Raipur Police Commissionerate

रायपुर पुलिस कमिश्नरी पर कांग्रेस का हमला: “वसूली कमिश्नरेट” बन गया सिस्टम

राजधानी रायपुर में लागू पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को लेकर कांग्रेस ने सरकार और पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था अब “वसूली कमिश्नरेट” में बदल गई है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से कमिश्नरी सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन जमीन पर कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। उनका आरोप है कि शहर में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि आम लोग ट्रैफिक चालानों के डर से परेशान हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि शहर के कई चौराहों पर स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग तक साफ नहीं दिखती, फिर भी लोगों पर नियम उल्लंघन के नाम पर चालान भेजे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चालान नहीं भरने पर वाहनों को जब्त करने की चेतावनी दी जाती है और कई मामलों में ऐसा किया भी गया है। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कमिश्नरी सिस्टम का मकसद अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग था, लेकिन मौजूदा स्थिति में पुलिस की प्राथमिकता सिर्फ ट्रैफिक चालान तक सीमित दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि मोहल्लों में फैल रहे नशे के कारोबार पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्टाफ की कमी को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना है कि उच्च स्तर के अधिकारियों की तैनाती तो कर दी गई है, लेकिन थानों में काम करने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या पहले जैसी ही है, जिससे व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही। सुशील आनंद शुक्ला ने मांग की कि थानों में पर्याप्त स्टाफ बढ़ाया जाए और पुलिस को केवल चालान तक सीमित न रखकर अपराध नियंत्रण पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए जाएं।

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रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का नया पता तय, सिविल लाइंस के C-3 बंगले से होगा संचालन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद अब पुलिस कमिश्नर कार्यालय का स्थायी पता बदल दिया गया है। अब से रायपुर पुलिस कमिश्नर का कार्यालय सिविल लाइंस स्थित C-3 बंगले से संचालित होगा। रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला और एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले इसी नए कार्यालय से राजधानी की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगे। जानकारी के मुताबिक C-3 बंगला वही परिसर है, जहां पहले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा का निवास था। राज्य शासन के निर्णय के बाद इस बंगले को अब पूरी तरह पुलिस कमिश्नर कार्यालय के रूप में विकसित कर दिया गया है। आज से नए कार्यालय में कामकाज शुरू पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में इसका संचालन अस्थायी रूप से पुराने राजस्व कमिश्नर कार्यालय से किया जा रहा था। अब जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने C-3 बंगले में स्थित नए कार्यालय से कामकाज शुरू कर दिया है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले भी इसी परिसर से अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। जगह और सुरक्षा को देखते हुए लिया गया फैसला पुराने राजस्व कमिश्नर कार्यालय में पर्याप्त जगह की कमी और सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए नए और सुरक्षित परिसर की जरूरत महसूस की जा रही थी। सिविल लाइंस का C-3 बंगला सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है, जिससे यहां से कानून-व्यवस्था की निगरानी और प्रशासनिक कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।

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रायपुर में आंशिक कमिश्नरेट सिस्टम लागू, पुलिस दो हिस्सों में बंटी

