एक कमरे में दो-दो कक्षाएं: अलमारी से बना ऑफिस, गुरुनानक प्राथमिक शाला की बदहाल व्यवस्था पर सवाल
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित गुरुनानक प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी सामने आई है। स्कूल पिछले चार वर्षों से पं. मदन मोहन मालवीय प्राथमिक शाला परिसर में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है, जहां सिर्फ तीन कमरों में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। कमरों की कमी के कारण एक ही कक्षा में दो-दो कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि स्कूल में न तो हेडमास्टर के बैठने के लिए अलग कमरा है और न ही कोई स्टाफ रूम। मजबूरी में शिक्षकों ने एक अलमारी लगाकर उसी कक्षा में पार्टिशन बनाकर कार्यालय तैयार किया है। अलमारी के एक तरफ ऑफिस का काम चलता है, जबकि दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई होती है। गुरुनानक प्राथमिक शाला को दीपक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर में शिफ्ट किया गया था। यहां पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए केवल तीन कमरे ही उपलब्ध कराए गए। सीमित संसाधनों में स्कूल का संचालन करना शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। हेडमास्टर रतिदास सिरमौर ने बताया कि स्कूल पहले अपने भवन में संचालित होता था, लेकिन एक छोटा छज्जा गिरने के बाद भवन की मरम्मत कराने के बजाय स्कूल को तत्काल खाली करने का आदेश दे दिया गया। इसके बाद से पिछले चार सालों से स्कूल इसी अस्थायी व्यवस्था में चल रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे पैदल आते हैं। उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए व्यस्त सड़क पार करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति असुरक्षित है, लेकिन विकल्प न होने के कारण वे मजबूर हैं। इसके अलावा स्कूल के ठीक पास स्थित अन्य विद्यालय में माइक सिस्टम से पढ़ाई कराई जाती है, जिसकी तेज आवाज से गुरुनानक प्राथमिक शाला के छात्रों की पढ़ाई बार-बार बाधित होती है। शिक्षकों का कहना है कि शोर के कारण बच्चों का ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। हेडमास्टर ने अक्टूबर 2025 में स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर नई भवन व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की मांग की थी, लेकिन अब तक न कोई जवाब मिला है और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया है। स्कूल में कुल तीन स्टाफ सदस्य पदस्थ हैं। हेडमास्टर स्वयं तीसरी कक्षा पढ़ाते हैं, एक शिक्षक चौथी और पांचवीं कक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि एक शिक्षिका पहली और दूसरी कक्षा को एक साथ पढ़ाती हैं। इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि संबंधित प्रिंसिपल को कमरों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

