5वीं-8वीं की परीक्षा पर सवाल: घटिया पेपर से जूझे 7 लाख छात्र, लिखते ही फट रहीं कॉपियां
प्रदेश में बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षाएं अव्यवस्थाओं के कारण विवादों में आ गई हैं। राज्य स्तर से भेजे गए प्रश्नपत्र-सह-उत्तरपुस्तिका की गुणवत्ता बेहद खराब होने से लाखों विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा। कागज इतना पतला बताया जा रहा है कि पेन से लिखते ही स्याही दूसरी तरफ दिखने लगती है और हल्का दबाव पड़ते ही पन्ने फट जा रहे हैं। गणित जैसे विषय में रफ वर्क के लिए अलग जगह नहीं दी गई, जबकि सीमित पन्नों में कई प्रश्न शामिल कर दिए गए। कई छात्रों को उत्तर लिखने में कठिनाई हुई। कुछ केंद्रों पर प्रश्न अधूरे या गायब होने की शिकायत भी सामने आई, वहीं रेखा खींचते समय कागज फटने की घटनाएं भी बताई जा रही हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। इस परीक्षा में प्रदेशभर के करीब 7 लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा शुल्क भी निर्धारित है—कक्षा 5वीं के लिए 55 रुपये और 8वीं के लिए 60 रुपये प्रति छात्र। निजी स्कूलों में यह शुल्क अभिभावक देते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में खर्च शिक्षा विभाग उठाता है। प्रश्नपत्र, परीक्षा संचालन, कॉपी जांच और परिणाम प्रक्रिया पर कुल मिलाकर लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा सामग्री में कई तकनीकी कमियां भी सामने आईं, जैसे पर्यवेक्षक और छात्रों के हस्ताक्षर के लिए स्थान का अभाव तथा उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त जगह न होना। विशेषज्ञों के अनुसार प्रश्नपत्र के लिए सामान्यतः 60 से 80 GSM और उत्तरपुस्तिका के लिए कम से कम 80 GSM कागज का उपयोग होना चाहिए, लेकिन इस परीक्षा में उपयोग किए गए कागज की गुणवत्ता इससे काफी कम बताई जा रही है। कम GSM वाले कागज में स्याही आर-पार दिखती है और कागज जल्दी फट जाता है। इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली और शिक्षा विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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