दावरा यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप, छात्र ने लगाया भविष्य बर्बाद करने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ की दावरा यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। यूनिवर्सिटी में फार्मेसी कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्र सागर गुप्ता ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उन्हें पीसीआई (Pharmacy Council of India) की मान्यता होने का भरोसा देकर एडमिशन कराया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि कोर्स को पीसीआई की स्वीकृति ही नहीं मिली थी। छात्र सागर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने एडमिशन से पहले कई बार यूनिवर्सिटी से PCI अप्रूवल को लेकर स्पष्ट सवाल किए थे। हर बार उन्हें यही बताया गया कि कोर्स पूरी तरह से अप्रूव्ड है। इसके बाद उन्होंने तय फीस जमा कर फार्मेसी कोर्स में एडमिशन ले लिया। 5 दिसंबर को किया गया बड़ा खुलासा सागर का आरोप है कि एडमिशन के काफी समय बाद, 5 दिसंबर को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अचानक यह जानकारी दी कि पीसीआई अप्रूवल रिजेक्ट हो चुका है, जबकि इससे पहले दो बार इंस्पेक्शन होने के बावजूद छात्रों को आश्वासन दिया जाता रहा कि सब कुछ ठीक है। फ्रॉड जैसे विकल्प दिए गए छात्र का कहना है कि जब अप्रूवल न होने की बात सामने आई तो यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा तीन विकल्प दिए गए, जो पूरी तरह से भ्रामक और धोखेबाज़ी से भरे थे। इन विकल्पों में न तो पढ़ाई की उचित व्यवस्था थी और न ही भविष्य की कोई गारंटी। शिक्षकों और पढ़ाई की भारी कमी सागर ने बताया कि यूनिवर्सिटी में न तो ठीक से बैठने की व्यवस्था थी, न नियमित क्लासेज़। कई दिनों तक शिक्षक ही नहीं आते थे। 17 अगस्त से 3 अक्टूबर तक छात्र लगातार शिक्षकों और प्रशासन से संघर्ष करते रहे। दो महीने बाद एक शिक्षक आईं, लेकिन वे भी अनुभवहीन बताई जा रही हैं। कंपनसेशन से भी इनकार जब छात्रों ने अपने बर्बाद हुए समय और भविष्य को देखते हुए यूनिवर्सिटी से कंपनसेशन की मांग की, तो प्रबंधन ने इस पर भी सहमति नहीं जताई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी को बच्चों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। छात्र का आरोप सागर गुप्ता का कहना है, “हमने पूरी जानकारी लेकर एडमिशन लिया था। यूनिवर्सिटी ने झूठ बोला। हमारा कीमती समय, पैसा और भविष्य बर्बाद कर दिया गया।” ⚠️ प्रशासन से कार्रवाई की मांग इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि बिना पीसीआई अप्रूवल के छात्रों को एडमिशन कैसे दिया गया। छात्रों और उनके परिजनों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। Note- इस पूरे मामले में लगाए गए सभी आरोप छात्र सागर गुप्ता के हैं। खबर लिखे जाने तक दावरा यूनिवर्सिटी प्रबंधन से इस विषय पर कोई लिखित या मौखिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका है।

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