21 थाने कमिश्नर के अधीन, 12 थाने SP के नियंत्रण में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 23 जनवरी 2026 से रायपुर जिले के एक हिस्से में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस संबंध में गृह विभाग ने बुधवार शाम आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। नए सिस्टम के तहत रायपुर की पुलिस व्यवस्था को दो भागों में बांटा गया है। जिले के 21 थाने पुलिस कमिश्नर के अंतर्गत आएंगे, जबकि 12 थाने एसपी (SP) के अधीन काम करेंगे। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर मॉडल पर आधारित बताई जा रही है, जहां शहरी और ग्रामीण इलाकों की पुलिसिंग अलग-अलग ढांचे में संचालित होती है। पूरे जिले में लागू नहीं हुआ सिस्टम कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इसे पूरे रायपुर जिले में लागू किया जाएगा। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था और इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष रखा गया था। हालांकि 21 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में IAS लॉबी के विरोध के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। बाद में भोपाल-इंदौर मॉडल के अनुसार आंशिक रूप से सिस्टम लागू करने पर सहमति बनी। IPS लॉबी ने जताई नाराजगी वहीं IPS अधिकारियों का मानना है कि अधूरे कमिश्नरेट सिस्टम से जिले में भ्रम की स्थिति बनेगी। अधिकारियों के अनुसार अब पुलिस के लिए दो अलग-अलग प्रशासनिक स्ट्रक्चर तैयार करने होंगे, जबकि विभाग के पास न तो पर्याप्त मैनपावर है और न ही संसाधन। दो अधिकारियों के नियंत्रण में जिले की पुलिस रहने से यह व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। IPS लॉबी का कहना है कि इससे कानून-व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने की बजाय व्यवस्थागत समस्याएं बढ़ेंगी। सीमाओं के बंटवारे पर सवाल अधिकारियों के मुताबिक कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिसिंग की सीमाएं मनमाने तरीके से तय की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के बावजूद उरला थाना क्षेत्र को कमिश्नरेट में शामिल किया गया, ताकि पंचायत क्षेत्रों पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं मुजगहन सहित करीब 10 थानों को ग्रामीण पुलिस के अधीन कर दिया गया, जहां पंचायतों से प्रशासनिक रुचि कम बताई जा रही है। कमेटी की रिपोर्ट भी नजरअंदाज एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और अपराध दर को देखते हुए पूरे जिले में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी। कमेटी ने भुवनेश्वर मॉडल को अधिक प्रभावी बताते हुए अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी थी, लेकिन अब तक इस पर न चर्चा हुई और न ही कमेटी से कोई फीडबैक लिया गया। पुलिस बल की भारी कमी राजधानी के अनुरूप रायपुर के एक थाने में कम से कम 75 पुलिसकर्मियों की जरूरत है, जबकि फिलहाल औसतन 30 से 35 जवान ही तैनात हैं। अब कमिश्नरेट सिस्टम के चलते मौजूदा बल का भी बंटवारा होगा, जिससे फील्ड ड्यूटी में कमी आने की आशंका है। जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में प्रभावी पुलिसिंग के लिए 7500 से अधिक पुलिस बल की आवश्यकता है। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से थानों की बजाय दफ्तरों में स्टाफ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी की तैयारी, पूरे जिले में लागू करने के संकेत

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के दायरे को लेकर बड़ा फैसला जल्द हो सकता है। संकेत हैं कि नवा रायपुर के साथ-साथ पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस संबंध में आज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया जा सकता है। कमिश्नरी सिस्टम के विस्तार का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। एक सर्वे में करीब 90 फीसदी लोगों ने नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी के अंतर्गत लाने की मांग की थी। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पूरे जिले में इसे लागू करने का समर्थन किया है। निवेश और रोजगार से जुड़ा है मजबूत कानून व्यवस्था मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी स्तर के अधिकारियों का मानना है कि जहां कानून व्यवस्था मजबूत होती है, वहां निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर बनते हैं। इससे जनता का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होता है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त लॉ एंड ऑर्डर का सीधा असर शासन की स्थिरता पर पड़ता है। 31 दिसंबर को ऐलान, लेकिन खाका अब तक अधूरा 31 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करने का निर्णय लिया गया था। गृह विभाग को इसका पूरा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन 21 दिन बीतने के बाद भी खाका तैयार नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने पर आपत्ति है। उनका मानना है कि पुलिस को प्रशासन के अधीन ही रहना चाहिए। इसी कारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है। सरकार की मंशा पूरे जिले में सिस्टम लागू करने की डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कई बार पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी लागू करने को लेकर पत्राचार किया है। एडीजी स्तर की कमेटी ने भी पुलिस कमिश्नर को पूर्ण अधिकार देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार मजबूत और प्रभावी कमिश्नरी सिस्टम लागू करना चाहती है। दोहरी पुलिसिंग से बढ़ेगा खर्च अगर रायपुर शहर में कमिश्नरी और ग्रामीण इलाकों में देहात पुलिस सिस्टम लागू किया गया, तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। देहात क्षेत्र के लिए अलग से एसपी, एएसपी, डीएसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, कंट्रोल रूम, वायरलेस सिस्टम और वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। इस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। थानों की दूरी बढ़ने से जनता को होगी परेशानी देहात पुलिसिंग लागू होने पर नगर निगम सीमा से लगे कई इलाकों को ग्रामीण थानों में शामिल किया जाएगा। इससे थानों की दूरी बढ़ेगी और आम लोगों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी होगी। विधानसभा थाना क्षेत्र से जुड़े सेमरिया, नरदहा और बरोंदागांव जैसे इलाके ग्रामीण थानों में चले जाएंगे। जहां विधानसभा थाना मात्र एक किलोमीटर दूर है, वहीं खरोरा या सिलतरा थाना 25 से 35 किलोमीटर दूर पड़ता है। विशेषज्ञों की राय: पूरे अधिकारों के साथ लागू हो कमिश्नरी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधे-अधूरे अधिकारों के साथ कमिश्नरी लागू करना पुलिस को कमजोर करेगा। औद्योगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट, मंत्रालय और सचिवालय को भी कमिश्नरी के दायरे में लाया जाना चाहिए। दिल्ली, मुंबई और कानपुर जैसे शहरों की तरह रायपुर में भी पूरे जिले में यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।

