दो साल का रिपोर्ट कार्ड: पीक आवर्स में बिजली बचाने पर मिलेगी छूट, रायपुर-बिलासपुर में लाइनें होंगी अंडरग्राउंड
राज्य के ऊर्जा विभाग ने अपने दो साल के कामकाज का ब्यौरा पेश करते हुए बिजली प्रबंधन से जुड़ी कई अहम योजनाओं की जानकारी दी। विभाग के अनुसार सुबह 5 से 8 बजे और शाम 5 से रात 11 बजे तक बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। इन पीक आवर्स में आपूर्ति का दबाव बढ़ने से पावर कंपनियों को निजी स्रोतों से 8–10 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि इस अतिरिक्त खर्च को कम करने के लिए “टाइम ऑफ डे (TOD)” मॉडल लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को पीक समय में खपत कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि उपभोक्ता निर्धारित समय में उपयोग घटाते हैं तो उन्हें मासिक बिल में 2 से 3 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। विभाग उपभोक्ताओं को मैसेज और जागरूकता अभियानों के माध्यम से भारी खपत वाले उपकरण—जैसे वॉशिंग मशीन और प्रेस—का उपयोग पीक समय में टालने की सलाह देगा। सौर ऊर्जा उत्पादन सुबह-शाम कम होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ता है। इसी को संतुलित करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जिनसे हर आधे घंटे और प्रतिदिन की खपत की जानकारी मिल रही है। उपभोक्ता “मोर बिजली” एप के जरिए अपनी बिजली खपत की निगरानी कर सकते हैं और अनावश्यक उपयोग कम कर सकते हैं। रायपुर और बिलासपुर में अंडरग्राउंड होंगी बिजली लाइनें राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में बिजली लाइनों को भूमिगत करने की बड़ी योजना बनाई गई है। रायपुर में 5394 किमी लाइन को अंडरग्राउंड करने पर लगभग 7600 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बिलासपुर में 2150 किमी लाइन को करीब 3100 करोड़ रुपये में भूमिगत किया जाएगा। रायपुर के नयापारा में 18 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला जीआईएस आधारित 33 केवी सबस्टेशन स्थापित किया जाएगा। साथ ही 2027-28 तक 2000 मेगावॉट क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की योजना है, जिसमें से 1260 मेगावॉट के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। इससे दिन में सौर ऊर्जा से बनी बिजली का उपयोग रात में किया जा सकेगा। 524 गांवों में ग्रिड विस्तार के जरिए बिजली पहुंचाई जाएगी। कोरबा में राखड़ बांध पर 32 मेगावॉट की सौर परियोजना (बैटरी स्टोरेज सहित) स्थापित करने की भी तैयारी है। एनटीपीसी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं ऊर्जा विभाग ने बताया कि करीब 2000 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए NTPC Green Energy Limited और राज्य की पावर जनरेशन कंपनी के साथ संयुक्त कंपनी बनाई गई है। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों के सहयोग से 32100 मेगावॉट क्षमता के बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए हैं। ऊर्जा सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में विकसित करना लक्ष्य है। इस अवसर पर वितरण कंपनी के एमडी भीम सिंह, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला और जनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

