April 2025

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का नक्सली संघर्ष विराम की मांग पर जवाब

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का नक्सली संघर्ष विराम की मांग पर जवाब: छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद नक्सलियों ने संघर्ष विराम की मांग की है। उन्होंने एक पत्र जारी कर कहा है कि यदि सरकार ऑपरेशन रोकने की घोषणा करती है, तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं। इस पर उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी सार्थक वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते कोई शर्त न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नक्सली वास्तव में मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं और बातचीत करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने प्रतिनिधियों और वार्ता की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा। शर्मा ने कहा कि बातचीत किसी कट्टरपंथी विचारधारा के आधार पर नहीं हो सकती। कोई भी चर्चा करने से पहले भारतीय संविधान को स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि नक्सली संविधान को नकारते हैं और अपनी समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं, तो वार्ता का कोई मतलब नहीं रह जाता। पुनर्वास नीति और सरकार का रुख: उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बेहतर पुनर्वास नीति लागू की है। जो नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षा, पुनर्वास और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि भटके हुए लोग समाज में वापस आएं और एक सुव्यवस्थित जीवन जी सकें। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रगति: शर्मा ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 40 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है, जहां पहले नक्सली अपना कानून चलाते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब राज्य के हर गांव में तिरंगा लहराना और संविधान का पालन करना अनिवार्य है। गंभीर वार्ता का आह्वान: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नक्सली वास्तव में बातचीत करना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी ओर से एक समिति बनानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने पहले भी 10 से अधिक बार वार्ता का प्रयास किया, लेकिन नक्सलियों ने ही पीछे हटने का रवैया अपनाया। अगर वे अब बातचीत करना चाहते हैं, तो उन्हें स्पष्ट प्रस्ताव के साथ आगे आना होगा। सरकार का स्पष्ट रुख: शर्मा ने दोहराया कि सरकार का रुख स्पष्ट है—बातचीत के दरवाजे खुले हैं, लेकिन हिंसा और खून-खराबे पर कोई समझौता नहीं होगा। नक्सलियों को हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना होगा, तभी कोई सार्थक समाधान निकल सकता है।

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अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा: दंतेश्वरी दर्शन और बस्तर पंडुम में शामिल होंगे

रायपुर, 1 अप्रैल 2025: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 3 अप्रैल को तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं। उनका यह प्रवास विशेष रूप से बस्तर संभाग के सांस्कृतिक एवं सुरक्षा पहलुओं पर केंद्रित होगा। दौरे का कार्यक्रम सुरक्षा बैठकें सांस्कृतिक आयोजन: ‘बस्तर के राम’ प्रख्यात कवि कुमार विश्वास द्वारा “बस्तर के राम” कथा का वाचन किया जाएगा, जो भगवान राम के दंडकारण्य प्रवास से जुड़ी है। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करेगा। बस्तर पंडुम: एक परिचय यह आदिवासी संस्कृति का महोत्सव है, जिसमें नृत्य, संगीत, पारंपरिक खेल और स्थानीय कला शामिल हैं। इसका प्रतीक चिन्ह इंद्रावती नदी, वनभैंसा, पहाड़ी मैना और गोंडी संस्कृति के तत्वों से सजा है। राजनीतिक एवं सामरिक महत्व अमित शाह का यह दौरा छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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रायपुर में पेट्रोल की कीमतों में गिरावट, आम जनता को मिली राहत

