कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल का हमला, ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर उठाए सवाल
रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा से मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूतों के लखमा और अन्य लोगों को परेशान किया जा रहा है और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि फिलहाल कवासी लखमा का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें जेल में जरूरी दवाइयां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात के दौरान लखमा को सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की थी। इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा जांच कर इलाज कराया गया। जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप भूपेश बघेल ने कहा कि सबसे गंभीर विषय यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस और तथ्यात्मक सबूतों का अभाव है, इसके बावजूद लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे केवल परेशान करने और दबाव बनाने की रणनीति बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत के निर्देश पर अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, लेकिन आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रोडक्शन वारंट जारी कर कवासी लखमा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है। ‘एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर समझ रही हैं’ भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कुछ जांच एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर मानने लगी हैं, जो लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा, तो यह न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर तंज डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं के मुंह से अनजाने में सच्चाई निकल रही है। उन्होंने कहा कि अरुण साव, केदार कश्यप और रामविचार नेताम जैसे नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि कवासी लखमा एक निर्दोष आदिवासी नेता हैं, जो पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब खुद भाजपा नेता उन्हें निर्दोष मान रहे हैं, तो फिर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई आखिर किस आधार पर जारी है। आदिवासी राजनीति से जुड़ा मामला राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कवासी लखमा का मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भूपेश बघेल के लगातार आक्रामक बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बना सकती है। आदिवासी समाज में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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Bhilai / Durg, Bilaspur, Chhattisgarh, Political, Raipur
