CG News: वक्फ अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के दबाव में केंद्र सरकार फिर बैकफुट पर, पहले भी देशद्रोह और 370 पर झुकी
वक्फ से पहले देशद्रोह, 370 पर भी सुप्रीम कोर्ट में झुक चुकी है सरकार केंद्र सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के सामने बैकफुट पर नजर आई है। वक्फ अधिनियम 2025 के दो विवादास्पद प्रावधान—‘वक्फ बाय यूज’ और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति—को लागू न करने का आश्वासन देकर सरकार ने एक और संभावित न्यायिक टकराव को टालने की कोशिश की है। नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के सामने बैकफुट पर नजर आई है। वक्फ अधिनियम 2025 के दो विवादास्पद प्रावधान—‘वक्फ बाय यूज’ और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति—को लागू न करने का आश्वासन देकर सरकार ने एक और संभावित न्यायिक टकराव को टालने की कोशिश की है। गुरुवार को हुई सुनवाई में जब सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे, ने “वक्फ बाय यूज” के संवैधानिक प्रभावों पर सवाल उठाया, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि इन प्रावधानों को लागू नहीं किया जाएगा और राज्यों को गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति की अनुमति नहीं दी जाएगी। मझौता (सितंबर 2023) 370 हटाने के मामले में जब कोर्ट ने पूछा कि क्या संसद को किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का अधिकार है, तब केंद्र ने आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, जिससे कोर्ट ने संवैधानिक सवाल पर फैसला देने से परहेज किया। दिल्ली दंगे और साफूरा जरगर की रिहाई (जून 2020) दिल्ली दंगों में आरोपी साफूरा जरगर की जमानत पर केंद्र ने कोर्ट में मानवीय आधार पर विरोध न करने की बात कही, जो सरकार की रणनीतिक नरमी का संकेत था। न्यायिक दबाव में रणनीतिक नरमी इन सभी मामलों में स्पष्ट है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के उल्लंघन या अधिकारों के हनन की आशंका जताई, तो केंद्र सरकार ने संभावित प्रतिकूल फैसलों से बचने के लिए रणनीतिक रूप से अपने रुख में नरमी बरती। यह प्रवृत्ति जहां सरकार की कानूनी रणनीति को दर्शाती है, वहीं सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक निगरानी की शक्ति को भी रेखांकित करती है।

