शंकराचार्य निश्चलानंद बोले- तामझाम और अव्यवस्था के कारण रोके गए अविमुक्तेश्वरानंद, हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं
दुर्ग: शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग पहुंचे और यहां उन्होंने गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य के बारे में सफाई दी। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि तामझाम और अव्यवस्था के चलते प्रशासन ने रोक लगाई थी। स्वामी निश्चलानंद ने जोर देकर कहा कि मामले को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका कहना था कि हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शांति, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देता है। दुर्ग में हिंदू राष्ट्र अभियान और प्रवचन स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत वे दुर्ग आए हैं। यहां वे भक्तों से मिलेंगे और आध्यात्मिक ज्ञान पर प्रवचन देंगे। यह कार्यक्रम दुर्ग जिले के अंडा गांव में आयोजित किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज माघ मेला छोड़ना स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला बीच में ही छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि “मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। श्रद्धा के साथ आए थे, लेकिन घटना ने पूरी उम्मीद तोड़ दी।” उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित तरीके से पालकी में स्नान कराने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि दिल में दुख और गुस्सा होने पर पवित्र जल भी शांति नहीं दे सकता। अब उनका मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां वकील गौरव द्विवेदी ने CBI जांच की मांग करते हुए चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजा है। विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया था। शिष्य पालकी ले गए और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया, और एक साधु को चौकी में पीटा गया। शंकराचार्य नाराज हो गए और अपने समर्थकों को छुड़ाने पर अड़े रहे। पालकी को संगम से 1 किमी दूर तक ले जाया गया और यह क्षत्रप टूट गया। इसके बाद शंकराचार्य संगम के तट पर धरने पर बैठे रहे और स्नान नहीं कर पाए। प्रशासन और संत समाज की प्रतिक्रिया इस विवाद ने संत समाज को दो हिस्सों में बाँट दिया। हालांकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में रहे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। इस विवाद के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया और 24 घंटे बाद अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने भी इस्तीफा दे दिया।

