साइकिल, सरिया, भारी मात्रा में लोहा और कई महंगी गाड़ियों के पार्ट्स बरामद किए हैं। जब्त सामान के वैध दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुल कितने मूल्य का अवैध कबाड़ जब्त किया गया है। पुलिस की कार्रवाई फिलहाल जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अपराध नियंत्रण के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई गौरतलब है कि दो दिन पहले सोमवार को पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों की क्राइम मीटिंग ली थी। इस बैठक में बढ़ते अपराधों पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। माना जा रहा है कि उसी के तहत बुधवार को जिलेभर में एक साथ यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

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भिलाई में हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड पर जीएसटी की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी

दुर्ग जिले के भिलाई में स्थित हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड कंपनी पर जीएसटी विभाग की जांच दूसरे दिन भी लगातार जारी रही। मंगलवार देर रात तक विभागीय अधिकारियों की टीम कंपनी परिसर में मौजूद रही और बीते पांच वर्षों से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई। यह कार्रवाई टैक्स चोरी की आशंका को लेकर शुरू की गई है। भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित कंपनी के स्टॉक, उत्पादन, बिक्री और आयात-निर्यात से संबंधित रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। सोमवार शाम शुरू हुई जांच, दो दिन चली कार्रवाई जानकारी के अनुसार, जीएसटी विभाग की 7 से 8 अधिकारियों की टीम सोमवार शाम करीब 4 बजे कंपनी परिसर में जांच के लिए पहुंची थी। इसके बाद से लगातार दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है, जो दूसरे दिन भी देर रात तक चलता रहा। कंपनी में तीन निदेशक बताए जा रहे हैं, जिनमें संदीप अग्रवाल, संतोष अग्रवाल और भगवानदास अग्रवाल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी का संबंध पूर्व साडा अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल के परिवार से है, हालांकि कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्तमान में परिसर में नहीं आ रहे हैं। बिल, रिटर्न और इनवॉइस की बारीकी से जांच जांच के दौरान विभागीय अधिकारी कंपनी के बिल, जीएसटी रिटर्न, इनवॉइस और अन्य लेखा दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। खासतौर पर टैक्स भुगतान, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और संभावित अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कंपनी का सालाना टर्नओवर लगभग 400 से 500 करोड़ रुपए के बीच बताया जा रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से जुड़े लेनदेन भी जांच के दायरे में कंपनी का व्यावसायिक लेनदेन महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश तक फैला हुआ है। इसी वजह से दोनों राज्यों से जुड़े ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है। विभाग का फोकस इस बात पर है कि कहीं गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा तो नहीं किया गया या टैक्स भुगतान में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। रिकॉर्ड के मूल्यांकन के बाद सामने आएगी स्थिति जांच के दौरान टैक्स जमा करने से संबंधित कई दस्तावेज सामने आए हैं, जिनका अन्य रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सभी दस्तावेजों की जांच और मूल्यांकन पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टैक्स चोरी हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसकी वास्तविक राशि कितनी है।

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ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर महिला से 7.76 लाख की ठगी, टेलीग्राम के जरिए दिया गया दोगुने मुनाफे का झांसा

दुर्ग जिले में ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। भिलाई भट्ठी थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला से सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए 7 लाख 76 हजार 600 रुपए की धोखाधड़ी की गई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क पुलिस के अनुसार सेक्टर-1 भिलाई निवासी तरन्नूम राशिद (36) ने बताया कि 8 जनवरी 2026 को उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब से जुड़ा एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में कम समय में ज्यादा कमाई का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से संपर्क हुआ, जहां ऑनलाइन जॉब करने का प्रस्ताव दिया गया। टेलीग्राम अकाउंट बनवाकर मांगी गई रकम आरोपियों ने महिला को टेलीग्राम पर अकाउंट बनाने के लिए कहा और वहीं से आगे बातचीत की गई। इसके बाद गूगल-पे के जरिए दिए गए यू-पीआई आईडी पर 9 और 10 जनवरी 2026 को अलग-अलग किश्तों में कुल 1 लाख 80 हजार 600 रुपए ट्रांसफर करवाए गए। कुछ समय बाद आरोपियों ने दावा किया कि यह रकम शेयर मार्केट में निवेश कर दी गई है और अब दोगुना मुनाफा हो चुका है। पैसे निकालने के बहाने और ट्रांसफर करवाए पीड़िता से कहा गया कि मुनाफे की राशि निकालने के लिए और पैसे जमा करने होंगे। इसके बाद 12 जनवरी को एसबीआई बैंक, सम्पूर्ण नगर शाखा के एक खाते में 2 लाख 46 हजार रुपए और 13 जनवरी को एसबीआई बैंक, करलपुरा शाखा के खाते में 3 लाख 50 हजार रुपए जमा कराए गए। इस तरह कुल रकम 7 लाख 76 हजार 600 रुपए हो गई। दोबारा रकम मांगने पर हुआ ठगी का खुलासा जब महिला ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया तो @CFO_WITHDRAW_SERVICE नामक टेलीग्राम अकाउंट से उनसे फिर 6 लाख रुपए जमा करने की मांग की गई। इसी दौरान पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने भिलाई भट्ठी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस कर रही डिजिटल लेन-देन की जांच पुलिस ने बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन, व्हाट्सऐप नंबर और टेलीग्राम अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले आक

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भिलाई में राजधानी एक्सप्रेस पर पथराव, इंजन के सामने का कांच क्षतिग्रस्त