रायपुर, 1 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ सरकार ने नए वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत में ही आम जनता के लिए एक बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल की कीमतों में ₹1 प्रति लीटर की कटौती की है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में घोषित किया गया था, जो आज से प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में पेट्रोल की कीमतों में हुई इस गिरावट से आम आदमी से लेकर किसानों और व्यापारियों तक को फायदा होने की उम्मीद है। राजधानी रायपुर में पेट्रोल की नई कीमत अब ₹100.42 प्रति लीटर हो गई है, जो पहले ₹101.42 प्रति लीटर थी। हालांकि, यह कीमत अभी भी ₹100 के पार ही बनी हुई है, लेकिन सरकार के इस कदम से पेट्रोल पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए कुछ हद तक आर्थिक बोझ कम होगा। छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख शहरों जैसे बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई और कोरबा में भी पेट्रोल की कीमतें इसी तरह से घटी हैं। सरकार ने इस कदम को जनहित में एक बड़ा फैसला बताया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा था कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम लोगों पर पड़ रहे दबाव को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इससे पहले भी सरकार ने बड़े पैमाने पर डीजल की खरीद पर वैट (मूल्य वर्धित कर) में कटौती की थी, जिससे परिवहन क्षेत्र और किसानों को काफी राहत मिली थी। अब पेट्रोल की कीमतों में कमी से निजी वाहन मालिकों और छोटे व्यवसायियों को भी फायदा होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी से महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि परिवहन लागत घटने से सामानों की कीमतों में भी स्थिरता आएगी। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि महज ₹1 की कटौती से बड़ा बदलाव नहीं आएगा और सरकार को और अधिक कदम उठाने चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला राज्य के आम नागरिकों के लिए निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह देखना होगा कि भविष्य में ईंधन की कीमतों को और अधिक उचित स्तर पर लाने के लिए क्या कोई और योजनाएं लागू की जाती हैं। फिलहाल, इस कदम से लोगों को रोजमर्रा के खर्चों में थोड़ी बचत होगी, जो मौजूदा आर्थिक हालात में एक अच्छी खबर है।

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म्यांमार भूकंप से भारी तबाही, ISRO के सैटेलाइट इमेज ने दिखाई विनाशलीला

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने म्यांमार में 28 मार्च, 2025 को आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप से हुए नुकसान की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं। यह भूकंप म्यांमार के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भी महसूस किया गया था। इस प्राकृतिक आपदा ने म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई है। अब तक 1,700 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे लोगों को खोज रहे हैं। ISRO ने कैप्चर की हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेज ISRO के अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट कार्टोसैट-3 ने पृथ्वी से 500 किलोमीटर की ऊंचाई से ये तस्वीरें खींची हैं, जिनकी रिज़ॉल्यूशन क्षमता 50 सेंटीमीटर से भी कम है। सैटेलाइट इमेज में क्या दिखा? इस भूकंप के झटके थाईलैंड तक महसूस किए गए, जहां भी आपातकालीन सेवाएं सक्रिय कर दी गईं। म्यांमार में आपातकाल, भारत ने भेजी मदद म्यांमार की सैन्य सरकार ने आपातकाल घोषित कर दिया है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन मरने वालों की संख्या 2,900 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि हज़ारों लोग घायल हैं। भारत ने इस संकट की घड़ी में म्यांमार की मदद के लिए राहत दल और सहायता सामग्री भेजकर तुरंत सहयोग का हाथ बढ़ाया है।

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लैंसेट स्टडी: हृदय रोग के इलाज में बड़े बदलाव की जरूरत

नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) मृत्यु और बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक बनी हुई है। लैंसेट कमीशन की नई रिपोर्ट में हृदय रोग के इलाज में बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, धमनियों में प्लाक जमा होने के पहले संकेत मिलते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए, न कि “वेट एंड वॉच” का रुख अपनाना चाहिए। मुख्य सिफारिशें: भारत के लिए महत्व: भविष्य की रणनीति: निष्कर्ष: इस नए दृष्टिकोण से न केवल लाखों जानें बचाई जा सकती हैं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकता है।

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IMD की चेतावनी: इस साल गर्मी होगी और भी भीषण, बढ़ेंगे लू के दिन

