आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कब तक लोग परेशानी झेलेंगे, स्कूल-कोर्ट परिसर में इनकी जरूरत क्या?

आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने सवाल उठाया कि कुत्तों की वजह से आम लोगों को आखिर कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी। कोर्ट ने साफ किया कि उसका निर्देश सड़कों पर नहीं, बल्कि केवल संस्थागत परिसरों जैसे स्कूल, अस्पताल और अदालतों के लिए है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है। ऐसे में यह समझ से परे है कि स्कूलों, अस्पतालों और कोर्ट कैंपस के भीतर आवारा कुत्तों की मौजूदगी क्यों जरूरी मानी जा रही है और इन्हें वहां से हटाने पर आपत्ति क्यों की जा रही है। बुधवार को यह सुनवाई करीब ढाई घंटे तक चली। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे फिर से शुरू होगी। सुनवाई के दौरान सामने आईं अहम बातें अदालत का स्पष्ट रुख सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि उसका आदेश केवल संस्थागत क्षेत्रों तक सीमित है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि नियमों का सही ढंग से पालन नहीं हुआ, तो इस मुद्दे पर और सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

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