रायपुर साहित्य उत्सव में हरिवंश ने उठाए देश की प्रगति और साहित्य की भूमिका पर सवाल
रायपुर। नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिन के साहित्य उत्सव का शुभारंभ हुआ, जिसमें पूर्व पत्रकार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने देश की आर्थिक और साहित्यिक प्रगति पर गहरा सवाल उठाया। उन्होंने मंच से उपस्थित साहित्यकारों से पूछा कि क्या साहित्य ने 2014 के बाद देश की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था के निर्माण और उसकी दिशा को सही तरीके से देखा और समझा। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए हरिवंश ने कहा कि हमारी संस्कृति और इतिहास में साहित्य ने हमेशा क्रांतियों और जन चेतना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश पर बाहरी आक्रमणकारी हावी होने की स्थिति में थे, तब संत साहित्य ने हमारी चेतना को बचाया। राजनीति नहीं, बल्कि साहित्य वह माध्यम है जो मनुष्य के मन और मस्तिष्क दोनों को बदल सकता है। हरिवंश ने यह भी चिंता व्यक्त की कि 1980 के दशक तक भारत अपने पड़ोसी देश से कई मोर्चों पर आगे था, लेकिन आज वह हमसे पांच गुना आगे है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारी राजनीति और साहित्यकार इस बदलाव को समय पर नहीं समझ पाए। “पड़ोसी ने स्वतंत्रता के बाद अगले सौ साल का सपना देखा, जबकि हमने यह सपना 2014 के बाद देखा। क्या यह हमारे पहले के लोगों का फर्ज नहीं था?” उन्होंने पूछा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता संग्राम और साहित्यकारों के योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने विष और अमृत दोनों अनुभव किए, और उनके बलिदान से आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत मिला। कार्यक्रम में अभिनेता मनोज जोशी, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति कुमुद शर्मा, लेखक अनंत विजय, लेखक-विचारक सुशील त्रिवेदी और छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा भी मौजूद रहे। साहित्य उत्सव ने न केवल देश की प्रगति पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी याद दिलाया कि साहित्य की दृष्टि से सामाजिक और आर्थिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाना कितना महत्वपूर्ण है।
रायपुर साहित्य उत्सव में हरिवंश ने उठाए देश की प्रगति और साहित्य की भूमिका पर सवाल Read Post »
Chhattisgarh, Raipur