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ग्रीष्मकालीन पूर्वानुमान में चेतावनी दी है कि इस साल अप्रैल से जून तक सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी और लू के दिनों में भी वृद्धि होगी। विभाग के अनुसार, विशेषकर उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में लू के दिनों की संख्या बढ़ सकती है। मुख्य बिंदु: लू की परिभाषा: IMD के अनुसार, मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40°C या उससे अधिक होने और सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक होने पर लू घोषित की जाती है। यदि तापमान 47°C या उससे अधिक हो जाए, तो इसे भीषण लू माना जाता है। स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर प्रभाव: IMD ने चेतावनी दी है कि लू के कारण बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, बिजली ग्रिड और परिवहन प्रणाली पर भी दबाव बढ़ सकता है। विभाग ने राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के दिशा-निर्देशों के अनुसार कदम उठाने की सलाह दी है। बारिश से राहत की उम्मीद: हालांकि, अप्रैल में सामान्य बारिश (लंबी अवधि के औसत का 88-112%) होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत, प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। एल नीनो और ला नीना का प्रभाव: IMD के अनुसार, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की स्थिति वर्तमान में तटस्थ है और गर्मी और मानसून के दौरान भी ऐसी ही रहने की संभावना है। भारत में एल नीनो की स्थिति आमतौर पर कमजोर मानसून और अधिक गर्मी से जुड़ी होती है, जबकि ला नीना मजबूत मानसून और अधिक बारिश लाती है। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ भी एक कारण: मोहापात्रा ने बताया कि मार्च में पश्चिमी विक्षोभ की संख्या कम होने के कारण बारिश में कमी देखी गई। सामान्यतः मार्च में 4-5 पश्चिमी विक्षोभ आते हैं, लेकिन इस बार केवल 2 सक्रिय विक्षोभ देखे गए। IMD ने अप्रैल के मध्य में मानसून का प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करने की भी घोषणा की है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ में 33,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया शुभारंभ

बिलासपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 33,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएं ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा और आवास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में राज्य के विकास को गति देने के लिए हैं। प्रमुख विकास परियोजनाएं ऊर्जा क्षेत्र को मिला बढ़ावा तेल और गैस बुनियादी ढांचे का विस्तार रेल और सड़क कनेक्टिविटी में सुधार आवास और शिक्षा क्षेत्र में पहल सांस्कृतिक सम्मान और नागपुर दौरा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने प्रधानमंत्री मोदी को पारंपरिक शॉल और बिलासपुर की अधिष्ठात्री देवी मां बिलासा की मूर्ति भेंट की। इससे पहले, पीएम मोदी ने नागपुर (महाराष्ट्र) में आरएसएस संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती पर स्मृति मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में लॉइटरिंग म्यूनिशन टेस्ट रेंज का भी उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे।

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प्रधानमंत्री मोदी के बिलासपुर कार्यक्रम में जा रहे SUV का पुल से गिरने से दो की मौत, सात घायल

एक दुखद घटना में, दो लोगों की जान चली गई और सात अन्य घायल हो गए जब एक SUV, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिलासपुर कार्यक्रम में जा रही थी, पुल से गिरकर नदी में समा गई। यह घटना सुबह लगभग 9 बजे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कोटमी गांव के पास हुई, जो पेंड्रा पुलिस थाना क्षेत्र में आता है। SUV में आठ लोग सवार थे और यह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भारतपुर (MCB) जिले से बिलासपुर जा रही थी। पुलिस के अनुसार, जैसे ही वाहन सोन नदी पर बने पुल के पास पहुंचा, चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और एक महिला पैदल यात्री को टक्कर मारते हुए वाहन पुल से गिरकर नदी में गिर गया। हादसे में महिला और चालक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। महिला की पहचान रामिता बाई (पंडरीखार गांव) के रूप में हुई, और चालक बाबू लाल चौधरी था। SUV में सवार सात अन्य लोग घायल हो गए, जिनमें से पांच की हालत गंभीर थी और उन्हें गौरेला जिला अस्पताल भेजा गया। यह हादसा उसी दिन हुआ, जब प्रधानमंत्री मोदी का बिलासपुर दौरा था, जिसमें वे कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने वाले थे। ये परियोजनाएं 33,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की हैं, जो पावर, तेल और गैस, रेलवे, सड़कों, शिक्षा और आवास के क्षेत्रों में फैली हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा विजाख-रायपुर पाइपलाइन (VRPL) परियोजना का शिलान्यास भी करना था। इसके साथ ही वे अभनपुर-रायपुर खंड में MEMU ट्रेन सेवा को झंडी दिखाने वाले थे और छत्तीसगढ़ में भारतीय रेलवे के पूरे नेटवर्क का विद्युतीकरण समर्पित करने वाले थे।

