रायपुर में निजी स्कूलों का बढ़ता दायरा: 10 में से 6 छात्र प्राइवेट संस्थानों में नामांकित
रायपुर। जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर जारी 2026 की ताजा APAAR आईडी स्टेटस रिपोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। आंकड़ों के मुताबिक अब रायपुर में सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कहीं अधिक हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि जिले में कुल 5,40,869 छात्र नामांकित हैं। इनमें से 2,22,265 छात्र सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत हैं, जबकि 3,18,604 छात्र निजी स्कूलों में दर्ज हैं। यानी करीब 96 हजार से अधिक छात्र निजी स्कूलों में ज्यादा हैं। सरल शब्दों में कहें तो रायपुर में हर 10 में से लगभग 6 बच्चे प्राइवेट स्कूलों में और 4 बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। राजधानी ब्लॉक में सबसे ज्यादा अंतर रायपुर शहरी ब्लॉक के आंकड़े सबसे अधिक चौंकाने वाले हैं। यहां कुल 2,34,828 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से 1,73,825 छात्र निजी और मदरसा स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जबकि केवल 61,003 छात्र सरकारी और एडेड स्कूलों में हैं। इसका अर्थ है कि राजधानी क्षेत्र में लगभग 70 से 80 प्रतिशत छात्र निजी संस्थानों की ओर रुख कर चुके हैं। धरसींवा जैसे औद्योगिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों की पकड़ मजबूत नजर आती है। ब्लॉकवार स्थिति सरकारी स्कूल अपेक्षाकृत मजबूत निजी स्कूलों का दबदबा यह ट्रेंड दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूल अब भी टिके हुए हैं, जबकि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में निजी स्कूलों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। APAAR रिपोर्ट क्या है? APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) केंद्र सरकार की “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल का हिस्सा है। इसके तहत हर छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाती है, जो आधार सत्यापन से जुड़ी होती है। नामांकन, आधार वैलिडेशन और आईडी जनरेशन का पूरा डेटा डिजिटल डैशबोर्ड पर दर्ज किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार रायपुर जिले में 95.11% छात्रों की APAAR आईडी बन चुकी है, जो डिजिटल कवरेज के लिहाज से बेहतर स्थिति दर्शाती है। विशेषज्ञों की राय शिक्षाविदों का मानना है कि निजी स्कूलों में बढ़ती संख्या के पीछे कई सामाजिक और संरचनात्मक कारण हैं। अभिभावकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि निजी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी वातावरण बेहतर मिलता है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अधोसंरचना की चुनौतियां और बार-बार तबादलों जैसी समस्याएं पढ़ाई की निरंतरता को प्रभावित करती हैं। आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं? APAAR रिपोर्ट के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि रायपुर में शिक्षा का संतुलन अब निजी संस्थानों की ओर झुक चुका है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाएं और अभिभावकों का विश्वास कैसे मजबूत किया जाए, ताकि नामांकन का अंतर कम हो सके।

