राज्य में नई जल दरें लागू, उद्योगों के लिए पानी हुआ महंगा

रायपुर। राज्य सरकार ने औद्योगिक उपयोग में आने वाले पानी की दरों में बढ़ोतरी करते हुए नई जल शुल्क नीति लागू कर दी है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें 2 फरवरी से प्रभावी हो चुकी हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला जल संरक्षण, राजस्व बढ़ाने और भू-जल के अत्यधिक दोहन पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। नई नीति के तहत उद्योगों को अब पानी के स्रोत और उसके उपयोग के प्रकार के आधार पर अलग-अलग शुल्क चुकाना होगा। यह व्यवस्था पानी से उत्पाद तैयार करने वाले उद्योगों के साथ-साथ थर्मल और जल विद्युत परियोजनाओं पर भी लागू होगी। पानी को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करने वालों पर ज्यादा बोझ नई दर संरचना में उन उद्योगों पर सबसे अधिक शुल्क तय किया गया है, जिनके लिए पानी कच्चा माल है। इसमें शामिल हैं— इन उद्योगों को सरकारी जलाशय से पानी लेने पर 300 रुपए प्रति घनमीटर और नहर से पानी लेने पर 360 रुपए प्रति घनमीटर शुल्क देना होगा।वहीं, प्राकृतिक या स्वयं विकसित जल स्रोतों से पानी लेने पर 150 रुपए प्रति घनमीटर की दर तय की गई है। कूलिंग और प्रोसेसिंग के लिए कम दरें जो उद्योग पानी का उपयोग केवल कूलिंग, धुलाई या प्रोसेसिंग के लिए करते हैं और जहां पानी अंतिम उत्पाद का हिस्सा नहीं बनता, उन्हें तुलनात्मक रूप से कम जल-कर देना होगा। जल विद्युत परियोजनाओं पर नई व्यवस्था सरकार ने 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाओं के लिए प्रति यूनिट उत्पादन पर शुल्क निर्धारित किया है। इसके साथ हर वर्ष एस्केलेशन चार्ज भी लागू होगा।25 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत न्यूनतम दर रखी गई है।इसके अलावा, जलाशयों की सतह या विभागीय भूमि पर लगने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाओं से 1000 रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष शुल्क वसूला जाएगा। अग्रिम भुगतान करने वालों को राहत नई नीति के अनुसार, जो उद्योग 5 से 10 साल का जल-कर एकमुश्त जमा कर देंगे, उनके लिए उस अवधि तक जल दरें स्थिर रहेंगी, भले ही आगे चलकर शुल्क बढ़ा दिया जाए। जिन उद्योगों ने जलाशय निर्माण के लिए अग्रिम जल-कर अंशदान नहीं किया है, उन्हें अनुबंध से पहले 1 करोड़ रुपए प्रति मिलियन घनमीटर की दर से एकमुश्त सुगमता शुल्क देना होगा। यह राशि न तो समायोज्य होगी और न ही वापस की जाएगी। भू-जल उपयोग पर सख्ती नई भू-जल प्रबंधन नीति के तहत, जहां सतही जल उपलब्ध है, वहां औद्योगिक उपयोग के लिए भू-जल अनुमति का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ईटीपी नहीं लगाने पर तीन गुना शुल्क राज्य सरकार ने साफ किया है कि जिन उद्योगों ने अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ETP) नहीं लगाया है या उसे पूरी क्षमता से संचालित नहीं कर रहे हैं, उनसे लागू जल-कर का तीन गुना शुल्क वसूला जाएगा। उद्योगों को अपने उपचारित जल का पुनः उपयोग करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यदि उसे संयंत्र से बाहर उपयोग या सप्लाई करना हो तो विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। माइनिंग पिट का पानी भी महंगा खनन कार्य से बने गड्ढों (माइन पिट) में जमा पानी का औद्योगिक इस्तेमाल करने पर सामान्य दर से दोगुना शुल्क लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस तरह के उपयोग को हतोत्साहित करना है।

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