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रायपुर में सड़क किनारे मेटाडोर दुकानदारों का होगा सत्यापन, बिना पहचान वालों पर कार्रवाई की तैयारी

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में सड़क किनारे और मेटाडोर व अन्य वाहनों में सामान बेचने वाले दुकानदारों का अब व्यापक सत्यापन किया जाएगा। नगर निगम ने ऐसे सभी व्यापारियों का रिकॉर्ड तैयार करने का निर्णय लिया है ताकि शहर में अवैध या बिना पहचान वाले कारोबार पर नियंत्रण लगाया जा सके। इस संबंध में महापौर Minel Choubey ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि टाउन प्लानिंग विभाग की टीम शहरभर में अभियान चलाकर ऐसे सभी दुकानदारों की पहचान और पंजीयन सुनिश्चित करे। इसमें दुकानदार का नाम, स्थायी पता, पहचान पत्र और रायपुर में रहने की स्थिति दर्ज की जाएगी। नगर निगम ने साफ किया है कि जिन लोगों के पास वैध पहचान पत्र और निगम में पंजीयन नहीं होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए वार्ड और जोन स्तर पर सर्वे शुरू किया जाएगा और आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों की जांच की जाएगी। महापौर ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय व्यापारियों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग वैध रूप से व्यापार कर रहे हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, लेकिन बिना पहचान के कारोबार करने वालों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। नगर निगम ने यह भी बताया कि सड़क किनारे और वाहनों से होने वाले व्यापार की वजह से कई जगह ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होती है। इस अभियान के जरिए यातायात व्यवस्था सुधारने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी नगर निगम को दें ताकि शहर में व्यवस्था और सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके।

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बिरगांव नगर निगम पर पक्षपात का आरोप: छोटे ठेले वालों पर सख्ती, बड़े व्यापारियों को खुला संरक्षण

बिरगांव (रायपुर)। बिरगांव नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निगम जहां छोटे और गरीब ठेले–रेहड़ी लगाने वालों पर सख्ती दिखाते हुए उन्हें नोटिस थमा रहा है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं बड़े व्यापारियों को खुलेआम सड़क और फुटपाथ घेरने की छूट दी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई छोटे ठेले वाले सिर्फ अपने परिवार का पेट पालने के लिए सड़क किनारे या फुटपाथ पर अस्थायी ठेला लगाते हैं, लेकिन नगर निगम की टीम उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती है। बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उनका ठेला हटा दिया जाता है, जिससे उनके सामने रोज़ी–रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, बिरगांव के सबसे बड़े सुपरमार्ट Ashoka Mart पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अशोका मार्ट द्वारा पुराने कपड़ों का स्टॉक फुटपाथ पर लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं, दुकान के सामने आधी सड़क पर बाइक पार्किंग कर दी जाती है, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस अव्यवस्था के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ पूरी तरह बंद हो चुका है और सड़क पर भीड़ व जाम आम बात हो गई है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या नियम सिर्फ गरीब ठेले वालों के लिए हैं? अगर सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण गलत है, तो फिर बड़े व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? इस कथित दोहरे रवैये को लेकर अब बिरगांव नगर निगम की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नियम सभी के लिए समान रूप से लागू किए जाएं, चाहे वह छोटा ठेले वाला हो या बड़ा व्यापारी, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू रहे और आम जनता को राहत मिल सके।

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Birgaon, Chhattisgarh, Raipur
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