बिना चीर-फाड़ हार्ट सर्जरी से बुजुर्ग को मिला नया जीवन, स्टेंट से बनी ‘चिमनी’ ने बचाई जान
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में डॉक्टरों ने बिना ओपन हार्ट सर्जरी किए एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई। मरीज के हार्ट की बंद नसों में स्टेंट डालकर ‘चिमनी तकनीक’ अपनाई गई और ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन (TAVI) के जरिए नया वॉल्व लगाया गया। यह जटिल प्रोसीजर 2 जनवरी को किया गया, जिसकी अनुमानित लागत करीब 18 लाख रुपए है। यह संपूर्ण इलाज मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया है। ओपन हार्ट सर्जरी थी बेहद जोखिम भरी रायपुर निवासी बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रही थीं। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वॉल्व पूरी तरह कैल्शियम से सख्त हो चुका था, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता घटकर सिर्फ 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी जानलेवा साबित हो सकती थी। ऐसे में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने बिना चीर-फाड़, पैर की नस के जरिए वॉल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। ‘चिमनी तकनीक’ से टला बड़ा खतरा मरीज की नसें पतली और कैल्शियम युक्त होने के कारण वॉल्व को हार्ट तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। इसके अलावा जन्मजात संरचनात्मक समस्या के चलते कोरोनरी धमनियां वॉल्व के बेहद करीब थीं, जिससे प्रोसीजर के दौरान धमनियों के बंद होने का खतरा बना हुआ था। डॉक्टरों ने एहतियातन दोनों कोरोनरी धमनियों में पहले स्टेंट डालकर ‘चिमनी स्ट्रक्चर’ तैयार किया, ताकि वॉल्व डालते समय ब्लड फ्लो बाधित न हो। अंतिम चरण में बाएं पैर की नस में अचानक ब्लॉकेज हो गया, जिसे दाहिने पैर से तुरंत बलून एंजियोप्लास्टी कर ठीक किया गया। चार घंटे के ऑपरेशन के बाद चमत्कारी सुधार करीब 4 घंटे तक चली इस अत्यंत जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वॉल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया। वहीं हार्ट की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। हृदय की धड़कन स्थिर रही और दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य पाया गया। कार्डियोलॉजी विभाग की बड़ी उपलब्धि मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग में 2600 से अधिक जटिल हार्ट प्रोसीजर किए गए हैं। वर्ष 2009 में जहां यह विभाग मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ था, वहीं आज यह सालाना 2000 से अधिक हार्ट प्रोसीजर कर रहा है। प्रोसीजर टीम में ये रहे शामिल इस सफल सर्जरी में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, जूनियर रेजिडेंट डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव, डॉ. प्रिस, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. बालस्वरूप साहू, डॉ. संकल्प दीवान, कैथ लैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद, स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र और एमएसडब्ल्यू खोगेंद्र साहू शामिल रहे।

