छत्तीसगढ़ के आत्मानंद स्कूलों में बड़ा बदलाव, अब प्रिंसिपल भी पढ़ाएंगे और रोज होगी पढ़ाई की समीक्षा

छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में आने वाले सत्र से पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नया अकादमिक मॉडल लागू किया है, जिसमें अब ध्यान केवल प्रशासन नहीं बल्कि पढ़ाई, निगरानी और छात्रों के समग्र विकास पर रहेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रिंसिपल की भूमिका में अहम बदलाव किया गया है। अब वे सिर्फ प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें अकादमिक लीडर की जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्हें रोजाना शिक्षकों के साथ बैठकर पढ़ाई की समीक्षा करनी होगी और साथ ही प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड पढ़ाना भी अनिवार्य किया गया है। हर हफ्ते क्लास के अनुसार पढ़ाई का लक्ष्य तय किया जाएगा, ताकि सिलेबस समय पर पूरा हो सके और छात्रों की प्रगति पर नजर रखी जा सके। स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली बार पूरे सत्र के लिए विस्तृत अकादमिक कैलेंडर तैयार किया है। इसमें हर महीने पढ़ाए जाने वाले पाठ पहले से निर्धारित होंगे और उसी के अनुसार परीक्षाओं की योजना भी बनाई गई है। स्कूलों में अनुशासन और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए वंदे मातरम को अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए हर स्कूल को साउंड सिस्टम खरीदने हेतु 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। हर शनिवार को अब “गतिविधि दिवस” के रूप में विकसित किया गया है। इस दिन छात्र बिना बैग के स्कूल आएंगे और योग के बाद उन्हें अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा। एक समूह गार्डनिंग, क्राफ्ट जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेगा, जबकि दूसरा समूह टेस्ट देकर अपनी तैयारी का आकलन करेगा। इससे एक ही दिन में कौशल विकास और पढ़ाई दोनों को बढ़ावा मिलेगा। पढ़ाई को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के त्योहारों और परंपराओं का भी कैलेंडर तैयार किया गया है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों की पारंपरिक गतिविधियों को स्कूलों में शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहें। इसके अलावा बच्चों को महापुरुषों के जीवन और विचारों से परिचित कराने के लिए विशेष कैलेंडर बनाया गया है। हर महीने दो महान व्यक्तित्वों की जयंती या पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें छात्र उनके आदर्शों पर चर्चा और भाषण देंगे। शिक्षा सत्र जून 2026 से शुरू होगा, जिसमें 1 से 20 जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 22 जून को शाला प्रवेशोत्सव के साथ नई कक्षाएं शुरू होंगी। इस पूरे मॉडल का उद्देश्य शिक्षा के स्तर में सुधार लाना, अनुशासन बढ़ाना और छात्रों को बेहतर वातावरण देना है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार, इस पहल के जरिए आत्मानंद स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ-साथ बच्चों को संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

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