रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी की तैयारी, पूरे जिले में लागू करने के संकेत
रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के दायरे को लेकर बड़ा फैसला जल्द हो सकता है। संकेत हैं कि नवा रायपुर के साथ-साथ पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस संबंध में आज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया जा सकता है। कमिश्नरी सिस्टम के विस्तार का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। एक सर्वे में करीब 90 फीसदी लोगों ने नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी के अंतर्गत लाने की मांग की थी। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पूरे जिले में इसे लागू करने का समर्थन किया है। निवेश और रोजगार से जुड़ा है मजबूत कानून व्यवस्था मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी स्तर के अधिकारियों का मानना है कि जहां कानून व्यवस्था मजबूत होती है, वहां निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर बनते हैं। इससे जनता का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होता है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त लॉ एंड ऑर्डर का सीधा असर शासन की स्थिरता पर पड़ता है। 31 दिसंबर को ऐलान, लेकिन खाका अब तक अधूरा 31 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करने का निर्णय लिया गया था। गृह विभाग को इसका पूरा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन 21 दिन बीतने के बाद भी खाका तैयार नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने पर आपत्ति है। उनका मानना है कि पुलिस को प्रशासन के अधीन ही रहना चाहिए। इसी कारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है। सरकार की मंशा पूरे जिले में सिस्टम लागू करने की डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कई बार पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी लागू करने को लेकर पत्राचार किया है। एडीजी स्तर की कमेटी ने भी पुलिस कमिश्नर को पूर्ण अधिकार देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार मजबूत और प्रभावी कमिश्नरी सिस्टम लागू करना चाहती है। दोहरी पुलिसिंग से बढ़ेगा खर्च अगर रायपुर शहर में कमिश्नरी और ग्रामीण इलाकों में देहात पुलिस सिस्टम लागू किया गया, तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। देहात क्षेत्र के लिए अलग से एसपी, एएसपी, डीएसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, कंट्रोल रूम, वायरलेस सिस्टम और वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। इस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। थानों की दूरी बढ़ने से जनता को होगी परेशानी देहात पुलिसिंग लागू होने पर नगर निगम सीमा से लगे कई इलाकों को ग्रामीण थानों में शामिल किया जाएगा। इससे थानों की दूरी बढ़ेगी और आम लोगों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी होगी। विधानसभा थाना क्षेत्र से जुड़े सेमरिया, नरदहा और बरोंदागांव जैसे इलाके ग्रामीण थानों में चले जाएंगे। जहां विधानसभा थाना मात्र एक किलोमीटर दूर है, वहीं खरोरा या सिलतरा थाना 25 से 35 किलोमीटर दूर पड़ता है। विशेषज्ञों की राय: पूरे अधिकारों के साथ लागू हो कमिश्नरी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधे-अधूरे अधिकारों के साथ कमिश्नरी लागू करना पुलिस को कमजोर करेगा। औद्योगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट, मंत्रालय और सचिवालय को भी कमिश्नरी के दायरे में लाया जाना चाहिए। दिल्ली, मुंबई और कानपुर जैसे शहरों की तरह रायपुर में भी पूरे जिले में यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।
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