सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू, लेकिन व्यवस्था अधूरी: 4 रंग के डस्टबिन नियम पर अमल नहीं

छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी अधूरी दिखाई दे रही है। नए नियम के तहत अब घरों, दुकानों और कार्यालयों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग डस्टबिन में रखना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और विशेष/सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रंग के डिब्बों में संग्रहित करना होगा। नियम का पालन न करने पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, लेकिन अब तक जुर्माने की राशि तय नहीं की गई है। नए नियम के अनुसार गीले कचरे के लिए हरे रंग का डस्टबिन, सूखे कचरे के लिए नीला, खतरनाक कचरे के लिए लाल और विशेष कचरे के लिए काला डिब्बा निर्धारित किया गया है। गीले कचरे में भोजन के अवशेष, सब्जी-फल के छिलके और बगीचे का कचरा शामिल होता है, जिससे कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसी सामग्री आती है, जिन्हें रीसाइक्लिंग के लिए अलग रखा जाता है। खतरनाक कचरे में बैटरी, केमिकल, पेंट, डायपर और बल्ब जैसे सामान शामिल हैं, जबकि विशेष कचरे में मास्क, ग्लव्स और मेडिकल वेस्ट जैसी सामग्री आती है। हालांकि नियम कागजों में लागू हो चुके हैं, लेकिन शहरों में इसकी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है। रायपुर में करीब 250 कचरा गाड़ियों में से केवल 100 गाड़ियों में ही चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था है, जबकि बाकी अभी भी दो कंपार्टमेंट वाली ही हैं। अन्य जिलों में स्थिति और भी कमजोर बताई जा रही है। कई नगरीय निकायों में न तो नई गाड़ियां पूरी तरह उपलब्ध हैं और न ही कचरा संग्रहण प्रणाली में बदलाव किया गया है। इस कारण पुराने तरीके से ही कचरा उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संसाधनों की कमी और जुर्माने की स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण सख्ती नहीं हो पा रही है। राज्य में 27 जनवरी को अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन उसके बाद भी आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि सभी निकायों को चार कंपार्टमेंट वाली गाड़ियां अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और जुर्माने की राशि तय करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

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