रायपुर में डीएड और CAF अभ्यर्थियों पर सख्ती, मंत्रालय घेराव से पहले 175 से अधिक को जेल भेजा गया

राजधानी रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे डीएड और CAF अभ्यर्थियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को डीएड अभ्यर्थियों द्वारा आत्मदाह की कोशिश के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद करीब 125 डीएड अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया, जिनमें 45 महिलाएं और 80 पुरुष शामिल हैं। गुरुवार को मंत्रालय घेराव के लिए निकले CAF अभ्यर्थियों को भी पुलिस ने तूता प्रदर्शन स्थल के प्रवेश द्वार पर रोक दिया। लंबी बातचीत और समझाइश के बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए 50 से अधिक अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर सेंट्रल जेल भेज दिया। फिलहाल सभी का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। 60 दिनों से जारी है आंदोलन दोनों समूह के अभ्यर्थी पिछले 60 दिनों से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। अब तक आंदोलन के दौरान 200 से ज्यादा युवाओं की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति आक्रामक प्रदर्शन या घेराव की इजाजत नहीं दी जाएगी। डीएड अभ्यर्थियों का आरोप: आरक्षित पदों पर भी नियुक्ति नहीं डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद निकाले गए थे, जिनमें लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह स्थिति तब है जब राज्य में आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री की सरकार है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को आदेश दिए थे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 अगस्त 2024 को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया है। CAF वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों की पीड़ा CAF अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। मेरिट लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन वेटिंग लिस्ट में शामिल 417 अभ्यर्थियों को यह कहकर रोक दिया गया कि पद रिक्त नहीं हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाद में कई चयनित उम्मीदवार मेडिकल में अयोग्य घोषित हुए या उन्होंने नौकरी छोड़ दी, जिससे पद खाली हुए, लेकिन वेटिंग लिस्ट वालों को मौका नहीं दिया गया। समय बीतने के साथ 417 में से 250 से अधिक अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और अब नई भर्ती में शामिल होने के पात्र नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से गुहार लगाने की बात कही है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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