छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक रेप पीड़िता के परिवार को पंचायत के फैसले के बाद समाज से अलग कर दिया गया है। पंचायत ने परिवार पर कई अपमानजनक शर्तें भी रखी हैं, जिनकी वजह से मामला चर्चा में आ गया है।
पंचायत के सरपंच जवाहिर लाल का कहना है कि यदि पीड़िता का परिवार समाज में वापस शामिल होना चाहता है, तो उन्हें अपनी गलती स्वीकार करनी होगी। इसके लिए पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उसी पानी से नहाने जैसी शर्त रखी गई है। सरपंच का कहना है कि यह गांव के पूर्वजों के बनाए नियम हैं और इन्हें मानने के बाद ही परिवार को समाज में दोबारा जगह दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, युवक और युवती एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले करीब एक साल से उनके बीच संबंध थे। युवती का आरोप है कि युवक ने शादी का वादा कर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इसी दौरान युवती गर्भवती हो गई। जब उसने शादी की बात कही तो युवक लगातार टालता रहा। सात महीने की गर्भावस्था होने पर जब युवती ने शादी का दबाव बढ़ाया, तो युवक ने साफ तौर पर शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती ने अपने परिवार को पूरी बात बताई और थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज किया और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस कार्रवाई के बाद गांव में पंचायत की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में पीड़िता के परिवार के साथ उसके ममेरे भाई के परिवार को भी 12 साल के लिए समाज से बहिष्कृत करने का फैसला सुनाया गया। सरपंच का आरोप है कि युवती युवक को झूठे मामले में फंसा रही है और उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि गर्भ में पल रहा बच्चा किसका है। इसी आधार पर पंचायत ने यह कठोर फैसला लिया। पंचायत के आदेश के अनुसार, बहिष्कृत परिवार अब गांव के सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकेंगे। साथ ही गांव के लोग भी उनके किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। इसके अलावा पंचायत ने दंड के रूप में पूरे समाज को बकरा-भात और शराब खिलाने-पिलाने की शर्त भी रखी है। इस मामले में प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