भिलाई में चलती ट्रेन पर पथराव की एक और घटना सामने आई है। सोमवार शाम बिलासपुर से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस पर खुर्सीपार गेट और पावर हाउस के बीच अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके। पथराव में ट्रेन के इंजन के सामने लगा कांच क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें दरार आ गई। गनीमत यह रही कि घटना के समय लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को कोई चोट नहीं पहुंची, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। खुर्सीपार और पावर हाउस के बीच हुई घटना प्राप्त जानकारी के अनुसार राजधानी एक्सप्रेस (12441) सोमवार शाम करीब 4 बजे अपने निर्धारित मार्ग से गुजर रही थी। खुर्सीपार गेट पार कर जैसे ही ट्रेन पावर हाउस की ओर बढ़ी, तभी अचानक इंजन की ओर पत्थर फेंके गए। एक पत्थर सीधे इंजन के सामने लगे कांच से टकराया, जिससे कांच में दरार आ गई। अचानक हुई इस घटना से कुछ समय के लिए ट्रेन स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन लोको पायलट और सहायक लोको पायलट ने संयम रखते हुए ट्रेन को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया। आरपीएफ ने दर्ज किया केस, तलाश जारी घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। भिलाई-3 आरपीएफ प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और पत्थरबाजों की पहचान की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि पथराव खुर्सीपार क्षेत्र की ओर से किया गया। इसके बाद आरपीएफ टीम ने खुर्सीपार और आसपास के इलाकों में सघन जांच अभियान शुरू किया है। झुग्गी बस्तियों में भी तलाशी ली जा रही है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार खुर्सीपार क्षेत्र में इससे पहले भी वंदे भारत ट्रेन पर पथराव की घटना सामने आ चुकी है। उस मामले में एक अपचारी बालक को पकड़ा गया था। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं से रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।

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बिलासपुर उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश: कोविड से मौत पर बीमा कंपनी देगी 1 करोड़ और 12% ब्याज

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता को 1 करोड़ रुपए की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा मानसिक कष्ट और मुकदमे के खर्च के रूप में 2 लाख रुपए अलग से देने का भी आदेश दिया गया है। इस मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पांडेय की पीठ ने की। कोविड संक्रमण से हुई थी बीमित महिला की मौत बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मई 2020 में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस से ‘प्लैटिनम वेल्थ प्लान’ के तहत 1 करोड़ रुपए का जीवन बीमा कराया था। पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी ने आवश्यक मेडिकल परीक्षण कराए थे। सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हो गईं। इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि बीमित महिला को पहले से गंभीर बीमारी थी, जिसे पॉलिसी लेते समय छिपाया गया था। आयोग ने माना- पॉलिसी से पहले महिला पूरी तरह स्वस्थ थी उपभोक्ता आयोग ने मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी ने खुद महिला की संपूर्ण मेडिकल जांच कराई थी और उस समय उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में असफल रही कि महिला को पॉलिसी शुरू होने से पहले कोई गंभीर बीमारी थी, जो बीमा शर्तों के अंतर्गत आती हो। बीमा कंपनी की दलील खारिज बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि बीमित महिला को वर्ष 2016 से हृदय संबंधी बीमारी थी। हालांकि आयोग ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी के पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि पॉलिसी जारी होने से पूर्व निर्धारित अवधि में महिला किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं या उन्होंने जानबूझकर जानकारी छिपाई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या अप्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

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बिलासपुर में ASP–स्पा संचालक विवाद: वायरल स्टिंग वीडियो की जांच के आदेश

बिलासपुर सिटी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेंद्र जायसवाल और एक्वा स्पा सेंटर के संचालक अमन सेन के बीच कथित लेन-देन को लेकर विवाद तेज हो गया है। एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद बिलासपुर रेंज के आईजी डॉ. संजीव शुक्ला ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। एसएसपी रजनेश सिंह को जांच सौंपी गई है और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। ASP कार्यालय का वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्पा संचालक अमन सेन और 36 मॉल के मैनेजर आशीष सिंह चंदेल, उस समय के एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल के कार्यालय में नजर आ रहे हैं। वीडियो में बातचीत के दौरान एएसपी स्पा संचालक से काम को लेकर सवाल करते दिखाई देते हैं। वीडियो में एएसपी यह कहते सुनाई देते हैं कि जिस व्यक्ति के माध्यम से वह आए हैं, उसके कारण अभी कार्रवाई नहीं की जा रही है, लेकिन तय किया गया “कमिटमेंट” पूरा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी और रेड की स्थिति में नुकसान कारोबारी को ही उठाना पड़ेगा। कमीशन और दबाव के आरोप वीडियो सामने आने के बाद एएसपी राजेंद्र जायसवाल ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी छवि खराब करने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़ कर वायरल किया गया है। वहीं स्पा सेंटर संचालक अमन सेन ने दावा किया है कि वह हर महीने 30 हजार रुपए कमीशन के तौर पर देता था। इन विरोधाभासी दावों के चलते मामला और गंभीर हो गया है, जिस पर पुलिस विभाग ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। IG ने SSP को सौंपी जांच आईजी डॉ. संजीव शुक्ला ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए एसएसपी रजनेश सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच में वायरल वीडियो की सत्यता, बातचीत की परिस्थितियां और लगाए गए आरोपों की पुष्टि की जाएगी। फिलहाल एएसपी राजेंद्र जायसवाल की पोस्टिंग गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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