रायगढ़ में कोयला खदान की जनसुनवाई टली, ग्रामीणों के विरोध से झुका जिंदल प्रबंधन
3100 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण पर लगा ब्रेक, कंपनी ने आवेदन वापस लेने की मांग की छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के लिए प्रस्तावित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक की जनसुनवाई को लेकर उठा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ग्रामीणों के तीखे और लगातार विरोध के चलते कंपनी को पीछे हटना पड़ा है। हालात ऐसे बने कि जिंदल प्रबंधन ने जनसुनवाई के लिए दिया गया आवेदन वापस लेने की मांग प्रशासन से कर दी है। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। इसके बाद से ही प्रभावित गांवों के लोग आंदोलन पर डटे रहे, जिसका सीधा असर कंपनी के फैसले पर पड़ा। 14 गांवों की 3100 हेक्टेयर जमीन होनी थी अधिग्रहित यदि गारे पेलमा सेक्टर-1 की जनसुनवाई पूरी हो जाती, तो JPL को 14 गांवों की करीब 3100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करना होता। इसके बदले कंपनी की ओर से प्रति एकड़ 62 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव था। इस परियोजना से धौराभांठा, लिबरा, झिकाबहाल, बागबाड़ी, बुड़िया, समकेरा, झरना, खुरूसलेंगा, लमडांड, बिजना, टांगरघाट, आमगांव, रावनगुड़ार और तिलाईपारा गांव प्रभावित होने वाले थे। पहले भी निरस्तीकरण की मांग कर चुके थे ग्रामीण ग्रामीणों ने जनसुनवाई रद्द कराने के लिए पहले भी आंदोलन किया था। 14 अक्टूबर को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और रात सड़क पर ही बिताई थी। इसके बाद प्रशासन ने सुनवाई स्थगित कर दी थी। दूसरी बार 8 दिसंबर को धौराभांठा के स्कूल मैदान में जनसुनवाई तय की गई, लेकिन इस दौरान भी ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने फर्जी तरीके से जनसुनवाई पूरी दिखा दी। पुलिस-ग्रामीण झड़प के बाद बढ़ा आंदोलन इसके बाद से ग्रामीण लिबरा के सीएचपी चौक पर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे थे। 27 दिसंबर को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। लगातार आंदोलन और बढ़ते दबाव के बीच 29 दिसंबर को JPL ने प्रशासन को पत्र लिखकर जनसुनवाई के लिए किया गया आवेदन वापस लेने की मांग की। वहीं घरघोड़ा एसडीएम दुर्गा प्रसाद ने बताया कि जनसुनवाई निरस्त करने की प्रक्रिया प्रशासन स्तर पर शुरू कर दी गई है। पुलिस कार्रवाई पर लगे गंभीर आरोप ग्रामीणों के समर्थन में कांग्रेस ने जांच टीम गठित की थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज 29 दिसंबर को धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने जबरन धरना स्थल के पास से वाहनों को हटाया और 40 से अधिक महिलाओं व पुरुषों को गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने बर्बरता पूर्वक कार्रवाई की, जिससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने जवाबी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है, जिसने जानबूझकर ग्रामीणों को उकसाने का काम किया।
रायगढ़ में कोयला खदान की जनसुनवाई टली, ग्रामीणों के विरोध से झुका जिंदल प्रबंधन Read Post »
Chhattisgarh, Raigarh, Top News
