रायपुर में पेट्रोल 103.58 रुपए लीटर पहुंचा, पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें; प्रशासन बोला- घबराहट में लोग करवा रहे फुल टैंक
छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिली। शहर में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 103.58 रुपए प्रति लीटर और डीजल 96.57 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कीमत बढ़ने के बाद सुबह से ही कई फ्यूल स्टेशनों पर वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहीं। प्रशासन के मुताबिक, ईंधन की कमी नहीं है, लेकिन अफवाहों और कीमतों में बढ़ोतरी की खबर के कारण लोग सामान्य से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। कई वाहन चालक टैंक फुल कराने के लिए पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे अचानक दबाव बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े हैं। बिलासपुर में पेट्रोल 104.26 रुपए और डीजल 97.25 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। अंबिकापुर में पेट्रोल 104.60 रुपए और डीजल 97.66 रुपए, रायगढ़ में पेट्रोल 104.53 रुपए और डीजल 97.52 रुपए, जबकि जगदलपुर में पेट्रोल 105.22 रुपए और डीजल 98.22 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। स्थिति को देखते हुए Raipur District Administration ने पेट्रोल पंप संचालकों और तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शहर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सप्लाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने डिपो से 24 घंटे ईंधन सप्लाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। पहले टैंकरों की एंट्री तय समय तक सीमित थी, लेकिन अब लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया है ताकि पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम हो सके। हालांकि, शहर के कुछ लोगों का कहना है कि कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमत बढ़ने का असर आने वाले दिनों में रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां, फल, राशन और अन्य सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खेती, बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह मानी जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसके कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा और कीमतों में इजाफा किया गया।