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मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: 1, 2, 3 अप्रैल को आंधी, बारिश और गरज के आसार

भोपाल: मौसम विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल से मध्य प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जो आने वाले दिनों में होने वाले मौसमी परिवर्तन का संकेत दे रही है। फिलहाल, प्रदेश में उत्तरी हवाओं का प्रभाव है, जिसके कारण तापमान लगातार नीचे जा रहा है। 1 अप्रैल से राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले 48 घंटों में मध्य महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में एक चक्रवाती हवाओं का प्रभाव बन सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में तापमान का हाल रविवार को नर्मदापुरम में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि टीकमगढ़ में 38.7°C, खरगोन में 38.2°C, नरसिंहपुर में 38°C और मलाजखंड (बालाघाट) में 37.5°C तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं, शहडोल के कल्याणपुर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 10.2°C देखा गया। राजधानी भोपाल में शनिवार को अधिकतम तापमान 2 डिग्री गिरकर 34.5°C पर पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई और यह 16.8°C रहा। ग्वालियर संभाग के जिलों में सबसे ज्यादा 4.4 डिग्री तक तापमान में कमी आई है। प्रमुख शहरों का तापमान प्रदेश के बड़े शहरों में इंदौर और उज्जैन में सबसे ज्यादा 36.8°C तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा, भोपाल और जबलपुर में 35.8°C तथा ग्वालियर में 35.3°C अधिकतम तापमान रहा। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि अगले कुछ दिनों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की संभावना है।

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बिरगांव: उरकुरा मोड़ का नामकरण “श्री राम चौक” के रूप में: सांस्कृतिक एकता और पहचान का प्रतीक

रायपुर जिले के बिरगांव क्षेत्र में स्थित उरकुरा मोड़ का नामकरण अब “श्री राम चौक” के रूप में किया गया है, जिससे स्थानीय समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित किया गया है। यह पहल पांच मित्रों—किशोर साह, संजय यादव, शैलेन्द्र पटेल, दशरथ साव और एक अन्य मित्र—द्वारा शुरू की गई थी। 20 जनवरी को इन मित्रों के बीच उरकुरा मोड़ के नामकरण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श हुआ, क्योंकि इस स्थान का कोई विशिष्ट नाम न होने के कारण राहगीरों को मार्गदर्शन में कठिनाई होती थी। 22 जनवरी को उन्होंने इस विचार को मूर्त रूप देने का निर्णय लिया और स्थानीय समुदाय के समर्थन से नामकरण की प्रक्रिया शुरू की।​ 30 मार्च, हिंदू नव वर्ष के अवसर पर, “श्री राम चौक” की स्थापना समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों ने विशेष पूजा-अर्चना की और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिससे स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिला। साथ ही, 6 अप्रैल को राम नवमी के दिन यहां एक विशेष विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूर-दूर से लोग शामिल होंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे। यह भंडारा धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा। “श्री राम चौक” का नामकरण उरकुरा मोड़ के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान लेकर आएगा, जिससे न केवल मार्गदर्शन में सुविधा होगी, बल्कि यह स्थान स्थानीय समुदाय की एकता और धार्मिक भावनाओं को भी प्रकट करेगा। इस पहल से बिरगांव और आसपास के क्षेत्र में सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

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