रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज: 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सेवा से बदल सकती है तस्वीर
रायपुर। राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के फैलते दायरे के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब बुनियादी जरूरत बन चुका है। कई योजनाएं बनीं, बस सेवाएं शुरू भी हुईं, लेकिन आज भी आम लोगों को सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ‘रायपुर मांगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ अभियान के तहत आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने खुलकर अपनी बात रखी। 350 बसें चलें तो बढ़े भरोसा पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि नवा रायपुर और सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बस सुविधा नहीं है। आम लोगों को मंत्री या अधिकारियों से मिलने के लिए 400–500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। उनका सुझाव है कि कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूट पर चलाई जाएं। उन्होंने निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत बस संचालन को व्यावहारिक विकल्प बताया, ताकि सरकारी फंड की देरी से बचा जा सके। मिनी बसें और लंबी दूरी के रूट जरूरी पुरंदर मिश्रा ने कहा कि शहर के अंदरूनी इलाकों के लिए मिनी सिटी बसें शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद सेवा लगभग ठप हो गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का मानना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सफल बनाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। लंबी दूरी के रूट पर समयबद्ध बस सेवा शुरू होने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा। जाम से राहत का समाधान राजेश मूणत ने कहा कि शहर में कई बस स्टॉप बने हैं, लेकिन बसें नियमित नहीं चल रहीं। जब तक सिटी बस सेवा व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म नहीं होगी। वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और रूट प्लानिंग की कमी रही। अब केंद्र की योजनाओं के तहत सुधार की कोशिश की जा रही है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि सस्ती और भरोसेमंद बस सेवा जनता का अधिकार है। सरकार को किराया और रूट निर्धारण पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। परिवहन विभाग की स्थिति परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल ने बताया कि 30 सिटी बसों के परमिट जारी हैं, लेकिन कितनी बसें संचालित हो रही हैं, इसकी जानकारी निगम के पास है। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए किराया निर्धारित है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पीएम ई-बस योजना पर फोकस केंद्र सरकार की पीएम ई-बस योजना के तहत रायपुर को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। जरवाय में करीब 2 हेक्टेयर में बस डिपो का निर्माण किया जा रहा है, जो चार महीने में तैयार होने की संभावना है। इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सरोना से 33 केवी लाइन बिछाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समयबद्ध, सस्ती और पर्याप्त संख्या में बसें चलाई जाएं तो रायपुर में निजी वाहनों की निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी।

