पश्चिम बंगाल जीत में छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की बड़ी भूमिका, 56 सीटों पर माइक्रो प्लानिंग से बदला समीकरण
देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के परिणामों को लेकर हो रही है। भाजपा की जीत के साथ अब चुनावी रणनीति पर भी फोकस बढ़ गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के नेताओं को चुनाव के दौरान बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उन्हें 56 विधानसभा सीटों पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर माइक्रो लेवल प्लानिंग तक का काम दिया गया था। कई सीटों पर उन्हें पूरी चुनावी कमान भी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने और वोटिंग पैटर्न को साधने में काम किया। छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय को इन 56 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका कार्य सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत बनाना था। चुनाव के दौरान उनकी रणनीति को अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, क्लस्टर स्तर पर भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। दुर्गापुर जिले के बर्धमान और दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्रों की कमान पूर्व मंत्री राजेश मूणत और वरिष्ठ नेता शिवरतन शर्मा को सौंपी गई थी। उनके साथ समन्वय की जिम्मेदारी भूपेंद्र सवन्नी को दी गई थी। अन्य नेताओं में नीलू शर्मा, अनुराग सिंहदेव, हरपाल सिंह भाम्भरा और विश्व विजय सिंह तोमर को भी अलग-अलग सीटों पर तैनात किया गया था। इन सभी को चुनावी प्लानिंग, कैंपेनिंग और बूथ मैनेजमेंट के लिए माइक्रो स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए थे। कोलकाता क्लस्टर में पार्टी ने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए विशेष टीम बनाई थी। इस टीम में भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को शामिल किया गया और उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया। इस टीम का नेतृत्व प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव और सौरभ सिंह कर रहे थे। रणनीति के तहत व्यापारी, डॉक्टर, सीए, प्रोफेसर, कलाकार, मजदूर, रिक्शा चालक और मछली विक्रेताओं सहित विभिन्न वर्गों तक अलग-अलग तरीके से संपर्क किया गया। इसके साथ ही उन स्थानीय नेताओं को भी सक्रिय करने की कोशिश की गई, जो पहले चुनाव हार चुके थे, लेकिन जिनका जनाधार अभी भी मौजूद था। चुनावी प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और सभाओं के समन्वय की जिम्मेदारी भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई थी। इसमें डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और टंकराम वर्मा शामिल थे, जिन्होंने रैली प्रबंधन और स्थानीय समन्वय का काम संभाला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई यह जिम्मेदारी संगठन में उनकी बढ़ती पकड़ और भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से उन्हें बूथ से लेकर क्लस्टर और माइक्रो लेवल तक जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें चुनावी प्रबंधन के लिए सक्षम माना गया।

