इमरजेंसी में भी पर्ची जरूरी: डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में इलाज से पहले इंतजार, मरीजों की जान पर खतरा

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों को भी तुरंत इलाज नहीं मिल पा रहा, क्योंकि पहले पर्ची (रजिस्ट्रेशन) बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस प्रक्रिया के कारण कई मरीजों की स्थिति और बिगड़ने की आशंका बढ़ रही है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि एक्सीडेंट, सीने में दर्द और अन्य गंभीर समस्याओं के साथ आए मरीजों को भी काउंटर पर लाइन में खड़ा किया जा रहा है। कई मामलों में मरीजों के परिजन स्ट्रेचर और तत्काल इलाज की गुहार लगाते रहे, लेकिन स्टाफ ने साफ कहा—पहले पर्ची बनवाइए। बताया जा रहा है कि इस देरी के कारण कुछ मरीजों की हालत बेहद गंभीर हो गई, यहां तक कि पर्ची बनवाने के दौरान मौत के आरोप भी सामने आए हैं। अस्पताल में रोजाना करीब 4 हजार मरीजों का इलाज होता है, जबकि इमरजेंसी में औसतन 200 मरीज पहुंचते हैं। स्टाफ का कहना है कि बिना पर्ची मरीज का रिकॉर्ड नहीं बनता, इसलिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इमरजेंसी में पहले प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य होता है, जबकि कागजी प्रक्रिया बाद में पूरी की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या गंभीर दुर्घटनाओं में शुरुआती 10 से 15 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान इलाज में देरी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस व्यवस्था में क्या सुधार होता है।

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Chhattisgarh, Raipur