तुर्की की पोल खुली: पाकिस्तान को भारत पर हमले में दी थी बड़ी मदद, एयरस्ट्राइक में मारे गए तुर्की ऑपरेटर्स
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस एयरस्ट्राइक में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। जवाबी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों को ड्रोन्स और मिसाइलों से निशाना बनाया, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है—पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए तुर्की से मदद ली थी। सूत्रों के अनुसार, तुर्की ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन उपलब्ध कराए और उन्हें ऑपरेट करने के लिए अपने सैन्य विशेषज्ञ भी भेजे। ड्रोन अटैक की योजना और क्रियान्वयन में तुर्की के सैन्य सलाहकारों की सीधी भागीदारी थी। पाकिस्तानी कार्रवाई से पहले तुर्की का एक युद्धपोत कराची बंदरगाह पर भी पहुंचा था, जिसे लेकर पाक मीडिया ने दावा किया कि उसमें हथियार थे। हालांकि, तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने इसे झूठा बताया था। अब ताजा रिपोर्ट्स से यह पुष्टि हो गई है कि तुर्की ने पाकिस्तान को हथियार और सैन्य सहायता प्रदान की थी। भारत की जवाबी कार्रवाई में सिर्फ पाकिस्तानी सैनिक ही नहीं, बल्कि तुर्की के दो ड्रोन ऑपरेटर्स भी मारे गए। इसके अलावा पाकिस्तान के कई सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच एक और गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। भारत की एयरस्ट्राइक से पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुशाफ एयरबेस और किराना हिल्स इलाके में परमाणु विकिरण फैलने की खबरें हैं। किराना हिल्स में ही पाकिस्तान की परमाणु हथियार भंडारण सुविधा मौजूद है। विकिरण खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने ऊर्जा विभाग की परमाणु आपातकालीन टीम का विमान मौके पर भेजा है, ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके अलावा मिस्र ने भी बोरोन नामक रसायन, जो रेडिएशन को कम करने में इस्तेमाल होता है, विमान से पाकिस्तान भेजा है। हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर न ही पाकिस्तान और न ही अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है।