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कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में पहली बार राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी से प्रभावी हो सकती है। इसे लेकर गृह विभाग द्वारा विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 शहरी थानों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों के 15 थानों के लिए अलग से ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं लागू होंगी। यह मॉडल पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में लागू किया गया था, लेकिन वहां इसे व्यावहारिक कठिनाइयों और समन्वय की कमी के चलते असफल माना गया। बाद में यूपी सरकार ने पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया था। अब इसी मॉडल को रायपुर में लागू करने की तैयारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी पुलिस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं। शहरी-ग्रामीण विभाजन से सामने आ सकती हैं ये समस्याएं 1. वीआईपी मूवमेंट में बढ़ेगी जटिलताअगर कमिश्नरी सिस्टम केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहता है, तो पुराने रायपुर से नवा रायपुर के बीच वीआईपी मूवमेंट के दौरान दो अलग-अलग कारकेड लगाने पड़ेंगे। नगर निगम सीमा तक कमिश्नरी पुलिस और उसके आगे ग्रामीण पुलिस द्वारा सुरक्षा संभालने की व्यवस्था करनी होगी। 2. प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बंटेगी दो हिस्सों मेंइस प्रस्तावित सिस्टम में एयरपोर्ट ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। वहीं सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास, राजभवन और मंत्री बंगलों की सुरक्षा पुलिस कमिश्नर के जिम्मे होगी। दूसरी ओर, नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास, विधानसभा, मंत्रालय और सचिवालय की सुरक्षा ग्रामीण एसपी के अधीन रहेगी। 3. अपराध की जांच में सीमा विवादहत्या, लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों में शहरी और ग्रामीण सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में घटना होने पर जांच एजेंसी तय करने में देरी और आपसी समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रशासनिक अनुमतियों के लिए शासन स्तर पर निर्भरता बढ़ेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो। पुलिस कमिश्नर को धारा 144 लागू करने, हथियार लाइसेंस, जिला बदर और आबकारी से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनका मानना है कि आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाना चाहिए, ताकि अनुभव के आधार पर बेहतर निर्णय लिए जा सकें। एक शहर, दो पुलिसिंग पर सवाल स्थानीय विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि एक ही शहर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था प्रशासनिक भ्रम और जवाबदेही का संकट पैदा कर सकती है। नवा रायपुर जैसे आधुनिक और विकसित क्षेत्र को ग्रामीण श्रेणी में रखना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब राजधानी, कलेक्टर और प्रशासनिक ढांचा एक है, तो पुलिस व्यवस्था भी एक समान होनी चाहिए। अन्यथा पुलिस सुधार के नाम पर यह व्यवस्था आधा-अधूरा प्रयोग साबित हो सकती है। भारत में पुलिसिंग के दो प्रमुख मॉडल भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रणालियों पर आधारित है—सुपरिटेंडेंट सिस्टम, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लागू होता है, जहां कानून-व्यवस्था के अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।वहीं कमिश्नरेट सिस्टम बड़े शहरों में लागू होता है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी दी जाती है और वे सीधे कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं।

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