कुत्ते के नाम में ‘राम’ विकल्प बना विवाद की जड़: चौथी के पेपर पर बवाल, प्रधान पाठक निलंबित
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल ने प्रदेशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। प्रश्न में ‘मोना के कुत्ते का नाम’ पूछा गया था, जिसके विकल्पों में बाला, शेरू, कोई नहीं के साथ ‘राम’ नाम भी शामिल था। इस प्रश्न पत्र को रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों में परीक्षा के दौरान वितरित किया गया। जैसे ही प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि कुत्ते के नाम के विकल्प में ‘राम’ लिखे जाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने प्रश्न पत्र तैयार करने वाली प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया है, जबकि मॉडरेटर शिक्षिका को सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ‘रामू’ लिखना था, टाइपिंग में गलती हो गई जांच के दौरान दोनों शिक्षिकाओं ने अपनी-अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित में माफी मांगी है।प्रधान पाठक शिखा सोनी ने स्पष्टीकरण में कहा कि उनका आशय ‘रामू (RAMU)’ लिखने का था, लेकिन टाइपिंग के दौरान ‘U’ छूट गया और ‘RAM’ छप गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई मानवीय भूल बताया। वहीं, मॉडरेटर नम्रता वर्मा ने कहा कि उन्हें जो प्रश्न पत्र का सेट मॉडरेशन के लिए मिला, उसमें विकल्प पहले से मौजूद थे और उनसे भी यह त्रुटि नजरअंदाज हो गई। धार्मिक भावनाएं आहत होने की पुष्टि रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित 5 सदस्यीय जांच समिति ने प्रश्न पत्र निर्माण, मॉडरेशन और अंतिम मुद्रण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की। समिति की रिपोर्ट में माना गया कि राम हिंदू धर्म के आराध्य देव हैं, ऐसे में विकल्प के रूप में यह नाम देना अनुचित है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रश्न पत्र का निर्माण शासकीय प्राथमिक स्कूल नकटी (खपरी), तिल्दा की प्रधान पाठक शिखा सोनी ने किया था और मॉडरेशन सेजेस उच्च माध्यमिक विद्यालय फाफाडीह, रायपुर की सहायक शिक्षक नम्रता वर्मा ने किया। सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद, राजनीति भी गरमाई 6 जनवरी को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र वायरल हुआ। इसके अगले दिन NSUI रायपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। DEO हिमांशु भारती ने इसे विभागीय चूक मानते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई है, जो तय समय में रिपोर्ट देगी और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं महासमुंद DEO विजय लहरे ने कहा कि उनके जिले में जानकारी मिलते ही विवादित विकल्प को हटाकर अन्य प्रश्न पत्र बांटे गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। प्रिंटिंग को लेकर अलग-अलग दावे प्रश्न पत्र की छपाई को लेकर शिक्षा विभाग और प्रिंटिंग प्रेस के बीच भी बयानबाजी सामने आई है। DEO का कहना है कि गलत सेट छप गया, जबकि प्रिंटिंग हाउस संचालक ने दावा किया कि वही सामग्री छापी गई, जो विभाग से भेजी गई थी। NSUI ने इसे सिर्फ तकनीकी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा है कि यदि जांच के नाम पर दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो संगठन आंदोलन करेगा।

