होली पर घर वापसी का दबाव: लंबी दूरी की ट्रेनों में ‘नो रूम’, स्पेशल ट्रेनें भी फुल
होली से पहले घर लौटने वालों की भारी भीड़ के चलते जोन से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में जबरदस्त दबाव है। स्थिति यह है कि त्योहार से पहले ही नहीं, बल्कि होली के एक सप्ताह बाद तक अधिकांश ट्रेनों में सीटें पूरी तरह भरी हुई हैं। रिजर्वेशन कोच में भी यात्रियों को बैठने की जगह नहीं मिल रही, जबकि स्लीपर बोगियां जनरल डिब्बों जैसी नजर आ रही हैं। यात्री फर्श पर लेटकर, दरवाजों के पास बैठकर और शौचालय के आसपास जगह बनाकर सफर करने को मजबूर हैं। फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के दूसरे सप्ताह तक कई प्रमुख ट्रेनों में एसी और स्लीपर—दोनों श्रेणियों में लंबी वेटिंग चल रही है, जिससे कन्फर्म टिकट पाना बेहद कठिन हो गया है। इन ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव स्पेशल ट्रेनें भी राहत नहीं दे रहीं रेलवे ने होली पर 14 फेरों के लिए 5 स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है—दुर्ग–निजामुद्दीन, गोंदिया–छपरा, गोंदिया–पटना, बिलासपुर–चर्लापल्ली और दुर्ग–मधुबनी रूट पर अतिरिक्त फेरे चल रहे हैं। इसके बावजूद अधिकांश स्पेशल ट्रेनों में भी वेटिंग जारी है। टिकट विंडो खुलने के कुछ ही समय बाद प्रतीक्षा सूची शुरू हो जाती है। साथ ही, रेलवे बोर्ड द्वारा तिरूपति–रक्सौल, हटिया–दुर्ग और पटना–सिकंदराबाद रूट की 7 ट्रेनों के 56 फेरे संचालित किए जा रहे हैं, जिनका बिलासपुर में स्टॉपेज है। यहां भी कन्फर्म सीट मिलना चुनौती बना हुआ है। कोच के भीतर बदतर हालात बुधवार रात एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में यात्रियों की भीड़ चरम पर रही। फर्श से लेकर गेट तक लोग लेटे मिले, पैर रखने तक की जगह नहीं थी। कई यात्रियों ने टीटीई से कन्फर्म बर्थ की मांग की, लेकिन राहत नहीं मिली। शौचालय तक जाने के लिए सोए यात्रियों के ऊपर से गुजरना पड़ा, जबकि परिवारों को अपनी बर्थ तक पहुंचने के लिए सामान खिसकाकर रास्ता बनाना पड़ा। कुल मिलाकर, होली के मौके पर घर वापसी की भीड़ ने रेल सफर को बेहद कठिन बना दिया है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाएं और वैकल्पिक तिथियों पर टिकट तलाशें।
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