100 किलो से ज्यादा कचरा पर नया नियम: कॉलोनियों को खुद करनी होगी प्रोसेसिंग, नहीं तो लगेगा शुल्क

राजधानी रायपुर में अब कचरा प्रबंधन को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। यदि किसी कॉलोनी, सोसायटी या संस्थान से प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा निकलता है, तो उसे वहीं पर प्रोसेस करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम कचरे के निपटान के लिए अलग से शुल्क वसूलेगा। यह व्यवस्था नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के तहत लागू की गई है, जो अप्रैल 2026 से देशभर में प्रभावी हो चुके हैं। हालांकि, अभी नगर निकायों में इस नियम को लागू करने के लिए पूरी व्यवस्था तैयार नहीं है, लेकिन सर्वे और बैठकों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नए नियमों के अनुसार अब कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग एकत्र किया जाएगा—गीला, सूखा, सैनेटरी और खतरनाक कचरा। नियम लागू होने से पहले सभी कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स, अस्पतालों, मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ईपीआर (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसमें कचरे की मात्रा, प्रोसेसिंग की विधि और नियमों के पालन की जानकारी देनी होगी, जिसे नगर निगम सत्यापित कर प्रमाण पत्र जारी करेगा। आने वाले समय में कॉलोनियों को अपने स्तर पर कचरा प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी होगी। गीले कचरे को कंपोस्ट या बायोगैस में बदला जा सकता है, जबकि सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 500 ग्राम कचरा उत्पन्न करता है। इस हिसाब से 5 लोगों के एक परिवार से रोजाना करीब 3 किलो कचरा निकलता है। यदि किसी कॉलोनी में 50 परिवार हैं, तो वहां प्रतिदिन लगभग 150 किलो कचरा उत्पन्न होगा, जिससे वह ‘बल्क वेस्ट प्रोड्यूसर’ की श्रेणी में आ जाएगी। ऐसी स्थिति में यदि कॉलोनी खुद कचरा प्रोसेस नहीं करती है, तो नगर निगम प्रति टन के हिसाब से शुल्क वसूलेगा। राजधानी में लगभग 1500 कॉलोनियां, अपार्टमेंट और कवर्ड कैंपस इस नियम के दायरे में आएंगे, साथ ही कई होटल और व्यावसायिक संस्थान भी प्रभावित होंगे। नियमों को लागू करने के लिए नगर निगम द्वारा वार्डवार सूची तैयार की जा रही है, ताकि बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान कर उन्हें कचरा प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा सके।

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