रायपुर : हिंदी दिवस पर सर्वेक्षण ने खोली छात्रों की कमजोरियां
45% छात्रों को नहीं पता कब मनाते हैं हिंदी दिवस, ‘हिन्दुस्तान’ तक सही नहीं लिख पाए रायपुर में हिंदी दिवस के मौके पर किए गए एक सर्वेक्षण ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। दैनिक भास्कर टीम ने राजधानी के 100 छात्रों (50 उच्चतर माध्यमिक और 50 कॉलेज स्टूडेंट्स) से हिंदी भाषा पर उनकी राय जानने के लिए 3 प्रश्न पूछे— इसके लिए छात्रों को आधा घंटा समय दिया गया। गलतियां और सोच लेख लिखने के दौरान कई छात्रों ने ‘हिन्दुस्तान’, ‘संवैधानिक’, ‘विकसित’, ‘वासियों’, ‘प्रतीक’, ‘जीवन’ जैसे आम शब्द भी गलत लिखे। 45% छात्रों को यह तक नहीं पता था कि हिंदी दिवस कब मनाया जाता है। कई स्टूडेंट्स ने लिखा कि हिंदी बोलने पर लोगों को “अनपढ़” समझा जाता है और इससे नौकरी के अवसर कम हो जाते हैं। उच्चतर माध्यमिक के 50 में से सिर्फ 10 छात्रों ने हिंदी को ‘राजभाषा’ लिखा, बाकी ने इसे ‘राष्ट्रभाषा’ बताया। कॉलेज के 50 में से 22 छात्र हिंदी की कोई कविता नहीं लिख पाए। छात्रों की राय स्कूल के छात्रों के लेख से पांच मुख्य बिंदु सामने आए— अधिकतर कॉलेज स्टूडेंट्स ने भी माना कि अंग्रेजी बोलने वालों को समाज में ज्यादा प्रतिष्ठा और अवसर मिलते हैं, यही कारण है कि घर वाले उन्हें अंग्रेजी माध्यम स्कूल भेजते हैं। कविता लिखने में भी कमजोरी उच्चतर माध्यमिक के 50 में से केवल 19 छात्र (38.4%) ही कविता लिख पाए। कॉलेज में यह आंकड़ा 27 (53%) रहा। हालांकि, जिन छात्रों ने कविता लिखी, उनमें भी कईयों को कवि का नाम याद नहीं था। विशेषज्ञों की राय हिंदी पढ़ाने वाली शिक्षिका किरण तिवारी ने कहा कि बच्चों का व्याकरण कमजोर है और वे हिंदी से दूर भाग रहे हैं। यह पूरी तरह बच्चों की गलती नहीं है। वे सोचते हिंदी में हैं, लेकिन अंग्रेजी सीखने का दबाव इतना बढ़ गया है कि वे हिंदी से कटते जा रहे हैं। शिक्षिका अनामिका तिवारी ने कहा कि हिंदी को पाठ्यक्रमों में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिससे बच्चे अपनी ही भाषा से दूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि व्हाट्सऐप जैसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत हिंदी लिखने की आदत ने भी बच्चों की शुद्ध हिंदी बिगाड़ दी है।
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