रायपुर में नक्सलियों का शहरी नेटवर्क बेनकाब: मजदूर बनकर रहते थे, पेनड्राइव-कोडवर्ड से भेजते थे सूचना
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) ने 9 आरोपियों के खिलाफ बिलासपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल करते हुए बताया कि ये लोग शहर में मजदूर बनकर रह रहे थे और गुप्त सूचनाएं जंगल में बैठे नक्सली नेताओं तक पहुंचा रहे थे। जांच के अनुसार आरोपी Raipur के रिहायशी इलाकों में किराए के मकानों में रहते थे, ताकि किसी को शक न हो। बताया गया कि संगठन का सदस्य आकाश उर्फ पवन उर्फ पुष्कर मुआर्य चंगोराभाठा क्षेत्र में मजदूर बनकर रह रहा था और यही मकान शहरी नेटवर्क का संचालन केंद्र बना हुआ था। पेनड्राइव और कोडवर्ड से होता था संपर्क 💻 SIA की जांच में सामने आया कि आरोपी पेनड्राइव, लिफाफों में बंद पत्र और तय कोडवर्ड के जरिए संदेश भेजते थे। वे Raipur, Simga, Rajim और Bilaspur में गुप्त बैठकों का आयोजन करते थे। कुछ आरोपी शहर और जंगल के बीच “कूरियर” की भूमिका निभाते थे—वे सूचनाएं, विस्फोटक सामग्री और जरूरी सामान पहुंचाते-लाते थे। छापे में सोना, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद 💰 जांच एजेंसी ने कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया, जिसमें सोने के बिस्किट, करीब 2.5 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, कई पेनड्राइव और मोबाइल फोन शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 30 तोला सोना मिलने की बात सामने आई है। कॉल इंटरसेप्शन से मिला सुराग 📡 खुफिया एजेंसियों को जग्गू उर्फ रवि उर्फ रमेश कुरसम और उसकी पत्नी कमला के बारे में फोन कॉल इंटरसेप्शन से जानकारी मिली। तकनीकी निगरानी में रायपुर से बस्तर क्षेत्र तक संपर्क होने के संकेत मिलने पर पुलिस सक्रिय हुई। 23 सितंबर 2025 को डीडी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद जांच SIA को सौंपी गई। टीम ने रायपुर के साथ-साथ Bijapur और Narayanpur में भी दबिश देकर नेटवर्क को ध्वस्त किया। गिरफ्तारी के बाद बढ़ सकती है कार्रवाई ⚖️ गिरफ्तार आरोपियों पर गंभीर धाराओं—BNS और UAPA—के तहत केस दर्ज किया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

